वनाग्नि पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए तैयारियां शुरू: मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश
देहरादून, 15 अप्रैल । मुख्य सचिव श्री आनंद बर्धन ने बुधवार को सचिवालय में वनाग्नि की रोकथाम को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की और संबंधित विभागों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि वनाग्नि से जुड़ी सभी समितियों एवं स्टेकहोल्डर्स के साथ जनवरी माह तक अनिवार्य रूप से बैठकें आयोजित कर फायर सीजन से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर स्थापित फायर हाइड्रेंट्स के लिए डेडिकेटेड प्रेशर पाइपलाइन व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके लिए पेयजल विभाग को शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया।
उन्होंने वन विभाग को विशेष ड्राइव चलाकर वनाग्नि रोकथाम से संबंधित सभी व्यवस्थाओं का सतर्कता से निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही वाहनों एवं उपकरणों का नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने तथा प्रदेश के सभी लीसा डिपो में प्रोटोकॉल के अनुसार सुरक्षा व्यवस्थाएं मजबूत करने को कहा।
मुख्य सचिव ने वन विभाग, मौसम विभाग एवं वन सर्वेक्षण संस्थान को फॉरेस्ट फायर के लिए आपदा की तर्ज पर प्रिडिक्शन मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए। इससे पहले से ही आग की संभावना का अनुमान लगाया जा सकेगा, जिससे जान-माल के नुकसान को रोका जा सकेगा।
पिरूल प्रबंधन पर विशेष जोर
मुख्य सचिव ने जंगलों से पिरूल (चीड की सूखी पत्तियां) के निस्तारण और पिरुल ब्रिकेट उत्पादन को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि पिरुल ब्रिकेट को ईंधन के विकल्प के रूप में स्थापित करने के लिए प्रदेश में अधिक से अधिक यूनिटें स्थापित की जाएं। इससे एक तरफ वनाग्नि को रोका जा सकेगा, दूसरी तरफ वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध होगा। साथ ही स्वयं सहायता समूहों (SHG) की आय में वृद्धि होगी और इसे कार्बन क्रेडिट से भी जोड़ा जा सकता है।
बैठक में सचिव श्री दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, सीसीएफ श्री सुशांत कुमार पटनायक, डॉ. पराग मधुकर धकाते, श्री सी. रविशंकर, श्री विनोद कुमार सुमन, श्री रणवीर सिंह चौहान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं सभी जनपदों के जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित थे।
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