दूर-दराज के क्षेत्रों में विश्वसनीय कनेक्टिविटी की सुविधा के लिए ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क विशिष्ट तकनीकी विकसित

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A new niche technological solution for Open Radio Access Network (ORAN) base stations has been developed that is scheduled to facilitate high-speed and reliable connectivity at a cost that is viable for unconnected and far-flung areas. The best-in-class ORAN base station solution has been designed and is under development for commercialization by IIITB COMET Foundation (COMET), Bengaluru for creating spectral and energy efficient wireless communications technology for 5G and 5G-Advanced radio networks.

 

-uttarakhandhimalaya.in-

ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क (ओआरएएन) बेस स्टेशनों के लिए एक नया विशिष्ट तकनीकी समाधान विकसित किया गया है जो असंबद्ध और दूर-दराज के क्षेत्रों के लिए व्यवहार्य लागत पर उच्च गति और विश्वसनीय कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करेगा।

5जी और 5जी-उन्नत रेडियो नेटवर्क के लिए स्पेक्ट्रल और ऊर्जा कुशल वायरलेस संचार प्रौद्योगिकी बनाने के लिए आईआईआइटीबी कॉमेट फाउंडेशन (सीओएमईटी) बेंगलुरु द्वारा श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ ओआरएएन बेस स्टेशन समाधान डिजाइन किया गया है और व्यवसायीकरण के लिए विकसित किया जा रहा है।

ओआरएएन बेस स्टेशन समाधान, अगली पीढ़ी के दूरसंचार बुनियादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण घटक, नेटवर्क बुनियादी ढांचे के सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर घटकों को अलग करता है। ओआरएएन आधारित इंटरफेस दरवाजे की तरह हैं जो नेटवर्क बुनियादी ढांचे के विभिन्न घटकों तक पहुंच प्रदान करते हैं जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट प्रदान करना आसान, कुशल और आर्थिक रूप से अधिक व्यवहार्य हो जाता है।

रेडियो एक्सेस नेटवर्क (आरएएन) फ़ंक्शन के टूटने से नेटवर्क लागत और जटिलता को कम करने में मदद मिलती है। ओपन आरएएन वेंडर लॉक-इन को हटा देता है और विभिन्न विक्रेताओं द्वारा प्रदान किए गए सेलुलर नेटवर्क उपकरणों के बीच सुचारू संचालनीयता की सुविधा प्रदान कर सकता है।

सीओएमईटी, उन्नत संचार प्रणालियों में देश की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के राष्ट्रीय मिशन फॉर इंटरडिसिप्लिनरी साइबर फिजिकल सिस्टम्स (एनएम-आईसीपीएस) के तहत स्थापित 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब (टीआइएच) में से एक है, ओआरएएन परियोजनाओं पर काम कर रहा है, और इस क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरा है।

इससे कॉमेट को पांच प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों, आईआईआईटी बैंगलोर, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी भिलाई, आईआईटी रूड़की और आईआईआईटी-नया रायपुर के साथ साझेदारी में ओआरएएन बेस स्टेशन समाधान के विकास और कार्यान्वयन में सबसे आगे रहने में मदद मिली है।

आईआईटी हैदराबाद (आईआईटीएच) के प्रोफेसर डॉ. किरण कुची के नेतृत्व में ओआरएएन बेस स्टेशन रेडियो यूनिट विकास ने सेल टावरों पर कई एंटेना का उपयोग करते हुए एक क्रांतिकारी ओआरएएन तकनीक पेश की। यह न केवल सेल कवरेज को बढ़ाने का वादा करती है, बल्कि मौजूदा 4जी नेटवर्क की तुलना में प्रभावशाली 3 गुना क्षमता भी बढ़ाती है, जिससे स्पेक्ट्रम का अधिकतम उपयोग होता है।

अद्वितीय ओआरएएन नवाचार को आगे बढ़ाने में सीओएमईटी की भूमिका के बारे में बताते हुए आईआईआईटी बैंगलोर के निदेशक और आईआईआईटी बैंगलोर कॉमेट फाउंडेशन  बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर देबब्रत दास ने कहा, “कॉमेट को ओआरएएन नवाचार और विकास, सेलुलर नेटवर्क को बदलने और सहयोग को बढ़ावा देने पर गर्व है। हमारी प्रतिबद्धता वैश्विक प्रभाव डालेगी और भारत के भविष्य की जरूरत आत्मनिर्भर दूरसंचार समाधान को पूरा करेगी।

प्रौद्योगिकी के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए, कॉमेट ओआरएएन प्रौद्योगिकी में कुशल पेशेवरों को विकसित करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से, फाउंडेशन ने 5जी और उससे आगे के युग में सफलता के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल से कई लोगों को सशक्त बनाया है।

इसके अलावा, 2030 तक 6जी को व्यावसायिक रूप से लॉन्च किए जाने की उम्मीद है, भारत विशेष रूप से रीकॉन्फिगरेबल इंटेलिजेंट सर्फेस (आरआईएस) के क्षेत्र में 6जी में उभरते मानकों की खोज में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए तैयार है, क्योंकि यह तकनीक उभरते हुए 6जी मानक में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्नत संचार प्रणालियों के क्षेत्र में नवाचार, सहयोग और कौशल विकास को बढ़ावा देने वाले ये प्रयास भारत को वैश्विक दूरसंचार परिदृश्य में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने और आगामी 6जी के वैश्विक मानकों को परिभाषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का संकेत देते हैं।

वे उन्नत संचार प्रणालियों में देश की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के डिजिटल भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में महत्वपूर्ण रूप से मदद करेंगे, जिसमें सूचना तक पहुंच में कोई बाधा नहीं होगी।

 

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