उत्तराखंड के लाल, दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा नहीं रहे
भारतीय खेल जगत को अपूरणीय क्षति, 49 वर्ष की आयु में निधन
नई दिल्ली/देहरादून, 12 जून। भारत के महानतम निशानेबाजों में शामिल और ओलंपिक पदक विजेता खिलाड़ियों के निर्माता माने जाने वाले Jaspal Rana का शुक्रवार को 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय खेल जगत, विशेषकर निशानेबाजी समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अनेक राष्ट्रीय नेताओं, खिलाड़ियों और खेल संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

जानकारी के अनुसार, हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से लौटते समय उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। दिल्ली पहुंचने पर उन्हें साकेत स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में जन्मे जसपाल राणा ने कम उम्र में ही निशानेबाजी की दुनिया में अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया। उन्होंने 1990 के दशक में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत को नई पहचान दिलाई। एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ खेलों और एशियाई निशानेबाजी चैंपियनशिप में उन्होंने अनेक स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
जसपाल राणा को भारत के सबसे सफल कॉमनवेल्थ खेल खिलाड़ियों में गिना जाता है। उन्होंने अपने शानदार करियर में कॉमनवेल्थ खेलों में 15 पदक जीते, जिनमें 9 स्वर्ण पदक शामिल हैं। 1994 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई थी।
खिलाड़ी के रूप में सफलता के बाद उन्होंने कोच की भूमिका में भी भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। वे भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे। पेरिस ओलंपिक 2024 में दो कांस्य पदक जीतने वाली स्टार निशानेबाज Manu Bhaker की सफलता के पीछे भी जसपाल राणा का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। उन्हें खिलाड़ियों का “सुपर गुरु” कहा जाता था।
उनकी उपलब्धियों के सम्मान में भारत सरकार ने उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्मश्री और बाद में कोचिंग क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक संदेश में कहा कि जसपाल राणा ने अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश को गौरवान्वित किया और एक मार्गदर्शक के रूप में अनेक युवा खिलाड़ियों को तैयार किया। उन्होंने कहा कि उनका निधन भारतीय खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे केवल एक महान खिलाड़ी और कोच ही नहीं, बल्कि अत्यंत सरल, मिलनसार और प्रेरणादायी व्यक्तित्व के धनी थे।
उत्तराखंड के लिए भी यह क्षति अत्यंत भावनात्मक है। पहाड़ की धरती से निकलकर विश्व मंच पर भारत का परचम लहराने वाले जसपाल राणा ने अनगिनत युवाओं को खेलों में करियर बनाने की प्रेरणा दी। उनका जीवन संघर्ष, अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्टता का प्रतीक रहा।
जसपाल राणा के निधन से भारतीय निशानेबाजी ने अपना एक स्वर्णिम अध्याय खो दिया है। एक महान खिलाड़ी, सफल प्रशिक्षक और प्रेरणास्रोत के रूप में उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को देश के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की प्रेरणा देती रहेंगी।
