आरएलईके ने विद्यालयी फैसिलिटेटर्स के लिए शुरू किया दो दिवसीय आधारभूत शिक्षा प्रशिक्षण

देहरादून, 28 सितंबर। ग्रामीण लिटिगेशन एंड एंटाइटलमेंट केंद्र (आरएलईके) ने अपने विद्यालयों में बच्चों की आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान मजबूत करने के उद्देश्य से विद्यालयी फैसिलिटेटर्स के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। ‘एक कदम आगे’ के सहयोग से 27 सितंबर को शुरू हुए इस प्रशिक्षण में आरएलईके द्वारा संचालित झंगरी और ब्लू स्टार वन गुर्जर अपर प्राइमरी स्कूल, मोहंड के फैसिलिटेटर्स ने भाग लिया।
27 और 28 सितंबर को आयोजित प्रशिक्षण में बच्चों के पढ़ने, लिखने और बुनियादी गणितीय कौशल को बेहतर बनाने के लिए व्यावहारिक शिक्षण विधियों पर विशेष जोर दिया गया। फैसिलिटेटर्स को कक्षा में अपनाई जा सकने वाली गतिविधियों, संवाद आधारित शिक्षण पद्धतियों और बच्चों को सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल करने के तरीकों की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान फैसिलिटेटर्स ने दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में काम करने के अपने अनुभव भी साझा किए। इस दौरान बच्चों की नियमित उपस्थिति, सीखने के अलग-अलग स्तर और सीमित संसाधनों के बीच प्रभावी शिक्षण जैसी चुनौतियों पर चर्चा की गई। प्रशिक्षण में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षण पद्धतियों को स्थानीय परिस्थितियों और बच्चों की जरूरतों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
आरएलईके की अध्यक्ष प्रतिमा मेनन ने कहा कि बच्चों की आगे की शिक्षा की मजबूत नींव उनके आधारभूत सीखने के कौशल पर निर्भर करती है। प्रशिक्षण का उद्देश्य फैसिलिटेटर्स को ऐसे व्यावहारिक तरीके उपलब्ध कराना है, जिन्हें वे बच्चों के साथ सीधे इस्तेमाल करने के साथ ही स्थानीय परिवेश के अनुरूप ढाल सकें।
प्रशिक्षण में शामिल फैसिलिटेटर मामराज ने बताया कि कार्यक्रम में बच्चों के साथ काम करने के लिए कई नई और व्यावहारिक गतिविधियों की जानकारी मिली। इन तरीकों को विद्यालयों में अपनाकर बच्चों के लिए पढ़ने, लिखने और गणित सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और रोचक बनाया जा सकता है।
आरएलईके के अनुसार यह प्रशिक्षण उसके विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों में बच्चों के साथ काम कर रहे फैसिलिटेटर्स की क्षमता बढ़ाने की पहल का हिस्सा है। संस्था नियमित प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और बाल-केंद्रित बनाने पर काम कर रही है।
आरएलईके कई दशकों से उत्तराखंड के दूरस्थ और वंचित समुदायों के बीच शिक्षा के साथ मानवाधिकार, आजीविका, कानूनी जागरूकता, पर्यावरण और सामुदायिक विकास के क्षेत्रों में कार्य कर रहा है।
