नंदा जात संपन्न, अब ग्वालदम-तपोवन सड़क बीआरओ को सौंपे जाने पर टिकी नजरें
राजजात 2027 तक टलने से सड़क हस्तांतरण को लेकर असमंजस, मुख्यमंत्री ने यात्रा के बाद बीआरओ को सौंपने की थी घोषणा
-हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली, 25 सितम्बर। नंदादेवी बड़ी जात यात्रा 2026 संपन्न होने के बाद अब सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और बहुप्रतीक्षित ग्वालदम-नंदकेशरी-देवाल-वांण-तपोवन मोटर मार्ग को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को हस्तांतरित किए जाने पर क्षेत्रवासियों की नजरें टिक गई हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिसंबर 2025 में नंदा राजजात के बाद इस सड़क को बीआरओ को सौंपने की घोषणा की थी। हालांकि राजजात 2026 में आयोजित नहीं हो सकी और अब इसके 2027 में प्रस्तावित होने के कारण सड़क हस्तांतरण को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
दरअसल, रक्षा मंत्रालय ने भारत-तिब्बत सीमा क्षेत्र में सामरिक संपर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से ग्वालदम-नंदकेशरी-देवाल-वांण-तपोवन मोटर मार्ग को विकसित करने की स्वीकृति दी थी। सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस जनरल स्टाफ सड़क की कुल लंबाई 99.200 किलोमीटर है। रक्षा मंत्रालय ने 7 अक्टूबर 2024 को इसे स्वीकृति देते हुए निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी बीआरओ को सौंपी थी।
इस परियोजना में राज्य मार्ग संख्या 91 के अंतर्गत ग्वालदम से नंदकेशरी तक करीब 18 किलोमीटर और राज्य मार्ग संख्या 90 के अंतर्गत नंदकेशरी से देवाल होते हुए वांण तक करीब 42 किलोमीटर सड़क शामिल है। ये मार्ग वर्तमान में लोक निर्माण विभाग, थराली के अधीन हैं और इन्हें बीआरओ को हस्तांतरित किया जाना है। इसके अलावा वांण से तपोवन (ज्योतिर्मठ) तक 29.200 किलोमीटर नई सड़क का निर्माण बीआरओ को करना है।
बताया जाता है कि रक्षा मंत्रालय ने स्वीकृति के बाद बीआरओ को सांकेतिक धनराशि भी जारी कर दी थी। इसके बाद बीआरओ ने सड़क के निर्माण और रखरखाव की दिशा में गतिविधियां तेज कर दी थीं। इसी बीच वर्ष 2025 में राज्य सरकार ने 2026 में प्रस्तावित श्री नंदादेवी राजजात यात्रा का हवाला देते हुए ग्वालदम-नंदकेशरी और नंदकेशरी-वांण मार्ग को यात्रा संपन्न होने तक लोक निर्माण विभाग के पास ही रखने का अनुरोध रक्षा मंत्रालय से किया।
राज्य सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हुए रक्षा मंत्रालय ने राजजात 2026 संपन्न होने तक सड़क को लोक निर्माण विभाग के अधीन यथावत रखने पर सहमति दे दी। इसके बाद बीआरओ ने भी इस मार्ग को लेकर अपनी गतिविधियां लगभग रोक दीं। सड़क का हस्तांतरण टलने पर पिंडर घाटी सहित इससे लाभान्वित होने वाले क्षेत्रों में विरोध भी शुरू हुआ।
इसी बीच 7 दिसंबर 2025 को देवाल विकासखंड के सैनिक बहुल गांव सवाड़ में आयोजित ‘अमर शहीद सैनिक मेले’ में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घोषणा की थी कि राजजात 2026 संपन्न होने के तुरंत बाद ग्वालदम-तपोवन सड़क को बीआरओ को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।
अब परिस्थितियां कुछ अलग हैं। वर्ष 2026 में प्रस्तावित श्री नंदादेवी राजजात आयोजित नहीं हो सकी और इसे 2027 के लिए प्रस्तावित किया गया है। इसके स्थान पर नंदादेवी बड़ी जात यात्रा 2026 संपन्न हो चुकी है। ऐसे में क्षेत्र में सवाल उठने लगा है कि क्या राज्य सरकार मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप आने वाले महीनों में ग्वालदम-तपोवन सड़क को बीआरओ को हस्तांतरित करेगी या राजजात के 2027 में प्रस्तावित होने के कारण हस्तांतरण भी तब तक टला रहेगा। सामरिक और क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस सड़क को लेकर अब राज्य सरकार के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं।
