बधाण की नंदा देवी लोकजात लाटू सिद्ध पीठ वांण गांव पहुंची

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–थराली से हरेंद्र बिष्ट–

बधाण की नंदा देवी लोकजात यात्रा 2022 धीरे-धीरे अपने अंतिम पड़ावो की ओर अग्रसर होते हुए लाटू सिद्ध पीठ वांण गांव पहुंच गई है। इससे पहले लौहांजग में आयोजित एक स्वस्फूत नंदा मेले में भारी संख्या में पिंडर घाटी के साथ ही कुमाऊं के कत्यूर घाटी के नंदा भक्तों ने मेले में शिरकत की।इस मौके पर थराली के विधायक भूपाल राम टम्टा ने लोकजात यात्रा को और भव्य रूप देने के लिए प्रयास करने की बात की।


22 अगस्त को नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से शुरू हुई श्री नंदा देवी लोकजात यात्रा 2022 जात “देवी की विशेष पूजा” के लिए अपने अंतिम पडाओं की ओर अग्रसर है। गुरुवार को यात्रा अपने महत्वपूर्ण 11 वें पड़ाव लाटू सिद्धपीठ वांण गांव पहुंच गई है। जहां पर देव यात्रा का पारंपरिक रूप से भव्य स्वागत किया गया। इससे पहले अपने 10 वें पड़ाव मंदोली गांव से यात्रा दोपहर करीब 11 बजें प्रसिद्ध पर्यटक स्थल लोहाजंग पहुंची जहां पर स्वस्फूत मेले का आयोजन हुआ। नंदा के उत्सव डोली के यहां पहुंचते ही नंदा देवी के जयकारों के बीच भक्तों ने भगवती के दर्शन करने के साथ ही पूजा अर्चना कर मनौतियां मांगी। इसके बाद यात्रा अपने अंतिम आवादी क्षेत्र के गांव एवं लाटू सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध वांण गांव पहुंची जहां पर यात्रा का पारंपरिक रूप से भव्य रूप से स्वागत किया गया। कल-आज यात्रा अपने अंतिम पड़ाव आवादी विहिन गैरोली पातल पहुंचेगी। इसके बाद 3 सितंबर को यात्रा सप्तमी की जात के लिए वेदनी बुग्याल पहुंचेगी। जहां पर विधिवत पूजा अर्चना के बाद यात्रा 6 माह के बधाण प्रवास के लिए देवराड़ा थराली के लिए लौट जाएगा। यात्रा 10 सितंबर को सिद्धपीठ देवराड़ा पहुंचेगी। जहां डोला गर्भगृह में विराजमान हो जाएंगा।
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वेदनी रवाना होने से पहले लोहाजंग में आयोजित स्वस्फूत मेले पर भोले महाराज एवं माता मंगला के सौजन्य से आयोजित विशाल भंडारे का उद्घाटन करते हुए थराली के विधायक भूपाल राम टम्टा ने हंस फाउंडेशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि।प्रति वर्ष भादों मास में आयोजित होने वाली नंदा लोकजात यात्रा को और अधिक भव्य रूप से आयोजित किए जाने के लिए सभी को एक जुट होने एवं यात्रा का बड़े स्तर पर प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता है ताकि इससे विदेशी, विदेशी धार्मिक लोगों को अधिकाधिक जोड़ा जा सकें। इस मौके पर विधायक ने हंस फाउंडेशन की ओर से गरीब परिवारों को आने वाली शीतऋतु से बचाने के लिए कंबलों का वितरण किया।

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