महाकाली नदी पर सेतु के निर्माण के लिए भारत एवं नेपाल के बीच समझौत ज्ञापन को मंजूरी

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नयी दिल्ली, 7  जनवरी  (उ हि ). प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमण्डल ने आज धारचूला (भारत) – धारचूला (नेपाल) में महाकाली नदी पर सेतु के निर्माण के लिए भारत एवं नेपाल के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दे दी है।

इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध और बेहतर होंगे। इस एमओयू पर जल्द ही दोनों देश साइन करेंगे.

घनिष्ठ पड़ोसियों के रूप में, भारत और नेपाल के बीच मित्रता तथा सहयोग का अनूठा संबंध है, जो एक खुली सीमा के साथ-साथ जन-जन के बीच गहरे संबंधों और संस्कृति से प्रमाणित है। भारत और नेपाल दोनों सार्क, बिम्सटेक जैसे विभिन्न क्षेत्रीय मंचों के साथ-साथ वैश्विक मंचों पर एक साथ काम कर रहे हैं. महाकाली नदी पर पुल का निर्माण अगले तीन वर्ष में पूरा कर लिया जायेगा.  इससे उत्तराखंड के लोगों और नेपाल के क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलेगा. इससे दोनों देशों में व्यापार, भाईचारे और रिश्तों को मजबूती मिलेगी.

काली नदी, जिसे महाकाली, कालीगंगा या शारदा के नाम से भी जाना जाता है। इस नदी का उद्गम राज्य के पिथौरागढ़ जिले में वृहद्तर हिमालय में 3,600 मीटर की ऊँचाई पर स्थित कालापानी नामक स्थान से होता है, और लिपु-लीख दर्रे के निकट भारत और तिब्बत की सीमा पर स्थित काली माता के एक मंदिर से इसे अपना नाम मिलता है। अपने उपरी मार्ग पर यह नदी नेपाल के साथ भारत की निरंतर पूर्वी सीमा बनाती है, जहां इसे महाकाली कहा जाता है। यह नदी उत्तराखण्ड और उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में पहुँचने पर शारदा नदी के नाम से भी जानी जाती है। काली नदी का झुकाव क्षेत्र लगभग 15,260 वर्ग किलोमीटर है, जिसका एक बड़ा हिस्सा (लगभग 9,943 वर्ग किमी) उत्तराखण्ड में है, और शेष नेपाल में है।

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