मानसून की विदाई के बाद 5 से 7 अक्टूबर के बीच उत्तराखंड में बारिश के आसार

देहरादून, 4 अक्टूबर। उत्तराखंड से दक्षिण-पश्चिम मानसून की औपचारिक विदाई के तत्काल बाद मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने पांच से सात अक्टूबर के दौरान उत्तराखंड में बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना जताई है। पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम में यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल की भारी बारिश के बाद कई स्थानों पर पहाड़ियां और ढलान पहले से ही संवेदनशील बनी हुई हैं।
आईएमडी की 4 अक्टूबर को जारी ताजा विज्ञप्ति के अनुसार पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में नया वर्षा दौर शुरू होने के आसार हैं। उत्तराखंड में पांच से नौ अक्टूबर के बीच कहीं-कहीं से लेकर कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। पांच, छह और सात अक्टूबर को गरज-चमक और बिजली गिरने के साथ झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी भी दी गई है। आठ अक्टूबर के बाद मौसम की तीव्रता कम होने की संभावना है।
उत्तराखंड के लिए यह मौसम परिवर्तन इसलिए भी उल्लेखनीय है कि राज्य से दक्षिण-पश्चिम मानसून शनिवार को ही पूरी तरह विदा हुआ है। इस वर्ष मानसून ने 30 जून को उत्तराखंड में प्रवेश किया था और करीब 96 दिनों तक सक्रिय रहा। पूरे मानसून काल में राज्य में 1269.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 1162.7 मिलीमीटर मानी जाती है। इस तरह राज्य में सामान्य से करीब नौ प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। लगातार चौथे वर्ष उत्तराखंड में मानसून की बारिश सामान्य से अधिक रही है।
इस बार सितंबर का अंतिम सप्ताह असाधारण रूप से बरसाती रहा। इस अवधि में सामान्य 20.9 मिलीमीटर के मुकाबले 108.8 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो सामान्य से 421 प्रतिशत अधिक है। पूरे सितंबर में भी सामान्य से करीब 66 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। सितंबर के आखिरी दिनों की भारी वर्षा से पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़कें बंद होने और नदियों-गदेरों के उफान जैसी स्थितियां बनी थीं।
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मद्देनजर चारधाम यात्रा और पर्वतीय मार्गों पर आवाजाही करने वाले यात्रियों के लिए अगले तीन दिन महत्वपूर्ण रहेंगे। बारिश और गरज-चमक के दौरान ऊंचाई वाले खुले स्थानों पर बिजली गिरने का खतरा रहता है, जबकि संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा से भूस्खलन या पत्थर गिरने की आशंका बढ़ सकती है।
किसानों के लिए भी मौसम का यह बदलाव अहम है। राज्य के मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में खरीफ की फसलों की कटाई का समय चल रहा है। धान सहित तैयार फसलों पर बारिश और तेज हवा का असर पड़ सकता है। खेतों में काटकर रखी गई फसल के भीगने से नुकसान की आशंका रहती है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार यह बारिश मानसून की वापसी नहीं, बल्कि मानसून की विदाई के बाद विकसित हो रही अलग मौसमी गतिविधि का हिस्सा है। इसके गुजरने के बाद उत्तराखंड में मौसम के शुष्क होने और रात के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आने के साथ पहाड़ों में सर्दी का असर बढ़ने की संभावना है।
