कोटद्वार पुलिस ने किये 45 लाख की धोखाधड़ी गिरोह के 3 आरोपी गिफ्तार

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कोटद्वार, 7 दिसंबर ( शिवाली)।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्रीमती श्वेता चौबे के कड़े निर्देशन में फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी करने वाले शातिर गिरोह के तीन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

घटनाक्रम के अनुसार गत 29 सितम्बर को जौनपुर कोटद्वार निवासी ज्ञानेन्द्र कुमार अग्रवाल ने थाना कोटद्वार में रिर्पोट दर्ज करायी कि कुछ व्यक्तियों द्वारा फर्जी दस्तावेज बनाकर उसके साथ लगभग 45 लाख रुपये की ठगी की गयी है। रिर्पोट के आधार पर कोतवाली पुलिस ने 274/2022, धारा-420/467/468/471/120 (B) भादवि0 बनाम प्रदीप सिंह आदि के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्रीमती श्वेता चौबे द्वारा धोखाधड़ी की घटना को गम्भीरता से लेते हुये अभियुक्तगणों की शीघ्र गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए। कोतवाली पुलिस एवं सीआईयू टीम का गठन किया गया।

विवेचना उपनिरीक्षक संजय रावत के सुपुर्द की गयी। विवेचना के दौरान प्रकाश में आया कि अभियुक्त गण अमित नेगी उर्फ गोल्डी, राहुल सिहं पुत्र सुरेन्द्र सिहं, विनोद उर्फ अनिल पुत्र गगन सिंह, किरण पाल सिहं पुत्र रघुराज सिंह, तलविन्दर सिहं उर्फ गोल्डी पुत्र भूपेन्द्र सिंह, जावेद पुत्र फहमिद हुसैन, प्रदीप चमोली उर्फ भड्डू एवं सीता देवी पत्नी विनोद उर्फ अनिल निवासी शिवपुर कोटद्वार द्वारा ज्ञानेन्द्र कुमार अग्रवाल से आपराधिक षड़यत्र कर लाखों रुपये की ठगी की गयी। अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु गठित पुलिस टीमों द्वारा इनके सम्भावित स्थानों पर दबिश दी गई। अभियुक्तगण गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार फरार चल रहे थे। पुलिस टीम द्वारा अथक प्रयासों के बाद सर्विलान्स टीम की मदद से अमित नेगी उर्फ गोल्डी, राहुल सिहं पुत्र सुरेन्द्र सिंह और विनोद उर्फ अनिल को कालका जी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। शेष अभियुक्तों की गिरफ्तारी हेतु पुलिस प्रयासरत है।

पूछताछ में अभियुक्त अमित नेगी ने बताया कि उसने अपने साथी तलविन्दर उर्फ गोल्डी के साथ वादी से जमीन खरीदने का प्लान बनाया, जिसके लिये हमने अनिल उर्फ विनोद को ज्ञानेन्द्र कुमार अग्रवाल के साथ जमीन खरीदने के लिए सम्पर्क करने हेतु कहा गया। वादी के जमीन खरीदने के लिए तैयार होने के पर जावेद एंव प्रदीप चमोली द्वारा फर्जी दस्तावेज तैयार किये गये। बैनामे के दिन अभियुक्त गणों द्वारा किरण पाल राणा के फर्जी आधार कार्ड से प्रदीप सिंह विक्रेता के रुप में और राहुल सिहं को फर्जी गवाह बनाकर बैनामा करवाया गया।
अभियुक्त गणों द्वारा बताया गया कि वे शहर में खाली पड़ी भूमि के असली स्वामी की जानकारी लेकर उस जमीन की फर्द निकालकर सस्ते दामों में बेचने का लालच देकर फर्जी दस्तावेज बनाकर असल में प्रयोग कर शहर के भोले भाले लोगों के साथ आपराधिक षड़यत्रं कर धोखाधड़ी करने का काम करते थे।

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