प्रधानमंत्री मोदी के बद्रीनाथ दौरे को लेकर गौचर भी सुर्खियों में

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–गौचर। दिग्पाल गुसांईं —
सीमांत जनपद चमोली की हृदय स्थली गौचर का आजादी के 75 सालों में भले ही अपेक्षित विकास न हुआ हो लेकिन विशाल मैदान व हवाई पट्टी की वजह से वीवीआईपी के दौरों की वजह से सुर्खियों में रहना गौचर की नियति बन गई है।इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बद्रीनाथ दौरे को लेकर गौचर भी सुर्खियों के केंद्र में आ गया है।
खूबसूरत पहाड़ियों के बीच एक समतल भू भाग व ऋषिकेश बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बसे जनपद चमोली की हृदय स्थली गौचर में एक विशाल मैदान होने की वजह से आजादी के बाद से ही देश के प्रधानमंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, राष्ट्रपतियों के अलावा राजनैतिक दलों के बड़े बड़े नेताओं के दीदार करने का शौभाग्य गौचर की जनता को भले ही प्राप्त हुआ हो लेकिन इसे क्षेत्रवासियों का दुर्भाग्य ही समझे कि किसी ने भी आजतक क्षेत्र के विकास की चर्चा तक नहीं की है। आजादी के बाद देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के अलावा राजीव गांधी, राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, प्रणब मुखर्जी ने भी कुछ छण ही सही गौचर की धरती पर कदम रखे हैं।अलग राज्य बनने के बाद सूबे का कोई ऐसा मुख्यमंत्री नहीं रहा होगा जो गौचर मेले के उद्घाटन के बहाने गौचर न आया हो। लेकिन ताजुब तो इस बात का है कि किसी ने भी आजतक गौचर की जनता को ऐसी सौगात दी हो जिससे क्षेत्र के लोगों की विकास के लिए दी गई अपनी जमीन की भरपाई हो सके। कहने को तो गौचर में कृषि योग्य जमीन को कंक्रीट के जंगल में तब्दील कर हवाई पट्टी बनने से भले ही गौचर का नाम विश्व के मानचित्र में अंकित हो गया हो लेकिन हवाई पट्टी बनने के 22 साल बाद भी हवाई जहाज सेवा शुरू नहीं की जा सकी है। इससे इसके औचित्य पर भी सवाल उठने लगे हैं। गौचर के लिए स्वीकृत इंजीनियरिंग कॉलेज का भी आजतक पता नहीं चल पाया है। यही हाल वैटनरी कालेज का भी है।टोकन मनी जारी होने के बाद भी यह योजना वर्षों से फाइलों में धूल फांक रही है। बोली भाषा संस्थान का कार्यालय खोलने के कुछ समय बाद ही इसे भी यहां से चलता कर दिया गया। सिंचाई व पेयजल व्यवस्था का तो और भी बुरा हाल है।इन तमाम समस्याओं से जूझ रहे क्षेत्रवासियों ने बड़ा दिल दिखाकर ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन के लिए जमीन तो दी लेकिन ताजुब तो इस बात का है कि रेलवे का निर्माण कार्य कर रही कंपनियां स्थानीय लोगों को रोजगार देने में आनाकानी कर रही है।यह अलग बात कि जब कभी क्षेत्र में वीवीआईपी का दौरा लगता है तमाम व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने का भरसक प्रयास किया जाता है।इस बार देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 21अक्तूबर को बद्रीनाथ आने का कार्यक्रम तय हुआ है आपातकालीन स्थिति में उनके रुकने के लिए गौचर में भी व्यवस्थाएं चाक चौबंद करने से गौचर बार पुनः सुर्खियों के केंद्र में आ गया है।

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