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लाटूधाम वांण में ऐतिहासिक फैसला: अब नहीं होगी पशु बलि, बैसाख पूर्णिमा पर कपाट खुलेंगे

हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-

थराली। विकास खंड देवाल के अंतर्गत प्रसिद्ध सिद्धपीठ वांण स्थित लाटूधाम इस वर्ष एक ऐतिहासिक और सामाजिक बदलाव का साक्षी बनने जा रहा है। सदियों से चली आ रही बकरों की बलि की परंपरा को समाप्त करने का सर्वसम्मत निर्णय लेते हुए ग्राम पंचायत, महिला मंगल दल, युवक मंगल दल और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने एक नई पहल की है। अब मंदिर में पशु बलि के स्थान पर श्रद्धालु श्रीफल और गोले चढ़ाकर पूजा-अर्चना करेंगे।

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब 1 मई को बैसाख पूर्णिमा के पावन अवसर पर लाटूधाम के कपाट विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। कपाट खुलने के साथ ही आगामी छह महीनों तक पूजा, अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला जारी रहेगा।

गौरतलब है कि श्री नंदादेवी लोक जात यात्रा और विश्व प्रसिद्ध श्री नंदादेवी राजजात यात्रा के अंतिम आबादी वाले पड़ाव वांण गांव में स्थित लाटू मंदिर में कपाट खुलने के बाद लंबे समय तक बड़ी संख्या में बकरों की बलि दी जाती रही है। लेकिन हाल ही में आयोजित एक संयुक्त बैठक में इस परंपरा को ‘कुप्रथा’ मानते हुए इसे पूरी तरह समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया। पंचायत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति बलि देने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इस ऐतिहासिक फैसले को स्थानीय समाज में एक सकारात्मक और जागरूक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे धार्मिक आस्था के साथ मानवीय संवेदनाओं और पशु संरक्षण को भी बल मिलेगा।

इधर, कपाट उद्घाटन को लेकर मंदिर समिति और मेला आयोजन कमेटी ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आयोजन समिति के अनुसार 1 मई को प्रातः काल से ही पूजा-अर्चना एवं अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे और दोपहर 1 बजे कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।

कपाट खुलने के साथ ही “लाटू देवता जागृति पर्यटन सांस्कृतिक महोत्सव” के तहत 1 और 2 मई को दो दिवसीय मेले का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें क्षेत्रीय संस्कृति, लोक परंपराओं और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे।

मेला समिति के अध्यक्ष कृष्णा बिष्ट की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में तैयारियों की समीक्षा की गई, जिसमें बताया गया कि सभी व्यवस्थाएं लगभग पूरी कर ली गई हैं। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत सदस्य एवं संरक्षक कृष्णा सिंह, ग्राम प्रधान नंदूली देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य हेमा देवी, उप प्रधान बीना देवी, पुजारी दिवान सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।

लाटूधाम वांण में पशु बलि पर रोक का यह निर्णय न केवल धार्मिक परंपराओं में सकारात्मक बदलाव का संकेत है, बल्कि आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।

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