टीएमयू के चिकित्सकों ने खराब दाढ़ की जगह प्रत्यारोपित की अक्ल दाढ़
मुरादाबाद, 18 अक्टूबर। तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय (टीएमयू) के डेंटल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के चिकित्सकों ने एक महिला की खराब हो चुकी दाढ़ की जगह उसी की अक्ल दाढ़ का सफल प्रत्यारोपण किया है। छह महीने बाद की जांच में प्रत्यारोपित दांत स्वस्थ, स्थिर और सामान्य रूप से काम करने की स्थिति में पाया गया।
विश्वविद्यालय के कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री एंड एंडोडॉन्टिक्स विभाग में 30 वर्षीय परवीना बेगम दाईं ओर की पहली दाढ़ में गंभीर समस्या लेकर पहुंची थीं। जांच और एक्स-रे में दांत अत्यधिक सड़ चुका पाया गया, जिसे बचाना संभव नहीं था। चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद मरीज की तीसरी दाढ़, जिसे अक्ल दाढ़ कहा जाता है, प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त पाई।

मरीज की सहमति से चिकित्सकों ने खराब दाढ़ निकालकर उसकी जगह अक्ल दाढ़ प्रत्यारोपित की। इस तकनीक को ऑटो-ट्रांसप्लांटेशन कहा जाता है। इसमें कृत्रिम दांत लगाने के बजाय मरीज के अपने प्राकृतिक दांत का उपयोग किया जाता है।
शल्यक्रिया के दौरान अक्ल दाढ़ की जड़ों के आसपास मौजूद पीरियोडॉन्टल लिगामेंट को सुरक्षित रखा गया। इसके बाद दांत को खाली स्थान में स्थापित कर टांकों और विशेष सहारे से स्थिर किया गया। यह लिगामेंट दांत को मसूड़ों और हड्डी से जुड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार उपयुक्त मरीजों में यह तकनीक कृत्रिम दंत प्रत्यारोपण का किफायती और जैविक विकल्प हो सकती है। हालांकि इसकी सफलता दांत की बनावट, हड्डी की स्थिति और शल्यक्रिया की सावधानी पर निर्भर करती है।
प्रत्यारोपण प्रो. रोहित कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में किया गया। टीम में डॉ. अंजलि शर्मा, डॉ. साक्षी गर्ग और डॉ. हर्षित सेठी जैन शामिल थे। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप तांगड़े, उपप्राचार्य डॉ. अंकिता जैन और विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन छाबड़ा ने टीम की सफलता की सराहना की।

