मणिपुर के एक और उग्रवादी संगठन ने हथिया डाले, किये शांति समझौते दस्तखत

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-uttarakhandhimalaya.in

नयी दिल्ली, 5  दिसंबर  । यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF), मणिपुर सरकार और भारत सरकार के बीच 29 नवंबर, 2023 को हुए शांति समझौते के बाद नेशनल रिवोल्यूशनरी फ्रंट मणिपुर (NRFM) के लगभग 25 नेता/कैडर, मेजर बोइचा (NRFM के सेना-उप-प्रमुख) के नेतृत्व में 25 हथियारों के साथ 02 दिसंबर, 2023 को UNLF में शामिल हो गए हैं। इसके साथ ही संगठन के अधिकांश सदस्य हिंसा छोड़ समाज की मुख्यधारा में सामिल हो गए हैं। इस घटनाक्रम से मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के मोदी सरकार के प्रयासों को गति मिलेगी।

भारत सरकार ने हाल ही में मणिपुर के 8 अलगाववादी संगठनों इन प्रतिबंध अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ाया था। ये आठ संगठन हैं पीपुल्स लिबरेशन आर्मी जिसे आम तौर पर पीएलए के नाम से जाना जाता है, और इसकी राजनीतिक शाखा, रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट (आरपीएफ), यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (यूएनएलएफ) और इसकी सशस्त्र शाखा, मणिपुर पीपुल्स आर्मी (एमपीए), पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांगलेईपाक (पीआरईपीएके) और उसकी सशस्त्र शाखा, ‘रेड आर्मी’, कांगलेईपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी) और उसकी सशस्त्र शाखा, जिसे ‘रेड आर्मी’ भी कहा जाता है, कांगलेई याओल कनबा लुप (केवाईकेएल), समन्वय समिति (कोरकॉम) और एलायंस फॉर सोशलिस्ट यूनिटी कांगलेइपक (एएसयूके)।

उल्लेखनीय है कि एनआरएफएम (पुराना नाम-यूनाइटेड रिवोल्यूशनरी फ्रंट) का गठन 11 सितंबर, 2011 को केसीपी (एक मैतेई यूजी संगठन) के तीन गुटों के कैडरों द्वारा किया गया था।

इसके वरिष्ठ नेता पड़ोसी देश के ठिकानों से काम करते थे और मणिपुर घाटी के विभिन्न हिस्सों में हिंसा और जबरन वसूली में शामिल थे। इस घटनाक्रम से अन्य मैतेई यूजी संगठनों को शांति प्रक्रिया में शामिल होने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को आगे रखने के लिए प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। साथ ही, इससे मोदी सरकार के ‘उग्रवादमुक्त और समृद्ध पूर्वोत्तर’ के सपने को साकार करने में सहायता मिलेगी।

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