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अमेरिका-ईरान में दो सप्ताह का अस्थायी युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर बनी सहमति

 

वॉशिंगटन/तेहरान/इस्लामाबाद। अमेरिका (यूएस) और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आखिरकार पाकिस्तान की सक्रिय मध्यस्थता से एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता सामने आई है। दोनों देशों ने दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम (सेस-फायर) पर सहमति जताई है। यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए कड़े अल्टीमेटम की समय-सीमा समाप्त होने से ठीक पहले हुआ, जिससे संभावित बड़े सैन्य टकराव का खतरा फिलहाल टल गया है।
इस अस्थायी समझौते को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “इस्लामाबाद एक्सॉर्ड” के नाम से देखा जा रहा है, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।
ट्रंप का कड़ा अल्टीमेटम और बढ़ता सैन्य दबाव
मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि शाम 8 बजे (ईटी) तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह और सुरक्षित रूप से सभी अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर हमले करेगा।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा था कि ईरान के पावर प्लांट्स, पुलों और अन्य रणनीतिक ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में यह भी कहा था कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो “एक पूरी सभ्यता रातोंरात खत्म हो सकती है।”
इस बयान के बाद पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया था और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बड़े युद्ध की आशंका सताने लगी थी।
पाकिस्तान की मध्यस्थता बनी निर्णायक
इस गंभीर स्थिति के बीच पाकिस्तान ने सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभाई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने अमेरिका और ईरान—दोनों देशों से अलग-अलग वार्ताएं कीं।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने ईरान से गुडविल जेस्चर के रूप में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का आग्रह किया, वहीं अमेरिका से संभावित सैन्य कार्रवाई को रोकने का अनुरोध किया।
लगातार संपर्क और बातचीत के बाद पाकिस्तान ने दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम का प्रस्ताव रखा, जिसे अंततः दोनों पक्षों ने स्वीकार कर लिया। इस कूटनीतिक पहल को अब “इस्लामाबाद एक्सॉर्ड” के रूप में जाना जा रहा है।
समझौते की मुख्य शर्तें
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर घोषणा करते हुए कहा कि पाकिस्तान की मध्यस्थता के आधार पर अमेरिका दो सप्ताह के लिए ईरान पर संभावित सैन्य हमलों को स्थगित करेगा।
हालांकि, यह स्थगन एक शर्त पर आधारित है—
ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलना होगा
सभी अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करनी होगी
दूसरी ओर, ईरान ने भी इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए घोषणा की कि अगले दो सप्ताह के भीतर जलडमरूमध्य में सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया जाएगा।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने भी इस समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरानी सैन्य बल जहाजों की आवाजाही के समन्वय में सहयोग करेंगे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का वैश्विक महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से इसका महत्व अत्यंत बड़ा है।
विश्व के कुल तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से होता है।
एशिया के प्रमुख देश—भारत, चीन, जापान और पाकिस्तान—इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर हैं।
हाल के महीनों में ईरान द्वारा इस जलमार्ग को प्रभावी रूप से नियंत्रित करने के कारण वैश्विक तेल कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई थी।
कई देशों को अपने जहाजों के लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ रही थी, लेकिन अब पूर्ण रूप से मार्ग खोलने का निर्णय वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरा माना जा रहा है।
अगले दो सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता केवल अस्थायी राहत है। आने वाले दो सप्ताह दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक—
इस अवधि में इस्लामाबाद में विस्तृत वार्ता हो सकती है।
ईरान ने एक 10-पॉइंट शांति प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें व्यापक समझौते की संभावनाएं शामिल हैं।
इस प्रस्ताव में आर्थिक प्रतिबंधों (सैंक्शंस) को हटाना,
जमे हुए विदेशी संपत्तियों को जारी करना,
और क्षेत्रीय सुरक्षा समझौते जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस प्रस्ताव को “वर्केबल बेसिस” यानी चर्चा के लिए उपयुक्त आधार बताया है।
इजरायल की चिंता और परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा
हालांकि इस अस्थायी समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत की भावना है, लेकिन इजरायल ने इस पर चिंता व्यक्त की है।
इजरायल का मानना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अभी भी एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा हल नहीं हुआ, तो भविष्य में तनाव दोबारा बढ़ सकता है।
फरवरी 2026 से जारी है टकराव
यह पूरा घटनाक्रम फरवरी 2026 से जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव का हिस्सा है। पिछले कुछ महीनों में दोनों पक्षों के बीच कई हमले और जवाबी हमले हो चुके हैं।
इस दौरान—
कई सामरिक ठिकानों पर हमले हुए
तेल आपूर्ति प्रभावित हुई
वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी
राष्ट्रपति ट्रंप इससे पहले भी कई बार समय-सीमा बढ़ा चुके थे, लेकिन इस बार स्थिति बेहद गंभीर मानी जा रही थी। अंतिम क्षणों में पाकिस्तान की सक्रिय कूटनीति से संभावित बड़े सैन्य टकराव को टाल दिया गया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल रहता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह खुल जाता है, तो—
कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आ सकती है
एशियाई देशों की ऊर्जा आपूर्ति सुधर सकती है
वैश्विक बाजारों में भरोसा बढ़ सकता है
भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आने वाले तेल पर निर्भर करता है।
स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम
दोनों देशों के अधिकारियों ने इस समझौते को स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम बताया है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह केवल अस्थायी व्यवस्था है।
राजनयिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले दो सप्ताह में सार्थक बातचीत होती है, तो यह समझौता दीर्घकालिक शांति समझौते में बदल सकता है।
हालांकि, यदि किसी भी पक्ष ने शर्तों का उल्लंघन किया, तो क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ने और सैन्य कार्रवाई की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
समग्र रूप से, पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुआ यह अस्थायी युद्धविराम न केवल पश्चिम एशिया क्षेत्र बल्कि पूरी दुनिया के लिए राहत की खबर माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें आने वाले दो सप्ताह पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि यह समझौता स्थायी शांति की नींव बनेगा या केवल एक अस्थायी विराम साबित होगा।

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