मानव विकास सूचकांक के सरकारी दावों पर कांग्रेस का सवाल, आंकड़े धरातल से अलग: काजी निजामुद्दीन
देहरादून, 6 मार्च। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं दिल्ली प्रभारी विधायक काजी निजामुद्दीन ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। शुक्रवार को देहरादून में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार विकास के बड़े-बड़े आंकड़े पेश कर रही है, जबकि प्रदेश की वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है।
काजी निजामुद्दीन ने कहा कि एक ओर सरकार मानव विकास के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर देहरादून की हवा लगातार प्रदूषित होती जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 604 के पार पहुंच गया था। आज हालात ऐसे हैं कि बड़े अधिकारी और मंत्री तक बिना फिल्टर का पानी पीने से बचते हैं, जबकि सरकार विकास के बड़े दावे कर रही है।
उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय के वर्ष 2023 के आंकड़े, जो सितंबर 2025 में सामने आए, बताते हैं कि जन्म के समय लिंगानुपात के मामले में उत्तराखंड की स्थिति चिंताजनक है। उनके अनुसार राज्य में 1000 पुरुषों पर केवल 868 महिलाएं हैं, जो अन्य राज्यों की तुलना में बेहद खराब स्थिति को दर्शाता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि राज्य की अर्थव्यवस्था उतनी ही मजबूत है जितना सरकार दावा करती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन क्यों नहीं रुक रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक है। उनके अनुसार वर्ष 2016-17 में प्रदेश में 12,601 प्राथमिक विद्यालय थे, जो 2025 में घटकर 11,116 रह गए। उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 2,889 से घटकर लगभग 2,500 और माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 1,100 से घटकर 921 रह गई है। उन्होंने कहा कि कुल विद्यालयों की संख्या 2017 में 17,753 थी, जो अब घटकर 16,018 रह गई है।
काजी निजामुद्दीन ने कहा कि राज्य में बेरोजगारी के साथ-साथ अधरोजगारी भी बड़ी समस्या बन गई है। कई शिक्षित युवा अपनी योग्यता से कम स्तर की नौकरियां करने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार द्वारा बताई गई प्रति व्यक्ति आय पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि औसत आय 2.73 लाख रुपये प्रतिवर्ष है, तो इसका अर्थ लगभग 23-24 हजार रुपये प्रतिमाह होता है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़े शहरी क्षेत्रों के आधार पर हो सकते हैं, लेकिन पहाड़ी जिलों की वास्तविक स्थिति इससे अलग है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में निवेश की कमी के कारण औद्योगिक क्षेत्र में भी गिरावट आई है। उनके अनुसार 2017 में प्रदेश में 2,987 फैक्ट्रियां थीं, जो अब घटकर 2,897 रह गई हैं, जिससे रोजगार के अवसर भी कम हुए हैं।
कांग्रेस नेता ने स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में लगभग 59 प्रतिशत बच्चे एनीमिया से पीड़ित हैं, जबकि लगभग 45 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी पाई जाती है। उन्होंने कहा कि करीब 27 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं।
काजी निजामुद्दीन ने राज्य सरकार पर बजट प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सामाजिक सेवाओं, कृषि और ग्रामीण विकास के लिए आवंटित बजट का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हो पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बढ़ते कर्ज और घटते निवेश से आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने पत्रकार वार्ता के माध्यम से विभिन्न सरकारी आंकड़े सामने रखे हैं और अब जनता को तय करना है कि वास्तविक स्थिति क्या है।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र शाह, सोशल मीडिया सलाहकार अमरजीत सिंह, प्रवक्ता सुजाता पॉल, डॉ. प्रतिमा सिंह, पूर्व सैनिक विभाग अध्यक्ष रामरतन नेगी और अभिनव थापर सहित अन्य कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे।
