हर घर जल योजना दम तोड़ती दिखी, ग्रामीणों को अब भी ढोना पड़ रहा पानी

– प्रभुपाल रावत की रिपोर्ट –
रिखणीखाल, 3 मई। “हर घर जल” योजना का जमीनी सच देखना हो तो ग्राम पंचायत काण्डा (रिखणीखाल) के गजरोड़ा, तूणीचौड़ और खेड़ा तोकों का हाल काफी कुछ बयां कर देता है। करीब तीन वर्ष पहले लगभग 60 लाख रुपये की लागत से शुरू की गई यह योजना शुरूआत से ही लड़खड़ा गई और आज तक अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकी।
बताया जा रहा है कि योजना के तहत मुख्य स्रोत से वितरण टैंक तक पेयजल लाइन का कार्य ही ठीक से नहीं हो पाया। परिणामस्वरूप, तीन स्रोतों और तीन तोकों के लिए बनाई गई इस योजना के करीब 120 कनेक्शनों में से बैडवाड़ी, खेड़ा गजरोड़ा और तूणीचौड़ में आज तक पानी नहीं पहुंच पाया है।
गजरोड़ा तोक में रहने वाले 93 वर्षीय विश्वंभर दत्त ध्यानी और उनकी 87 वर्षीय पत्नी विमला देवी के घर तो आज तक नल से एक बूंद पानी भी नहीं टपकी। हैरानी की बात यह है कि इस बुजुर्ग दंपत्ति ने मुख्यमंत्री पोर्टल (1905) पर तीन बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
वृद्धावस्था और बीमारी के बावजूद यह दंपत्ति करीब 500 मीटर दूर स्थित गजरी स्रोत से छोटी बोतलों और डिब्बों में पानी लाकर किसी तरह गुजारा कर रहा है। विमला देवी पिछले वर्ष ब्रेन स्ट्रोक के कारण ठीक से चल भी नहीं पातीं। स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण इसलिए हो जाती है क्योंकि इस स्रोत के आसपास अजगर की मौजूदगी और हाथियों की आवाजाही बनी रहती है। हाल ही में हाथियों द्वारा स्रोत को नुकसान पहुंचाने से पानी भी दूषित हो गया है, जिससे संकट और गहरा गया है।
विश्वंभर दत्त बताते हैं कि उनका बेटा मजदूरी के लिए सुबह घर से निकल जाता है और शाम को लौटता है, ऐसे में दिनभर पानी की व्यवस्था करना उनके लिए बड़ी समस्या बना हुआ है।
उधर, खेड़ा और तूणीचौड़ तोकों के ग्रामीण—संदीप, लीला देवी, सुरजी देवी, सुंदरा देवी और गुड्डी देवी—का कहना है कि पाइपलाइन की सफाई नहीं होने और लाइन सही तरीके से न बिछाए जाने के कारण शुरू से ही दिक्कतें बनी हुई हैं। उन्हें रोजाना दूर-दराज से पानी ढोने को मजबूर होना पड़ रहा है।
इस संबंध में पेयजल निर्माण निगम के अधिशासी अभियंता अजय बेलवाल का कहना है कि पेयजल लाइन की जांच कर प्राक्कलन तैयार किया जाएगा और शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही जलापूर्ति बहाल करने का प्रयास किया जाएगा।
वहीं ग्राम प्रधान बिनीता ध्यानी ने कहा कि वन विभाग को हाथियों को प्रभावित क्षेत्रों से दूर करने और हाथीरोधी दीवार बनाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। साथ ही अजगर के रेस्क्यू के लिए कॉर्बेट नेशनल पार्क प्रशासन से संपर्क किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों के साथ ब्लॉक मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
