टीएमयू में ‘जैन कर्म सिद्धांत’ की समकालीन प्रासंगिकता पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी 27 से
भारतीय दार्शनिक परिषद के सहयोग से होगा आयोजन, देशभर के विद्वान करेंगे मंथन
मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू), मुरादाबाद में ‘जैन कर्म सिद्धांत की समकालीन प्रासंगिकता’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 27 मार्च से किया जाएगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन भारतीय दार्शनिक परिषद के सहयोग से आयोजित यह संगोष्ठी टीएमयू के जैन अध्ययन केंद्र और भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र (आईकेएस) के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित होगी।
संगोष्ठी का उद्घाटन 27 मार्च को होगा। कार्यक्रम में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के विद्वान डॉ. फूलचंद प्रेमी जैन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। वहीं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रो. रामनाथ झा तथा नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी), नई दिल्ली की सदस्य डॉ. इंदु जैन विशिष्ट अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। टीएमयू के कुलपति प्रो. वी.के. जैन भी कार्यक्रम में विशेष रूप से मौजूद रहेंगे।
टीएमयू के जैन अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. विपिन जैन ने बताया कि यह संगोष्ठी भारतीय दार्शनिक परंपराओं के गंभीर अध्ययन और उनकी समकालीन संदर्भों में उपयोगिता को समझने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी। उनके अनुसार, यह आयोजन न केवल अकादमिक संवाद को मजबूत करेगा, बल्कि युवा शोधकर्ताओं को अपने विचार और शोध साझा करने का सशक्त अवसर भी देगा। उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी परंपरा और आधुनिकता के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।
संगोष्ठी में जैन अध्ययन से जुड़े शोधार्थी, विभिन्न विषयों के विद्यार्थी तथा देश के अनेक विश्वविद्यालयों से आए विद्वान अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। आयोजन में जैन अध्ययन और जैन दर्शन के अनेक प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भाग लेंगे। इनमें इसरो के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. राजमल जैन, मगध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव डॉ. नलिन के. शास्त्री, डॉ. श्रेयांश जैन, प्रो. जय कुमार जैन, एलवीएसएसयू, नई दिल्ली से प्रो. अनेकांत जैन, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के पूर्व कुलपति डॉ. दिनेश शास्त्री, वीएल इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. वी.के. जैन, प्रो. राका जैन तथा ‘धर्म फॉर लाइफ’ की संस्थापक मेधावी जैन प्रमुख रूप से शामिल हैं।
टीएमयू के आईकेएस सेंटर की समन्वयक डॉ. अलका अग्रवाल ने कहा कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी से प्रतिभागियों को जैन कर्म सिद्धांत की गहराई और उसकी आधुनिक संदर्भों में प्रासंगिकता को समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य जैन कर्म सिद्धांत को समकालीन सामाजिक, नैतिक और दार्शनिक परिप्रेक्ष्य में पुनर्स्थापित करना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के इस महत्वपूर्ण पक्ष को व्यापक विमर्श के केंद्र में लाना है।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. रत्नेश जैन हैं, जबकि सह–संयोजिका की जिम्मेदारी डॉ. नम्रता जैन को सौंपी गई है।
