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सरस मेला 2026 : ग्रामीण महिलाओं के उद्यमों को राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचाना

The SARAS Melas organized under the Centre’s DAY-NRLM connect rural women entrepreneurs with wider markets, buyers, and business opportunities. The Vijayawada edition marks the first National SARAS Mela outside Delhi-NCR, bringing together women entrepreneurs from 34 states and UTs. The platform strengthens DAY-NRLM’s efforts to promote sustainable livelihoods and supports the Lakhpati Didi vision of income growth. Dedicated pavilions offer opportunities for business learning, institutional support, and enterprise development. Digital platforms like eSARAS extend market access beyond physical events, helping rural women take their products to wider markets.
– A PIB FEATURE-

केंद्र सरकार कीडीएवाई-एनआरएलएमयोजना के तहत आयोजित होने वाले सरस मेले, ग्रामीण महिला उद्यमियों को बड़े बाज़ारों, खरीदारों और व्यापार के अवसरों से जोड़ते हैं। विजयवाड़ा में आयोजित यह मेला, दिल्ली-एनसीआरके बाहरहोने वालापहला राष्ट्रीयसरस मेलाहै, जिसमें 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की महिला उद्यमी एक साथ आई हैं। यह मंच डीएवाई-एनआरएलएम के उन प्रयासों को मज़बूत करता है, जिनका उद्देश्य स्थाई आजीविका को बढ़ावा देना औरलखपति दीदीविज़न के ज़रिए आय में वृद्धि करना है। यहाँ बनेविशेष पैवेलियन, व्यापार सीखने, संस्थागत सहायता पाने और उद्यम विकास के अवसर प्रदान करते हैं।ईसरसजैसे डिजिटल प्लेटफार्म, भौतिक आयोजनों से परे बाज़ार तक पहुँच बढ़ाते हैं, जिससे ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पादों को व्यापक बाज़ारों तक पहुँचाने में मदद मिलती है।

 

जहाँ ग्रामीण उद्यम को मिलते हैं नए अवसर

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पारंपरिक कौशल, हस्तशिल्प और उद्यमशीलता की प्रतिभा से समृद्ध है।महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) इस प्रतिभा को स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं से जोड़ने में मदद करते हैं। इनके उत्पादों में हथकरघा और हस्तशिल्प से लेकर प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और स्थानीय स्तर पर बनी अन्य वस्तुएं शामिल हैं। हालाँकि, किसी उत्पाद को तैयार करना तो बस पहला कदम है। ग्रामीण उद्यमियों को आगे बढ़ने के लिए ग्राहकों, बाजार की जानकारी और नए अवसरों की भी ज़रुरत होती है।सरस मेलामहिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को उपभोक्ताओं, खरीदारों और विभिन्न संस्थानों के करीब लाकर इस अंतर को पाटने का काम करते हैं। सरकार द्वारादीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम)के तहत आयोजित किए जाने वाले सरस मेला पिछले लगभग तीन दशकों में काफी विकसित हुए हैं। अब ये केवल प्रदर्शनियां नहीं रह गई हैं। ये मेले उत्पादों को बेचने, उपभोक्ताओं की पसंद को समझने, व्यावसायिक संबंध बनाने और बड़े बाजारों तक पहुँचने का एक मंच प्रदान करते हैं।

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आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ामें आयोजित राष्ट्रीय सरस मेला इस सफर में एक नया कदम है, क्योंकि यहदिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के बाहर आयोजित होने वाला पहला राष्ट्रीयसरस मेलाहै। यह आयोजन 13 अक्टूबर 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक विजयवाड़ा के पुन्नामी घाट पर चल रहा है। इसमें34राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशोंकी लगभग1,500महिला एसएचजी उद्यमी और लखपति दीदियां650से अधिक स्टॉलोंके माध्यम से अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर रही हैं। इस मेले में क्षेत्रीय वस्त्र, हस्तशिल्प, प्राकृतिक और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, तथा अन्य ग्रामीण उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा, यहाँ एकइंडिया फूड कोर्ट, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सीखने के लिए विशेष स्थानभी मौजूद हैं, जो इस अनुभव को और भी बेहतर बनाते हैं।

राष्ट्रीयसरस मेलाका विकेंद्रीकरणएक व्यापक विकास दृष्टिकोण को दर्शाता है यानी राष्ट्रीय मंचों को पूरे भारत में उत्पादकों और उपभोक्ताओं के करीब लाना। यह स्थानीय कौशल को नए बाजारों से जोड़ता है और साथ ही महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के विकास में मदद करता है। यह आयोजन अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों के विकेंद्रीकरण का मार्ग प्रशस्त करता है। यह दृष्टिकोण, ब्रिक्स और जी20 बैठकों जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को क्षेत्रीय स्तर पर आयोजित करने की नीति के अनुरूप है।

 

ग्रामीण आजीविका से लेकर बाज़ार तक पहुँच: डीएवाई-एनआरएलएमकी भूमिका

डीएवाई-एनआरएलएम, ग्रामीण गरीबी को कम करने और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है। यह स्वयं सहायता समूहों और उनके संघों के माध्यम से काम करता है, साथ हीवित्तीय समावेशन और टिकाऊ आजीविकाको समर्थन देता है। यह मिशन महिलाओं को कौशल, वित्त, तकनीक और आजीविका के अवसरों तक पहुँचने में मदद करता है। यह उत्पादों की दृश्यता, ब्रांडिंग और भौतिक, डिजिटल तथा संस्थागत बाज़ारों के साथ जुड़ाव के ज़रिए महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए बाज़ार के माहौल को मज़बूत बनाता है।

बाज़ार से यह जुड़ावइसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी उद्यम का विकास केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करता। महिलाओं को अपने स्थानीय समुदायों से बाहर अपने उत्पाद बेचने के अवसरों की ज़रुरत होती है। उन्हें ग्राहकों से मिलने वाली प्रतिक्रिया, उत्पादों की बेहतर प्रस्तुति और खरीदारों के साथ संपर्क से भी लाभ होता है। सरस मेला इन ज़रूरतों और बाज़ार के अवसरों के बीच एकव्यावहारिक पुलका काम करते हैं। ये मेले एसएचजी उद्यमों, उपभोक्ताओं, संस्थागत खरीदारों और अन्य हितधारकों को एक साथ लाते हैं। यहाँ उद्यमी सीधे अपने उत्पाद बेच सकते हैं, ग्राहकों की पसंद को समझ सकते हैं और ऐसी साझेदारियों की तलाश कर सकते हैं, जो इस आयोजन के बाद भी बनी रह सकें।

 

65लाभार्थियों से एक राष्ट्रीय बाज़ार तक

सरस मेला की यात्रा1999में शुरू हुई, जब दिल्ली में लगभग 65 लाभार्थियों के साथ पहला राष्ट्रीय सरस मेला आयोजित किया गया था। तब से, यह मंचराष्ट्रीय, क्षेत्रीय, राज्य और ज़िला स्तरोंतक फैल गया है। अब तक, कुल117राष्ट्रीयसरसमेलेआयोजित किए जा चुके हैं और इनकीवार्षिक बिक्री₹200करोड़ से अधिकरही है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी साल में कम से कम दो राज्य-स्तरीय सरस मेले आयोजित करते हैं, जिससेदेश भर में हर साल लगभग50ऐसे आयोजनहोते हैं। क्षेत्रीय और ज़िला-स्तरीय आयोजन स्थानीय उत्पादकों को अपने उत्पाद बेचने के बेहतर अवसर प्रदान करते हैं। ये सभी आयोजन बाज़ार खोजने, ब्रांडिंग करने, खरीदार-विक्रेता के बीच संबंध बनाने और उद्यम विकास में मदद करते हैं।

 

लखपति दीदी: आजीविका को अधिकस्थाई बनाना

लखपति दीदी पहल, डीएवाई-एनआरएलएम (दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के अंतर्गत आजीविका को बेहतर बनाने की एक परिणाम-उन्मुख पहल है। यह स्वयं सहायता समूहों और उनके संघों के ज़रिए जुड़ी महिलाओं के नेटवर्क पर आधारित है। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं और उनके परिवारों को आजीविका के विभिन्न अवसरों के ज़रिए एक टिकाऊ आय प्राप्त करने में मदद करना है।लखपति दीदीउस स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की सदस्य को कहा जाता है, जिसके परिवार की वार्षिक आय कम से कम₹1लाख होऔर यह आय लगातार बनी रहे। इस आय का आकलन कम से कम चार कृषि मौसमों और/या व्यावसायिक चक्रों के आधार पर किया जाता है।अगस्त2023में इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा बढ़ावा मिला, जब सरकार नेदो करोड़ लखपति दीदीबनाने का लक्ष्य रखा।अंतरिम बजट2024-25में इस लक्ष्य को बढ़ाकर तीन करोड़ कर दिया गया। इसके बाद, दिसंबर2025तक इस पहल ने तीन करोड़का मील का पत्थर हासिल कर लिया।

फरवरी2026में, सरकार नेलखपति दीदीयोजना के तहत छह करोड़ का बढ़ा हुआ लक्ष्यघोषित किया। इस नए चरण मेंआय में हुई वृद्धि को बनाए रखनेऔर उद्यमों को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। इस प्रयास में बाजार तक पहुंच, उत्पादों की दृश्यता, ब्रांडिंग और बिक्री के भरोसेमंद माध्यम बहुत महत्वपूर्ण हैं। सरस मेले आजीविका सृजन से लेकर उद्यम विकास तक के इस सफर में मदद करते हैं। ये मेले थोक ऑर्डर, संस्थागत बिक्री और लंबे समय तक चलने वाले बाजार संबंधों के अवसर भी पैदा कर सकते हैं। विजयवाड़ा मेला सफल उद्यमियों के लिए समर्पित जगह, व्यावसायिक सीख और संस्थागत सहयोग के जरिए इन संबंधों को साकार करता है। यहाँ महिलाएं अपने अनुभव साझा कर सकती हैं, नए तरीके सीख सकती हैं और अपने उद्यमों को मजबूत बनाने के उपाय तलाश सकती हैं।

 

विजयवाड़ा: एक राष्ट्रीय बाजार, जिसकी पहुंच क्षेत्रीय स्तर तक है

विजयवाड़ा मेला पूरे भारत के उत्पादों और परंपराओं को एक ही बाजार में एक साथ लाता है। यहाँ आने वाले लोग पंजाब की फुलकारी, जम्मू-कश्मीर की पश्मीना, तेलंगाना के इकत और तेलिया वस्त्र, तथा मिजोरम के पौनचेई जैसे उत्पादों को देख सकते हैं। इसके अलावा, यहाँ मीनाकारी, डोकरा कला, पीतल का काम, लकड़ी की कारीगरी और पारंपरिक पेंटिंग के स्टॉल भी मौजूद हैं।

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इस मेले का एक मुख्य आकर्षण 16 फुट की एक कलाकृति है, जिसका शीर्षक है-“शक्ति – लखपति दीदी की भावना”।यह उन महिलाओं की सामूहिक शक्ति का प्रतीक है, जोपारंपरिक शिल्प कौशल को संजोए रखती हैं और अपने हुनर ​​के जरिए आजीविका, आत्मनिर्भरता और समृद्धिहासिल करती हैं।

इस मेले को सरकारी साझेदारों का समर्थन प्राप्त है, जिनमेंराष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक(नाबार्ड) औरराष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान(एनआईआरडीपीआर)शामिल हैं। इसके डिजाइन में प्रत्यक्ष बिक्री के साथ-साथ सीखने के अवसर, प्रदर्शन और विभिन्न संस्थाओं के साथ जुड़ने की सुविधा शामिल है। इसका उद्देश्य इस आयोजन को न केवल आने वाले लोगों के लिए, बल्कि उन उद्यमियों के लिए भी उपयोगी बनाना है, जो अपना टिकाऊ व्यवसाय खड़ा करना चाहते हैं।

ऐसे स्थान जो उत्पादों, कौशल और अवसरों को जोड़ते हैं

विजयवाड़ा राष्ट्रीय सरस मेला पारंपरिक प्रदर्शनी और रिटेल फॉर्मेट से कहीं आगे बढ़कर, विशेष विषयों, ज्ञान और जुड़ावपर केंद्रित कई स्थान तैयार कर रहा है। ये स्थान उद्यमों को प्रदर्शित करने, एक-दूसरे से सीखने, ज्ञान के आदान-प्रदान, सरकारी और बाजार के हितधारकों के साथ जुड़ने, लाइव प्रदर्शन देखने और खरीदार-विक्रेता के बीच व्यवस्थित बातचीत के अवसर प्रदान करते हैं।

लखपति दीदीपैवेलियन: उद्यम यात्राओं से सीखना

लखपति दीदी पैवेलियन उन महिलाओं को शामिल करता है, जिन्होंने सफल उद्यम खड़े किए हैं। इसमें ऐसी उद्यमी शामिल हैं, जोसालाना₹10लाख से अधिक कमा रही हैं, जिनमें से कुछ महिलाएं तो ₹1 करोड़ से भी ज्यादा की कमाई कर रही हैं। ये महिलाएं अपनी उद्यम यात्रा, उत्पादों, बिजनेस मॉडल और बाजार रणनीतियों को अन्य एसएचजी (स्वयं सहायता समूह) सदस्यों के साथ साझा करती हैं। उनकी कहानियां उद्यम के विकास के विभिन्न रास्तों को उजागर करती हैं, जिनमें कृषि, गैर-कृषि आजीविका, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, हथकरघा और सेवाएं शामिल हैं। एक-दूसरे से सीखने की प्रक्रिया महिलाओं को ऐसे तरीके खोजने में मदद कर सकती है, जो उनके अपने कौशल और परिस्थितियों के अनुकूल हों।

सीखनाऔर ज्ञान पैवेलियन: व्यावसायिक कौशल का निर्माण

बेहतरीन उत्पादों के लिए मजबूत व्यावसायिक तौर-तरीकों की जरूरत होती है। ‘लर्निंग एंड नॉलेज’ पैवेलियन को एसएचजी उद्यमियों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशनों (एसआरएलएम), खरीदारों और अन्य हितधारकों के बीचकार्यशालाओं, विशेषज्ञों की बातचीत, मास्टरक्लास और अनुभवों को साझाकरने वाले सत्रों के लिए तैयार किया गया है। इसमें पैकेजिंग, ब्रांडिंग, बिजनेस प्रपोजल तैयार करना, ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया मार्केटिंग जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा, सार्वजनिक संस्थानों औरनिजी क्षेत्र के संगठनोंके साथ जुड़ाव को भी बढ़ावा दिया जाता है। इनमें नाबार्ड, फिक्की, सीआईआई, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे नाम शामिल हैं। इस तरह की बातचीत से उद्यमियों को अपने उत्पादों की प्रस्तुति को बेहतर बनाने और ग्राहकों तक पहुंचने के लिए व्यावहारिक तरीके सीखने को मिल सकते हैं।

कन्वर्जेंस पैवेलियन: महिलाओं को सहायता से जोड़ना

किसी उद्यम को बढ़ाने के लिए अक्सर केवल बाज़ार तक पहुँच ही काफी नहीं होती। उद्यमियों को क्रेडिट (ऋण), कौशल, तकनीक, गुणवत्ता प्रमाणन और सरकारी सहायता की भी आवश्यकता होती है। कन्वर्जेंस पैवेलियन स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से जुड़ी महिला उद्यमियों कोसंबंधित विभागों, वित्तीय संस्थानों, विकास एजेंसियों और तकनीकी संस्थानोंसे जोड़ता है। इन संगठनों और मंचों में जनजातीय कार्य मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय, ओएनडीसी, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) और ट्राईफेड शामिल हैं। इस पैवेलियन का उद्देश्य महिलाओं को विभिन्न योजनाओं, सेवाओं और सहायता प्रणालियों को समझने में मदद करना है।

प्रदर्शनपैवेलियन: उत्पादों के निर्माण की प्रक्रिया दिखाना

किसी तैयार उत्पाद के पीछे अक्सर कौशल, समय और तकनीक की एक कहानी छिपी होती है। डेमोंस्ट्रेशन पैवेलियन में आने वाले लोग इस निर्माण प्रक्रिया को सीधे देख सकते हैं। महिला उद्यमी

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और कारीगर यहाँ पारंपरिक और आधुनिक उत्पादन विधियों कालाइव प्रदर्शनकर रही हैं। इन गतिविधियों मेंमिट्टी के बर्तन बनाना, सुई-धागे का काम और शीशे की कढ़ाईशामिल हैं। लखपति दीदियों द्वारा दिए जा रहे लाइव प्रदर्शन व्यावहारिक सीखने और ज्ञान के आदान-प्रदान के अवसर पैदा करते हैं। इससे आगंतुकों को हाथ से बनी वस्तुओं के पीछे की कारीगरी को समझने में मदद मिलती है और यहाँ काडेमो और लाइव लर्निंग एरियाएक विशेष अनुभव प्रदान करता है।

 

इंडिया फूड कोर्ट: क्षेत्रीय स्वाद और महिला उद्यम

भोजन एक ऐसा माध्यम है, जिसके ज़रिए ग्रामीण उद्यम उपभोक्ताओं तक पहुँचते हैं। इंडिया फूड कोर्ट में50फूड स्टॉल  हैं, जहाँ शुद्ध मसालों का उपयोग करके पारंपरिक तरीके से तैयार किए गए क्षेत्रीय व्यंजन परोसे जाते हैं। इस आयोजन में 28 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की200से ज़्यादा ऐसी महिला उद्यमी शामिल हैं, जो पहली बार खाद्य सेवा क्षेत्रमें अपना व्यवसाय कर रही हैं। यहाँ आने वाले लोग गोलगप्पे, चाट और कबाब जैसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड का आनंद ले सकते हैं। क्षेत्रीय व्यंजनों में बिहार की लिट्टी-चोखा, हैदराबादी दम बिरयानी, असम का मशरूम पीठा और पंजाब की मक्के की रोटी और साग शामिल हैं। इसके अलावा, केरल के अट्टाप्पाडी का वाना सुंदरी और छत्तीसगढ़ का चौसेला भी यहाँ उपलब्ध है। यह फूड कोर्ट महिलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षेत्रीय पाक-कला और परंपराओं को पेश करने का अवसर देता है। साथ ही, यह भोजन तैयार करने और परोसने के व्यवसाय को महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमशीलता के व्यापक दायरे से जोड़ता है।

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सांस्कृतिक प्रदर्शन: भारत की विविधता का जश्न

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विभिन्न क्षेत्रों कीपारंपरिक कला, हस्तशिल्प, वस्त्र, संगीत और नृत्यको प्रदर्शित किया जाता है, जिससे यहाँ आने वालों को एक समृद्ध राष्ट्रीय अनुभव मिलता है। ये प्रदर्शन उन कई उत्पादों के पीछे छिपी विरासत का जश्न मनाते हैं, जो यहाँ रखे गए हैं। साथ ही, ये विभिन्न राज्यों को अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान पेश करने का मंच भी प्रदान करते हैं।

 

डिजिटल एकीकरण: भौतिक स्टॉलों से डिजिटल बाज़ारों तक

सरस मेला में व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में डिजिटल भुगतान एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।यूपीआईके ज़रिए भुगतानकरना सुविधाजनक और पारदर्शी है और फूड कोर्ट में मुख्य रूप से कैशलेस लेनदेन ही होते हैं। इसके साथ ही, बुजुर्ग नागरिकों और उन लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, जो नकद भुगतान करना पसंद करते हैं, यहाँकूपन-आधारित नकद भुगतानकी सुविधा भी उपलब्ध है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सभी को एक समावेशी और सुगम अनुभव मिले।

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इसके अलावा, बाजार का अवसर किसी मेले के खत्म होने के साथ ही समाप्त नहीं होना चाहिए। डिजिटल माध्यम उद्यमों को आयोजन स्थल और भौगोलिक सीमाओं से परे ग्राहकों तक पहुँचने में मदद कर सकते हैं। इसलिए, सरस व्यवस्था में भौतिक मेलों के साथ-साथ सरसगैलरी और ई-कॉमर्स माध्यमोंको भी शामिल किया गया है। ईसरस प्लेटफॉर्म ग्राहकों को एसएचजी उद्यमियों द्वारा बनाए गए उत्पादों को खोजने और खरीदने के लिए एक ऑनलाइन जरिया प्रदान करता है। इससे बाजार तक पहुँचने का दायरा आमने-सामने की बिक्री से आगे बढ़ जाता है और मेले के बाद भी उत्पादों की दृश्यता बनी रहती है।

वर्ष2025में एकविशेषसरसमेला डिजिटल ऐपपेश किया गया। यह ऐप एसएचजी के नामांकन, उपस्थिति प्रबंधन और आयोजन से जुड़ी जानकारी साझा करने में मदद करता है। इस तरह, भौतिक आयोजन और डिजिटल माध्यम मिलकर बाजार तक पहुँचने के पूरक रास्ते प्रदान करते हैं। सरस मेला ग्राहकों और खरीदारों के साथ सीधा संपर्क स्थापित करता है। वहीं, ऑनलाइन माध्यम आयोजन के बाद भी उत्पादों की पहुँच और बिक्री को बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं।

 

राष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँच को विभिन्न क्षेत्रों तक ले जाना

विजयवाड़ा में आयोजित राष्ट्रीय सरस मेला बाज़ार तक पहुँच प्रदान करने वाले इस मंच का विस्तार एक नए क्षेत्र में करता है। अलग-अलग जगहों पर ऐसे राष्ट्रीय स्तर के आयोजन करने से, ये आयोजन स्थानीय उपभोक्ताओं, खरीदारों और संस्थागत साझेदारों के और करीब आ जाते हैं। इससे अलग-अलग राज्यों के उत्पादकों को बड़े बाज़ारों तक पहुँचने का मौका भी मिलता है। यह दृष्टिकोण डीएवाई-एनआरएलएम और लखपति दीदी पहल के व्यापक उद्देश्यों को समर्थन देता है। महिलाओं को न केवल स्थाई आजीविका की ज़रुरत है, बल्कि उन्हें अपने उत्पादों का मूल्य बढ़ाने और बिक्री का दायरा बढ़ाने के तरीकों की भी ज़रूरत है। ऐसे मंच, जो बिक्री, सीखने के अवसर और संस्थागत जुड़ाव को एक साथ लाते हैं, इस प्रक्रिया में मददगार साबित हो सकते हैं।

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के बाहर आयोजित यह राष्ट्रीय सरस मेला, 2 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सेवा पखवाड़ा के दौरान सरकार द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। सरस मेलेवोकल फॉर लोकलऔरआत्मनिर्भर भारतके विज़न को भी बढ़ावा देते हैं। ये उपभोक्ताओं को ग्रामीण उत्पादों को जानने और उन्हें बनाने वाली महिला उद्यमियों से सीधे मिलने का अवसर देते हैं। ये मेले पारंपरिक कौशल को सहेजने के साथ-साथ महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को मज़बूत करने के अवसर भी पैदा करते हैं। असल में, राष्ट्रीय सरस मेलाहर उत्पाद, शिल्प और उद्यम के पीछे मौजूद महिलाओंके बारे में है। यह उस यात्रा को दर्शाता है, जोकौशल से उद्यम तक, उद्यम से बाज़ार तकऔर बाज़ार से एक टिकाऊ आजीविकातक जाती है।

 

 

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