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तेज़ बारिश और पहाड़ी तूफ़ान के बीच हर्षिल घाटी में नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण शुरू

वाइब्रेंट विलेज’ पहल को मिला नया आयाम

 

उत्तरकाशी/हर्षिल घाटी, 3 मई।

तेज़ बारिश, ठंडी हवाओं और पहाड़ी तूफ़ान के बीच हर्षिल घाटी में नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक उद्घाटन हुआ। दुर्गम मौसम के बावजूद इस प्रकार का प्रशिक्षण आयोजित होना एक उल्लेखनीय पहल है। खास बात यह है कि क्षेत्र में पहली बार इतने चुनौतीपूर्ण मौसम में इस तरह का कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।

बगोरी गाँव के पंचायती भवन में आयोजित इस प्रशिक्षण में हर्षिल, झाला, धराली, गंगोत्री और मुखवा जैसे सीमांत क्षेत्रों से 30 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। खराब मौसम के बावजूद कई प्रतिभागी बाइक से कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर प्रशिक्षण स्थल तक पहुंचे, जो उनके उत्साह और समर्पण को दर्शाता है।

कार्यक्रम में बगोरी ग्राम प्रधान श्रीमती रंजीता धौबरा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत हर्षिल घाटी नए अवसरों का केंद्र बन रही है और ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल रहे हैं।

हर्षिल ग्राम प्रधान श्रीमती सुचित्रा रौतेला ने कहा कि इस पहल से स्थानीय युवाओं को सही दिशा और अवसर मिल रहे हैं, जिससे वे पर्यटन क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकते हैं।

उत्तराखंड पर्यटन विभाग की अपर निदेशक श्रीमती पूनम चंद ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि अपने क्षेत्र के छिपे हुए नेचर ट्रेल्स की पहचान कर उन्हें पर्यटन से जोड़ना इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। उन्होंने ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के अंतर्गत इस क्षेत्र की विशेष संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर्षिल दौरे के दौरान भी इस क्षेत्र को ‘वाइब्रेंट विलेज’ के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया था। उसी दिशा में यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यह प्रशिक्षण उत्तराखंड पर्यटन विभाग, उत्तराखंड सरकार तथा पर्यटन एवं आतिथ्य कौशल परिषद (THSC) के संयुक्त तत्वावधान में संचालित किया जा रहा है। समर्पित मीडिया सोसाइटी, जो THSC की प्रशिक्षण भागीदार संस्था है, कार्यक्रम का क्रियान्वयन कर रही है। कार्यक्रम में संस्था के निदेशक पंकज शर्मा और प्रशिक्षक राजीव भी उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि लगभग दो वर्ष पूर्व पर्यटन विभाग द्वारा इसी क्षेत्र में गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उस प्रशिक्षण से लाभान्वित कई प्रतिभागी इस नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण में भी शामिल हो रहे हैं, जो क्षेत्र में पर्यटन आधारित कौशल विकास की निरंतरता को दर्शाता है।

कठिन मौसम के बीच आयोजित यह प्रशिक्षण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्र के युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता, कौशल विकास और नए अवसरों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभर रहा है।

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