पिंडर घाटी के सुदूरवर्ती गांव घेस एवं हिमनी में दश्यु पूजा परम्परागत कौथीग के साथ संपन्न

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-थराली से हरेंद्र बिष्ट–

पिंडर घाटी के सुदूरवर्ती गांव घेस एवं हिमनी में दशियु (गोलज्यू देवता) की दो दिवसीय विशेष पूजा कौथीग का गोलज्यू सहित पंचनामा देवताओं की पूजा के साथ सम्पन्न हो गई है। दोनों ही गांव के साथ ही आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने इन कौथीगों में भारी संख्या में शिरकत की। जहां घेस गांव में 16 सालों के बाद इस कौथीग का आयोजन किया गया वही हिमनी गांव में 13 वर्षों के बाद आयोजन किया। लंबे समय बाद हुएं इस आयोजन में दोनों गांव के प्रवासियों ने भी भारी संख्या में शिरकत की।

गुरुवार से घेस एवं हिमनी गांव में शुरू हुएं दशियु मेले के दौरान पूरी रात कड़ाके की ठंड के बावजूद तमाम कार्यक्रम आयोजित होते रहे। इस दौरान पूरी रात गोलज्यु सहित स्थानीय पंचनाम देवी, देवताओं के पशुवाह नाचते रहे। इस दौरान ग्रामीण महिला, पुरूषों ने जमकर झोड़ा चांचरी लगा कर अपने पौराणिक लोक संस्कृति को जीवित रखने का भी प्रयास किया।

शुक्रवार सुबह से ही दोनों गांव में साममूहिक भोज की तैयारियाे  के साथ ही दोपहर बाद एक बार फिर से गोलज्यू देवता सहित पंचनाम देवी देवताओं के पशुवाह अवतारित हुए एवं उन्होंने ढोल-नगाड़ों,गांजे भुंकरो की ताल पर नाचते हुए मौजूद जनसमुह को जौ, चावलों के रूप में प्रसादी देते हुए आशीर्वाद दिया।

इस आशा के साथ कि पूरे गांव एवं क्षेत्र में खुशहाली कायम रहेगी तो आने वाले समय में एक बार फिर से इस तरह के सामुहिक आयोजन किया जाएगा कौथीगों का समापन हों गया हैं।

हिमनी ने पुजारी पूर्व सुबेदार मेजर हरचंद सिंह दानू, मदन सिंह दानू, प्रधान हीरा देवी ,उपप्रधान प्रदीप सिवानी, आयोजन कमेटी के अध्यक्ष केशर सिंह दानू, कोषाध्यक्ष राजेंद्र दानू, घेस की प्रधान कलावती देवी, उपप्रधान धन सिंह बिष्ट, पूर्व प्रधान मदन सिंह बिष्ट, पूर्व सरपंच कुंदन भंडारी, मोहन बिष्ट, आदि ने बताया कि कई वर्षों में आयोजित इन कौथीगों को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह बना हुआ था। विशुद्ध रूप से इस धार्मिक आयोजन में भक्तों ने अपनी श्रद्धा के अनुरूप आयोजन को सफल बनाने में अपनी सहभागिता निभाई।

*और नारद,नारिदियानी एवं कुरी बाघ रहा आकृष्ट का केन्द्र*

दशियु के आयोजन के दौरान दोनों ही गांव में बृहस्पतिवार एवं शुक्रवार की मध्य रात्रि जब कड़ाके की ठंड एवं लोगों को नींद सहलाने लगी तों अचानक ही नारद एवं नारिदियानी के पात्रों ने धार्मिक संवादों से लोगों को हंसाने का सफल प्रयास किया।इसी दौरान अचानक कुरी बाघ (एक तरह से पहाड़ी क्षेत्रों में रोयेदार घास जो कि किसी पर चिपक जाता हैं तों आसानी से कपड़ों से छूटता नही है) उस घास को किसी बोरे पर लपेट कर उसका पत्र जब जनसुदाय के बीच पहुंचा तों उससे बचने के लिए आयोजन स्थलों पर भगदड़ सी मच गई और अलसाए लोगों का आलस्य रफूचक्कर हो गया।

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