काश्तकारों की विपदा कौन सुने ? दिन बंदरों और रातें आवारा जानवरों को भगाने में कट रही हैं

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-गौचर से दिग्पाल गुसाईं —
बंदरों व आवारा जानवरों के उत्पात से क्षेत्र के कास्तकार इन दिनों भारी संकट से घिर गए हैं। नौबत ऐसी आ गई है कि कास्तकार दिन में बंदरों तथा रात आवारा जानवरों को भगाने में बिता रहे हैं।

दरअसल गौचर के आसपास के क्षेत्र के लोग अपने बेकार साबित हो चुके जानवरों को रात के समय पालिका क्षेत्र की सीमा में छोड़ देते हैं।जो दिन रात खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुक़सान पहुंचा रहे हैं।इन आवारा जानवरों से निजात दिलाने के लिए कास्तकार लंबे समय से मांग करते आ रहे हैं लेकिन किसी के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है।

हालांकि इन जानवरों को बाड़े के अंदर रखने के लिए कांजी हाउस भी बनाया गया है। इसके लिए बकायदा समिति का गठन भी किया गया है। सरकार द्वारा समिति को पशु चारे के लिए सहायता राशि भी दी जाती है। बावजूद इसके इन जानवरों को खुले में छोड़ दिया जाता है जो दिन रात खेतों में खड़ी फसलों को चट कर रहे हैं।इस कड़ाके की ठंड में भी कास्तकार रात में खेतों की चौकीदारी करने में बिता रहे हैं।

जानवरों की पहचान के लिए पशुपालन विभाग द्वारा जानवरों के कानों पर टोकन लगाए जाते हैं। लेकिन ताजुब तो इस बात का है कि कास्तकारों द्वारा लगातार आवाज उठाने के बावजूद भी पशुपालन विभाग आज तक हरकत में नहीं आ पाया है। यही हाल वन विभाग का भी है। ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड का प्रकोप बढ़ने से इन दिनों बंदरों ने निचले इलाकों का रुख कर कास्तकारों को भारी परेशानी में डाल दिया है। झुंड के रूप में आ रहे बंदरों का भगाना कास्तकारों के बूते की बात नहीं रह गई है। सब जानते हुए भी शासन प्रशासन क्यों मौन साधे हुए है यह बात किसी के समझ में नहीं आ रही है। महिला संगठन की अध्यक्ष उर्मिला धरियाल, पूर्व अध्यक्ष विजया गुसाईं, उपाध्यक्ष जसदेई कनवासी, सचिव किसमती गुसाईं, कोषाध्यक्ष विश्वेसरी कनवासी, मंजू नेगी, कंचन कनवासी, बीना चौहान,

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