भारतीय वैज्ञानिकों की नई सिलिकॉन चिप से 6जी इंटरनेट की राह होगी आसान
एक सेकंड में 100 गीगाबिट डेटा भेजने में मिली सफलता, भविष्य में आधे सेकंड से भी कम समय में भेजी जा सकेगी पांच जीबी की फिल्म
नई दिल्ली, 4 नवंबर। भारत के वैज्ञानिकों ने संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने एक ऐसी सिलिकॉन चिप विकसित की है, जो रास्ते में अवरोध आने के बावजूद अत्यंत तेज गति से डेटा भेज सकती है। इस चिप की सहायता से वैज्ञानिकों ने एक सेकंड में 100 गीगाबिट डेटा संचारित करने में सफलता प्राप्त की है। यह उपलब्धि भविष्य में छठी पीढ़ी यानी 6जी मोबाइल नेटवर्क के विकास में उपयोगी साबित हो सकती है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, बेंगलुरु स्थित जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र के शोधकर्ताओं ने यह तकनीक विकसित की है। इस अनुसंधान का नेतृत्व केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक कुमार ने किया है।
वर्तमान में मोबाइल संचार के लिए 4जी और 5जी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। भविष्य की 6जी तकनीक में इससे कहीं अधिक तेज गति से सूचनाओं का आदान-प्रदान संभव बनाने की कोशिश हो रही है। इसके लिए वैज्ञानिक टेराहर्ट्ज तरंगों पर काम कर रहे हैं। ये अत्यंत उच्च आवृत्ति वाली विद्युत चुंबकीय तरंगें हैं, जिनकी सहायता से बहुत कम समय में बड़ी मात्रा में डेटा भेजा जा सकता है।
हालांकि, इन तरंगों के उपयोग में एक बड़ी समस्या आती है। जब किसी इलेक्ट्रॉनिक चिप के भीतर तरंगों को मोड़दार रास्तों, जोड़ या अवरोधों से गुजरना पड़ता है, तो उनका कुछ हिस्सा बिखर जाता है या वापस लौट जाता है। इससे संकेत कमजोर हो जाते हैं और डेटा संचार की क्षमता प्रभावित होती है।
भारतीय वैज्ञानिकों ने इसी समस्या का समाधान खोजने का प्रयास किया है। उन्होंने सिलिकॉन की एक पतली परत में अत्यंत छोटे त्रिकोणीय छिद्रों का विशेष जाल बनाया। इन छिद्रों की बनावट और व्यवस्था ऐसी रखी गई कि टेराहर्ट्ज तरंगें निर्धारित रास्ते पर आगे बढ़ सकें और अवरोध आने पर भी बहुत कम ऊर्जा नष्ट हो।
प्रयोगों के दौरान पाया गया कि एक अवरोध पार करने पर संकेतों में केवल एक से दो प्रतिशत की कमी आई, जबकि लगातार दो अवरोध होने पर भी नुकसान लगभग दो से तीन प्रतिशत ही रहा। सामान्य तकनीक वाले सर्किट में ऐसे अवरोध संकेतों को कहीं अधिक कमजोर कर सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने इस तकनीक की जांच तीन अलग-अलग प्रकार की चिप संरचनाओं पर की। इनमें एक में दो अवरोध थे, दूसरी में चार तीखे मोड़ और एक अवरोध था, जबकि तीसरी संरचना में संकेतों को दो अलग-अलग रास्तों में बांटने की व्यवस्था थी। तीनों प्रयोगों में उत्साहजनक परिणाम मिले।
सबसे महत्वपूर्ण सफलता उस प्रयोग में मिली, जिसमें डेटा को दो रास्तों में बांटने वाली चिप ने 100 गीगाबिट प्रति सेकंड की गति से सूचना संचारित की। इस गति को सामान्य भाषा में समझें तो पांच गीगाबाइट की एक उच्च गुणवत्ता वाली फिल्म को सैद्धांतिक रूप से आधे सेकंड से भी कम समय में भेजा जा सकता है। हालांकि, यह प्रयोगशाला में प्राप्त गति है। इसे अभी सामान्य मोबाइल फोन पर मिलने वाली इंटरनेट गति नहीं माना जाना चाहिए।
शोध दल के प्रमुख डॉ. अभिषेक कुमार के अनुसार, इस प्रयोग से साबित हुआ है कि सिलिकॉन चिप में बेहद छोटे छिद्रों की बनावट बदलकर तरंगों के रास्ते में आने वाले अवरोधों का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे भविष्य में छोटे आकार के अधिक सक्षम संचार उपकरण विकसित करने में सहायता मिल सकती है।
इस शोध में समीना मुल्ला और संग्राम कुमार साधु की प्रमुख भूमिका रही। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान कोलकाता तथा सिंगापुर और फ्रांस के वैज्ञानिकों ने भी सहयोग किया।
वैज्ञानिकों की अगली योजना ऐसी चिप विकसित करने की है, जिसमें आवश्यकता के अनुसार विद्युत, ताप या यांत्रिक तरीकों से संकेतों की दिशा बदली जा सके। इससे भविष्य के संचार उपकरण अधिक तेज, छोटे और कार्यकुशल बन सकते हैं।
यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका एडवांस्ड मैटेरियल्स में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह उपलब्धि 6जी संचार प्रणाली के लिए आवश्यक तकनीक विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, इसे व्यावसायिक मोबाइल नेटवर्क में इस्तेमाल करने से पहले अभी और अनुसंधान तथा परीक्षण की आवश्यकता होगी।

