सक्षम बुजुर्गों के लिए पुन: रोजगार की व्यवस्था करने जा रही है सरकार

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नयी दिल्ली, 1 अक्टूबर (PIB )

भारत में वरिष्ठ नागरिकों की आबादी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 1951 में 1.98 करोड़ से बढ़कर 2001 में 7.6 करोड़ और 2011 में 10.38 करोड़ हो चुकी है। राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को सौंपी गई भारत और राज्यों के लिए जनसंख्या अनुमानों पर तकनीकी समूह (2011-2036) की रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ नागरिकों की जनसंख्या को नीचे प्रदान किए गए विवरण के रूप में अनुमानित किया गया है: –

2011 2021 2026 2031 2036
जनसंख्या प्रतिशत जनसंख्या प्रतिशत जनसंख्या प्रतिशत जनसंख्या प्रतिशत जनसंख्या प्रतिशत
0.38 8.66 13.76 10.1 16.28 11.4 19.34 13.1 22.74 14.9

पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं में सामान्य रूप से सुधार होना वरिष्ठ नागरिकों की जनसंख्या के अनुपात में निरंतर बढ़ोत्तरी का एक मुख्य कारण है। यह सुनिश्चित करना कि वे केवल लंबे समय तक जीवित न रहें, बल्कि एक सुरक्षित, सम्मानजनक और उपयोगी जीवन व्यतीत करें, एक बड़ी चुनौती है। इन बुजुर्गों को पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा के अभाव में बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इससे पता चलता है कि बुढ़ापा एक प्रमुख सामाजिक चुनौती बन गया है और बुजुर्गों को आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं के लिए एक प्रावधान बनाने और एक सामाजिक परिवेश बनाने की आवश्यकता है. एक सक्रिय वरिष्ठ नागरिक घर पर बिना काम के अकेला महसूस करता है, हालांकि वह काम करने और परिपक्व चुनौतीपूर्ण सेवाएं प्रदान करने के लिए समान रूप से सक्षम होता है।

इसलिए, हमारी चुनौती यह है कि पूरे देश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक ऐसे समाज का निर्माण करने के उपायों के बारे में सोचा जाएं, जिसमें वे स्वस्थ, सुखी, सशक्त, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन व्यतीत कर सकें, साथ ही समाज में शामिल होकर मजबूत सामाजिक और अंतर-पीढ़ीगत संबंध स्थापित किया जा सके, विशेष रूप से वृद्धजनों को रोजगार का अवसर प्रदान करने के लिए निम्नलिखित हितधारकों को शामिल करके: –

  • निजी फर्में/कॉर्पोरेट्स
  • शिक्षण संस्थान
  • कंसल्टेंसी सेवाओं के लिए सरकारी क्षेत्र और स्थानीय निकाय
  • गैर-लाभकारी, गैर-सरकारी संघ, समाज/ट्रस्ट आदि
  • मीडिया और बड़े पैमाने पर जनता को शामिल करके।

एलएएसआई की रिपोर्ट, 2020 के अनुसार 50 प्रतिशत से ज्यादा वरिष्ठ नागरिक सक्रिय रहते हैं। कई वरिष्ठ नागरिकों जिनके पास अनुभव, समय और ऊर्जा है उनका उपयोग व्यापारिक उद्यमों द्वारा किया जा सकता है जो अनुभव के साथ स्थिर कर्मचारियों की तलाश करते हैं। कई निजी उद्यमों के मानव संसाधन विभाग कुछ पदों पर अनुभवी लेकिन स्थिर कर्मचारियों की तलाश करते हैं। यह पोर्टल इन लोगों को वरीयताओं के वर्चुअल मैचिंग के माध्यम से एक साथ लाने की अनुमति प्रदान करता है।

पोर्टल का विषय-क्षेत्र

  1. रोजगार की चाहत रखने वाले वरिष्ठ नागरिकों और रोजगार प्रदाताओं को एक मंच पर लाने के लिए एक आईटी पोर्टल विकसित किया जाएगा और एक पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से चुनी गई एजेंसी द्वारा इसका विकास और रखरखाव किया जाएगा।
  2. एक वरिष्ठ नागरिक अपने प्रासंगिक शिक्षा, पिछले अनुभव, कौशल और रूचि वाले क्षेत्रों के साथ पोर्टल पर अपने आप को पंजीकृत करवाएगा। व्यक्ति अपेक्षित कार्यों के बारे में कीवर्ड का भी चयन करेगा, जिससे नौकरी प्रदाता उन्हें स्वतः ढूंढ सकेंगे। विवरण को वरिष्ठ नागरिकों द्वारा अपडेट भी किया जा सकता है।
  • कोई भी रोजगार प्रदाता – व्यक्तिगत/ फर्म/ कंपनी/ साझेदारी/ स्वैच्छिक संगठन आदि भी पोर्टल पर पंजीकरण करा सकता है। नौकरी प्रदाता इसमें शामिल होने वाले कार्यों और वरिष्ठ नागरिकों की संख्या को निर्दिष्ट करेगा, जो उनका कार्य पूरा करने के लिए आवश्यक हैं।
  1. वरिष्ठ नागरिकों को नौकरियों के लिए आवेदन करने में स्वैच्छिक संगठन सहायता प्रदान करेंगे। किसी भी स्वैच्छिक संगठन द्वारा किसी भी वरिष्ठ नागरिक से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसलिए, रोजगार पोर्टल न केवल रोजगार की चाहत रखने वाले वरिष्ठ नागरिकों की, बल्कि नियोक्ताओं, स्वयं सहायता समूहों, कौशल प्राप्त करने वाले वरिष्ठ नागरिकों और अन्य एजेंसियों/ व्यक्तियों की भी सेवा करेगा।
  2. रोजगार कार्यालय पोर्टल नौकरी/ रोजगार प्राप्त करने या स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बेचने या किसी अन्य गतिविधि के लिए किसी प्रकार की गारंटी प्रदान नहीं करेगा। यह एक संवादात्मक मंच के रूप में काम करेगा, जहां पर हितधारक एक-दूसरे से वर्चुअल रूप से मिलते हैं और आपसी सम्मान, सहमति और समझ के साथ आगे के कार्य के बारे में निर्णय लेते हैं।
  3. कोई भी व्यक्ति/ फर्म/ कंपनी/ एजेंसी उन संबंधित कार्यों के लिए वरिष्ठ नागरिकों की सेवाएं प्राप्त करेगा, जहां पर स्वाभाविक रूप से नए कर्मियों को काम पर रखने और उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करने से ज्यादा अनुभव काम आ सकता है, जिसका उदाहरण अल्पकालिक रोजगार, किसी परियोजना के लिए अनुबंध, शिक्षण, परामर्श देने वाली नौकरी हो सकती है। नियोक्ता और कर्मचारी आपसी सहमति और सम्मान के आधार पर भी अल्पावधि से आगे भी अपनी साझेदारी का विस्तार कर सकते हैं।

रूपरेखा: एनआईसी द्वारा वेब पोर्टल को विकसित किया जाएगा। पोर्टल पर पंजीकृत होने के लिए बुजुर्गों और उद्यमों दोनों के बीच इसका पर्याप्त रूप से प्रचार-प्रसार किया जाएगा

वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन

वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों को समझने के लिए और देश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए मौजूदा हेल्पलाइन और कुछ अंतर्राष्ट्रीय हेल्पलाइनों को समझने और उनका आकलन करने के लिए एक अध्ययन किया गया था। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने हर राज्य स्तर पर हेल्पलाइन स्थापित करने का निर्णय लिया। सिंगल कॉल मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म और यूनिक नंबर (14567) के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्पलाइन शुरू हुई। इस प्रकार एल्डर लाइन की अवधारणा की गई।

एल्डर लाइन सप्ताह के सभी सात दिनों में सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक संचालित होगी क्योंकि इसे गैर-आपातकालीन सेवा के तहत वर्गीकृत किया गया है और काम के घंटों का विस्तार निष्कर्षों और आवश्यकता के आधार पर किया जाएगा।

चार सेवाओं में वर्गीकृत

वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली सेवाओं को मोटे तौर पर चार सेवाओं में वर्गीकृत किया गया है:

  1. सूचना-डॉक्टर, अस्पताल, वृद्धाश्रम और गतिविधि केंद्र आदि।
  2. मार्गदर्शन-कानूनी, रखरखाव अधिनियम से संबंधित, पेंशन संबंधी प्रश्न
  3. समर्थन-जीवन, चिंता, संबंध प्रबंधन और भावनात्मक समर्थन
  4. हस्तक्षेप– प्रत्यक्ष (वरिष्ठ नागरिकों से हो रहे दुर्व्यवहार को संबोधित करना और बेघर और छोड़ दिए गए बुजुर्गों का बचाव करना) और अप्रत्यक्ष (इकोसिस्टम का निर्माण)

एल्डर लाइन के नंबर्स-

टोल फ्री नंबर- 14567

कार्य का समय- सुबह 8 बजे से रात 8 बजे

कार्य के दिन- सप्ताह के सातों दिन

वरिष्ठ नागरिकों के लिए निम्नलिखित सेवाओं के लिए 06 राज्यों (तेलंगाना, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश) में टोल फ्री नंबर 14567 पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए नेशनल हेल्पलाइन (एल्डर लाइन-14567) को चालू किया गया है:

  1. सूचना- डॉक्टर, अस्पताल, वृद्धाश्रम और गतिविधि केंद्र आदि।
  2. मार्गदर्शन- कानूनी, रखरखाव अधिनियम से संबंधित, पेंशन संबंधी प्रश्न
  3. समर्थन- जीवन, चिंता, संबंध प्रबंधन और भावनात्मक समर्थन
  4. हस्तक्षेप- प्रत्यक्ष (बड़ों के दुर्व्यवहार को संबोधित करना और बेघर और परित्यक्त बुजुर्गों का बचाव करना) और अप्रत्यक्ष (इकोसिस्टम का निर्माण)

 

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