केतन हत्याकांड के विरोध में सामाजिक संगठनों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
देहरादून, 12 जून। टिहरी जिले के लंबगांव क्षेत्र में 18 वर्षीय दलित युवक केतन की कथित बर्बर हत्या के विरोध में शुक्रवार को उत्तराखंड महिला मंच, उत्तराखंड इंसानियत मंच तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन अपर सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रेषित किया। ज्ञापन में घटना की निष्पक्ष, समयबद्ध और उच्चस्तरीय जांच कर सभी दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि उपलब्ध प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर यह मामला केवल हत्या का नहीं, बल्कि जातीय घृणा, सामाजिक वर्चस्व और अमानवीय क्रूरता का प्रतीत होता है।

आरोप है कि 8 जून की रात केतन को बुलाकर उसके साथ गंभीर मारपीट की गई तथा अमानवीय यातनाएं दी गईं। गंभीर रूप से घायल अवस्था में छोड़े गए केतन की बाद में मृत्यु हो गई। इस घटना से प्रदेशभर में आक्रोश व्याप्त है, विशेषकर दलित समुदाय और सामाजिक न्याय के पक्षधर वर्गों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रेम करना कोई अपराध नहीं है और किसी भी युवक को उसकी जाति, सामाजिक पृष्ठभूमि अथवा व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर प्रताड़ित करना तथा उसकी हत्या कर देना सभ्य समाज के लिए कलंक है। उनका कहना था कि उत्तराखंड जैसे शांतिप्रिय राज्य में इस प्रकार की घटनाएं सामाजिक ताने-बाने, संवैधानिक मूल्यों और मानवाधिकारों के लिए गंभीर चुनौती हैं।
ज्ञापन में मांग की गई कि मुख्य आरोपी के साथ-साथ घटना में शामिल सभी सहयोगियों, सह-अभियुक्तों तथा साक्ष्य छिपाने या अपराध में सहायता करने वाले व्यक्तियों की भूमिका की भी गहन जांच की जाए। साथ ही भारतीय न्याय संहिता तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संगठनों ने मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक न्यायालय में कराने और पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाने की भी मांग की।
प्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवार को पर्याप्त आर्थिक सहायता, सुरक्षा, कानूनी सहायता तथा पुनर्वास उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा कि शासन-प्रशासन का दायित्व है कि वह प्रत्येक नागरिक को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराए तथा कमजोर और वंचित वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम के कारण जिलाधिकारी कार्यालय में कोई सक्षम अधिकारी उपलब्ध नहीं था। काफी देर तक प्रतीक्षा के बावजूद जब कोई अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा तो उपस्थित लोगों ने नाराजगी व्यक्त की।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी कार्यालय परिसर के बाहर धरना दिया। उनका कहना था कि एक दलित युवक की निर्मम हत्या जैसे गंभीर मामले में प्रशासन को अधिक संवेदनशीलता और जवाबदेही का परिचय देना चाहिए था।
बाद में आंदोलनकारियों के लगातार आग्रह के बाद अपर सिटी मजिस्ट्रेट को मौके पर बुलाया गया, जिनके माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया।
संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि केतन हत्याकांड केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त समानता, गरिमा और जीवन के अधिकार पर सीधा हमला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों के विरुद्ध कठोर एवं उदाहरण प्रस्तुत करने वाली कार्रवाई नहीं की गई तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा और ऐसे अपराधों को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने राज्य सरकार से मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आरोपितों की शीघ्र गिरफ्तारी और कठोर दंड सुनिश्चित करने की मांग की।
ज्ञापन सौंपने और विरोध प्रदर्शन में उत्तराखंड महिला मंच, उत्तराखंड इंसानियत मंच तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल रहे। प्रमुख रूप से कमला पंत, निर्मला बिष्ट, सुजाता पॉल, नवीन मित्तल, आर.सी. यादव, विमला, चंद्रा, पदमा गुप्ता, यशवीर आर्य, पंकज सिंह क्षेत्री, शांति बिष्ट, शांति नेगी, कांति कोहली, रानी नेगी, पावंती बिष्ट, स्नेहलता शाह, रघुनाथ आर्या, मीना शाह, विक्रम सिंह, जसपाल सिंह, सुरेश नेगी, यदुवीर पंवार, मीना राणा, सुशीला राणा, प्रेमलता बहुगुणा, दीपा नेगी, पूजा नौटियाल, कविता देवी तथा पार्वती कुड़ियाल उपस्थित रहे।
