उत्तराखंड के सांसदों की निधि में जून तक महज 18 प्रतिशत खर्च
सांसदों के प्रस्तावित 215 कार्यों को नहीं मिली स्वीकृति, स्वीकृत 154 कार्य भी नहीं हो सके शुरू
काशीपुर, 3 अक्टूबर । उत्तराखंड के पांच लोकसभा और तीन राज्यसभा सांसदों को आवंटित सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (सांसद निधि) की धनराशि में जून 2026 तक महज 18 प्रतिशत ही खर्च हो सकी है। सांसदों की ओर से प्रस्तावित 215 कार्यों को अधिकारियों ने स्वीकृति नहीं दी, जबकि स्वीकृत कार्यों में से 154 कार्य जून तक शुरू भी नहीं हो पाए थे।
यह जानकारी ग्राम्य विकास आयुक्त, उत्तराखंड कार्यालय ने काशीपुर निवासी सूचना का अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन एडवोकेट को उपलब्ध कराई है। नदीम उद्दीन ने सांसद निधि के आवंटन, प्रस्तावित कार्यों, उनकी स्वीकृति और खर्च से संबंधित सूचना मांगी थी। इसके जवाब में लोक सूचना अधिकारी एवं उपायुक्त प्रशासन हेमंती गुंजियाल ने पत्रांक 319762 के साथ जून 2026 तक का विवरण उपलब्ध कराया।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य के आठ सांसदों को कुल 135.95 करोड़ रुपये की सांसद निधि आवंटित हुई। इनमें पांच लोकसभा सांसदों को 73.50 करोड़ और तीन राज्यसभा सांसदों को 62.45 करोड़ रुपये आवंटित किए गए। पूर्ण हो चुके कार्यों पर 12.81 करोड़ और प्रगतिरत कार्यों पर 11.31 करोड़ रुपये खर्च हुए। इस तरह कुल खर्च लगभग 24.12 करोड़ रुपये रहा, जो आवंटित धनराशि का करीब 18 प्रतिशत है।
लोकसभा सांसदों के मामले में पूर्ण कार्यों पर 5.769 करोड़ और प्रगतिरत कार्यों पर 1.90 करोड़ रुपये खर्च दिखाया गया है। यह कुल आवंटन का करीब 10 प्रतिशत है। राज्यसभा सांसदों के पूर्ण कार्यों पर 7.04 करोड़ और प्रगतिरत कार्यों पर 9.41 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो उनके कुल आवंटन का करीब 26 प्रतिशत है।
लोकसभा सांसदों में टिहरी गढ़वाल की सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह की निधि से सर्वाधिक 4.08 करोड़ रुपये यानी करीब 28 प्रतिशत खर्च हुए। नैनीताल-ऊधमसिंह नगर के सांसद अजय भट्ट की निधि से 1.79 करोड़ रुपये यानी 12 प्रतिशत, हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत की निधि से 1.499 करोड़ यानी करीब 10 प्रतिशत और अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा की निधि से 17 लाख रुपये यानी करीब एक प्रतिशत खर्च दर्ज किया गया। उपलब्ध विवरण में गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी की सांसद निधि से जून 2026 तक खर्च शून्य दर्शाया गया है।
राज्यसभा सांसदों में नरेश बंसल की निधि से 10.96 करोड़ रुपये यानी करीब 40 प्रतिशत खर्च हुए। कल्पना सैनी की निधि से 4.356 करोड़ रुपये यानी 22 प्रतिशत और महेंद्र भट्ट की निधि से 1.139 करोड़ रुपये यानी करीब आठ प्रतिशत खर्च दर्ज किया गया।
कार्यों की स्थिति के अनुसार अजय भट्ट ने 327 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें 260 को स्वीकृति मिली। इनमें 56 कार्य पूरे हो चुके थे, 183 प्रगति पर थे और 21 शुरू नहीं हुए थे। माला राज्य लक्ष्मी शाह के 184 प्रस्तावित कार्यों में 167 स्वीकृत हुए। इनमें 80 पूरे, 74 प्रगतिरत और 13 शुरू नहीं हुए थे।
अनिल बलूनी की ओर से नौ कार्य प्रस्तावित किए गए। उपलब्ध सूचना में तीन कार्यों को स्वीकृति मिलने का उल्लेख है। अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा के 59 प्रस्तावित कार्यों में 35 को स्वीकृति मिली, जबकि हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत के 137 प्रस्तावित कार्यों में 31 को स्वीकृति दी गई। इनमें 20 कार्य पूरे और 11 प्रगति पर बताए गए हैं।
राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने 280 कार्य प्रस्तावित किए, जिनमें 231 स्वीकृत हुए। इनमें 39 पूरे, 118 प्रगति पर और 74 कार्य जून तक शुरू नहीं हुए थे। कल्पना सैनी के 140 प्रस्तावों में 106 स्वीकृत हुए। इनमें 48 पूरे, 54 प्रगति पर और चार शुरू नहीं हुए थे। महेंद्र भट्ट के 87 प्रस्तावित कार्यों में 71 को स्वीकृति मिली। इनमें 10 पूरे, 23 प्रगति पर और 38 कार्य शुरू नहीं हुए थे।
आरटीआई से मिले आंकड़े बताते हैं कि सांसद निधि उपलब्ध होने के बावजूद उसके उपयोग और स्वीकृत विकास कार्यों को धरातल पर उतारने की गति धीमी रही है। विशेष रूप से 215 प्रस्तावों का स्वीकृत न होना और स्वीकृति मिलने के बाद भी 154 कार्यों का शुरू न हो पाना सांसद निधि के क्रियान्वयन की स्थिति को रेखांकित करता है।
