मधुमेह रोधी आयुर्वेदिक औषधि बीजीआर-34 (BGR-34) का उपयोग
मधुमेह रोधी आयुर्वेदिक औषधि बीजीआर-34 (BGR-34) वर्ष 2015 से देश के मरीजों के लिए उपलब्ध है। इस औषधि का विकास वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई), लखनऊ तथा केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप), लखनऊ द्वारा किया गया। इस औषधि के विकास के दौरान आवश्यक वैज्ञानिक परीक्षण किए गए, जिनमें औषधि का मानकीकरण, आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के आधार पर उत्पाद का प्रमाणीकरण, एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि का निर्धारण, सर्वोत्तम प्रभाव के लिए हर्बल घटकों का अनुकूलन, मधुमेह-रोधी प्रभाव का मूल्यांकन तथा सुरक्षा संबंधी अध्ययन आदि शामिल हैं।
देश के सरकारी अस्पतालों एवं औषधालयों में बीजीआर-34 की उपलब्धता संबंधित राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू), केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस), नगर निकायों, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआई), नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) आदि की खरीद एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में आती है।
चूंकि बीजीआर-34 एक स्वामित्व (प्रोप्राइटरी) आयुर्वेदिक औषधि के रूप में लाइसेंस प्राप्त दवा है, इसलिए इसकी खरीद सामान्यतः निविदा (टेंडर) प्रक्रिया के माध्यम से ही की जाती है। किसी भी खरीद एजेंसी की निविदा में इस दवा को शामिल किया जाना प्राप्त बोलियों की प्रतिस्पर्धात्मकता, मूल्य तथा संबंधित एजेंसी द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) एवं खरीद मानकों को पूरा करने पर निर्भर करता है।
नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) तथा दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) अपने क्षेत्र के निवासियों को यह दवा उपलब्ध कराते हैं। कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) के अंतर्गत यह दवा केवल वैध ईएसआई स्वास्थ्य कार्ड धारक कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को उपलब्ध कराई जाती है। वहीं, केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के लाभार्थियों को यह दवा स्थानीय केमिस्ट के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है, क्योंकि यह टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से खरीदी नहीं जाती।
भारत सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) तथा जिला अस्पतालों (डीएच) में आयुष सुविधाओं के सह-स्थापन (को-लोकेशन) की रणनीति अपनाई है। इसका उद्देश्य रोगियों को एक ही स्थान पर विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों में उपचार का विकल्प उपलब्ध कराना है।
आयुष चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल कर्मियों की नियुक्ति तथा उनके प्रशिक्षण का दायित्व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग निभाता है, जबकि आयुष अवसंरचना, उपकरण, फर्नीचर एवं औषधियों के लिए आवश्यक सहायता आयुष मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के अंतर्गत केंद्र प्रायोजित योजना के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है।
इसी प्रकार, आयुष मंत्रालय राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सहयोग से मौजूदा आयुष औषधालयों तथा उप-स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन कर आयुष स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों (AYUSH Health & Wellness Centres) को संचालित करने के लिए भी निरंतर प्रयास कर रहा है।
