विद्यालयों के लिए सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम आधारित पाठ्यचर्या पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित

देहरादून, 9 जून। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 में पीएम श्री विद्यालयों के लिए सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम (Social Emotional Learning-SEL) आधारित पाठ्यचर्या विकसित किए जाने के दृष्टिगत महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा उत्तराखण्ड श्रीमती आकांक्षा कोंडे की अध्यक्षता में मंगलवार को एससीईआरटी ऑडिटोरियम, देहरादून में एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, शिक्षाविदों, विशेषज्ञों तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्रीमती आकांक्षा कोंडे ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ उनका मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त होना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम विद्यार्थियों में आत्म-जागरूकता, सहानुभूति, नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल तथा सकारात्मक निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम है।
इस अवसर पर हरिद्वार जनपद के भगवानपुर विकासखंड के शिक्षकों द्वारा प्रकाशित ‘आनन्दिता’ पत्रिका का विमोचन भी किया गया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में महानिदेशक ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे संवेदनशील, जिम्मेदार और जागरूक नागरिक तैयार करना है, जो समाज के सकारात्मक निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। उन्होंने विद्यालयों में ‘आनन्दम्’ एवं SEL आधारित गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक जनपद और विकासखंड में ऐसे नवाचार किए जाने चाहिए, जिनके सकारात्मक परिणाम विद्यार्थियों के व्यवहार और व्यक्तित्व में स्पष्ट रूप से दिखाई दें।
निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखण्ड श्रीमती वंदना गब्र्याल ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 2019 से प्राथमिक स्तर पर सफलतापूर्वक संचालित ‘आनन्दम्’ पाठ्यचर्या के अनुभवों के आधार पर अब कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए SEL आधारित पाठ्यचर्या विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, संवेदनशीलता, सहानुभूति, नेतृत्व क्षमता तथा जीवन कौशलों का विकास सुनिश्चित करना है।
राज्य नोडल अधिकारी ‘आनन्दम्’ डॉ. बी.पी. मैंदोली ने बताया कि पीएम श्री विद्यालयों के लिए विकसित की जा रही SEL आधारित पाठ्यचर्या राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, हार्वर्ड विश्वविद्यालय के सामाजिक-भावनात्मक अधिगम फ्रेमवर्क, ‘मनोदर्पण’ तथा ‘उम्मीद’ दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और जीवन कौशलों को सुदृढ़ बनाना है।
कार्यशाला में राज्य के पीएम श्री विद्यालयों में ‘माइंड एंड वेलनेस सेल’ की स्थापना, सुरक्षित एवं सकारात्मक विद्यालयी वातावरण के निर्माण, परामर्श सेवाओं के विस्तार, योग तथा रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
कार्यशाला में निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखण्ड श्रीमती वंदना गब्र्याल, अपर निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा श्री के.एस. रावत, विभिन्न मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक एवं माध्यमिक), खंड शिक्षा अधिकारी, उप शिक्षा अधिकारी, डायट प्राचार्य, जनपदीय आनन्दम् समन्वयक, डायट प्रवक्ता तथा सहयोगी संस्थाओं लभ्य फाउंडेशन, ड्रीम ए ड्रीम और कॉन्शियसलीप के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया।
