पर्यावरण

अगर पिंडर का पानी कोसी नदी में डाला तो पिंडर घाटी के लोग चुप नहीं बैठेंगे

–थराली से हरेंद्र बिष्ट

पिंडर नदी का पानी कुमाऊं के कोसी नदी में डालने के सरकार के प्रस्ताव का पिंडर घाटी में विरोध होना शुरू हो गया हैं।इस संबंध में आज मुख्यमंत्री को संबोधित एक संयुक्त हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन उपजिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया हैं।

मुख्यमंत्री को भेजे गए एक संयुक्त हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन में कहा गया हैं कि सदियों से पिडारी ग्लेशियर से पिंडर नदी निकल कर देवाल,थराली, नारायणबगड़ होते हुए कर्णप्रयाग ब्लाक के एक बड़े हिस्से से गुजर कर कर्णप्रयाग में अलकनंदा से दोनों नदियों का संगम होता हैं। पिंडारी ग्लेशियर से लेकर कर्णप्रयाग तक पिंडर नदी की वजह से ही दर्जनों बसें हुए हैं।इस नदी की आद्र्रता पर इन गांवों की फसलों का उत्पादन निर्भर करता हैं।


ज्ञापन में कहा गया हैं कि राज्य सरकार के द्वारा पिंडर नदी को दूसरी ओर कोसी नदी में मिलाने का एक प्रस्ताव पारित किया गया हैं। इसके तहत देवाल ब्लाक के मोपाटा गांव के पास से एक सुरंग के जरिए पिंडर के पानी को कोसी नदी तक लें जाने की बात कही गई हैं। कहा गया हैं कि पिंडर का पानी कोसी लें जाने का विपरीत प्रभाव इस क्षेत्र पर पड़ना तैय हैं। सीएम से इस प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से नामंजूर करने की मांग करते हुए कहा है कि अगर ऐसा प्रयास किया गया तों पिंडर क्षेत्र की जनता को मजबूरन लामबंद हो कर जनांदोलन के लिए विवश होना पड़ेगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी।

ज्ञापन में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी भुपाल सिंह गुसाईं, थराली के पूर्व जेष्ठ प्रमुख जयसिंह बिष्ट, पूर्व कनिष्ठ प्रमुख नवीन मिश्रा, प्रधान मंजू देवी, अधिवक्ता विक्रम रावत,पूरन फर्स्वाण,द्वारिका प्रसाद थपलियाल, महिपाल नेगी, जयराम,भुवन हटवाल,मदन मोहन सिंह, देवेंद्र नेगी, विरेंद्र नेगी आदि के हस्ताक्षर मौजूद हैं।

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