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बेमौसम बारिश से कास्तकार चिंतित, पकने को तैयार फसलों पर मंडराया खतरा

दिग्पाल गुसाईं की रिपोर्ट-
गौचर, 10 अप्रैल। पहाड़ों में अप्रैल का महीना कास्तकारी के लिए अत्यंत अहम माना जाता है, लेकिन बेमौसम बारिश ने कास्तकारों की पेशानी पर बल डाल दिए हैं। उन्हें इस बात की चिंता सताने लगी है कि यदि समय रहते मौसम ने साथ नहीं दिया, तो पकने के कगार पर पहुंची फसल से उन्हें हाथ धोना पड़ सकता है।
अप्रैल महीने में पहाड़ी क्षेत्रों में कास्तकारी का कार्य चरम पर पहुंच जाता है। कास्तकार ऊंचाई वाले क्षेत्रों में धान की बुवाई में जुट जाते हैं, जबकि निचले इलाकों में गेहूं के साथ-साथ जौ और सरसों की कटाई का काम शुरू हो जाता है। इस बार जाड़ों में पर्याप्त बारिश न होने के कारण गेहूं की फसल समय से पहले पकने की कगार पर पहुंच गई है। अप्रैल महीने में गेहूं की फसल के लिए पर्याप्त धूप की नितांत आवश्यकता होती है, लेकिन मौसम के बिगड़े मिजाज ने कास्तकारों को परेशानी में डाल दिया है।
बेमौसम बारिश ने जहां ऊंचाई वाले इलाकों में धान की बुवाई में बाधा उत्पन्न कर दी है, वहीं निचले क्षेत्रों में जैसे ही कास्तकार सरसों, जौ और गेहूं की कटाई की तैयारी में जुटे, बारिश ने उनके कार्यों पर विराम लगा दिया। पिछले कई दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने कास्तकारों की चिंता और बढ़ा दी है। उन्हें आशंका है कि यदि मौसम का मिजाज जल्द नहीं सुधरा, तो पकने को तैयार फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दूसरी ओर, लगातार बारिश के कारण ठंड भी एक बार फिर लौट आई है, जिससे लोगों ने गर्म कपड़े दोबारा पहनने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, इस बारिश से वन विभाग और पेयजल विभाग ने कुछ राहत की सांस ली है। जंगलों में लगी आग बारिश से बुझ गई है और काफी हद तक पेयजल संकट से भी राहत मिली है।

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