हर्षिल घाटी में नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण सम्पन्न, प्रतिभागियों को बांटे गए प्रमाण पत्र
*वाइब्रेंट विलेज पहल से सीमांत क्षेत्रों के युवाओं को मिला नया मंच*
उत्तरकाशी, 15 मई। हर्षिल घाटी स्थित बगोरी गांव में गुरुवार को 15 दिवसीय “वाइब्रेंट विलेज नेचुरलिस्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम” का समापन उत्साह और गरिमामय माहौल में हुआ। पंचायत भवन, बगोरी में आयोजित समापन एवं प्रमाण पत्र वितरण समारोह में प्रशिक्षण प्राप्त प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रभागीय वनाधिकारी डी. पी. बलूनी उपस्थित रहे, जबकि उत्तराखंड पर्यटन विभाग की अपर निदेशक पूनम चंद विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्तराखंड पर्यटन विभाग एवं पर्यटन और आतिथ्य कौशल परिषद के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हर्षिल घाटी और उत्तरकाशी जनपद के विभिन्न गांवों — मुखवा, बगोरी, धराली, वीरपुर डुंडा, झाला, सुक्की, रणारी, जसपुर, बारसाली, सिंगोट और आसपास के क्षेत्रों के 40 युवाओं ने भाग लिया।
15 दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को क्लासरूम अध्ययन के साथ-साथ व्यवहारिक और फील्ड आधारित प्रशिक्षण भी दिया गया। युवाओं को गर्तांग गली और मुखवा ट्रैक का फील्ड विजिट कराया गया, जहां उन्होंने हिमालयी जैव विविधता, स्थानीय संस्कृति, ट्रेकिंग रूट्स, इको-टूरिज्म और जिम्मेदार पर्यटन की व्यवहारिक जानकारी हासिल की।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान देश और विदेश के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को मार्गदर्शन दिया। विशेष अतिथि वक्ताओं में बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिक डॉ. शेख नवाज अली, एबरडीन यूनिवर्सिटी, स्कॉटलैंड की वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. लिडिया सैम, कच्छ विश्वविद्यालय, गुजरात की प्रोफेसर डॉ. सीमा बी. शर्मा तथा बीएसआईपी, लखनऊ के प्रोजेक्ट एसोसिएट बेंजामिन सी. सैम शामिल रहे। इसके अलावा हर्षिल घाटी, उत्तरकाशी के रेंजर आदेश यशवंत चौहान ने भी प्रतिभागियों को विशेष व्याख्यान देकर वन संरक्षण, हिमालयी पारिस्थितिकी और जिम्मेदार प्रकृति पर्यटन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने जैव विविधता संरक्षण, हिमालयी पारिस्थितिकी, वनों की कटाई से जुड़ी चुनौतियां, पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन, सतत पर्यटन, पर्यावरण जागरूकता और प्रकृति संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। कई विशेषज्ञों ने ऑनलाइन और वर्चुअल माध्यम से भी प्रतिभागियों को संबोधित किया, जिससे प्रशिक्षण को व्यापक दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव का लाभ मिला।
कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि इसमें स्थानीय महिलाओं और जनप्रतिनिधियों की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। इस अवसर पर ग्राम प्रधान बगोरी रंजीता डोगरा भी उपस्थित रहीं। प्रशिक्षण के दौरान गांवों में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार को लेकर सकारात्मक माहौल बना रहा।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डी. पी. बलूनी ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित युवा भविष्य में उत्तराखंड की पर्यटन पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
विशिष्ट अतिथि पूनम चंद ने कहा कि “वाइब्रेंट विलेज” पहल के माध्यम से सीमांत गांवों को पर्यटन और स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय युवाओं की भागीदारी इस पहल की सबसे बड़ी सफलता है।
कार्यक्रम का संचालन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का क्रियान्वयन समर्पित मीडिया सोसाइटी के पंकज शर्मा द्वारा किया गया। समारोह में स्थानीय ग्रामीण, विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं प्रशिक्षण से जुड़े कई लोग उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में प्रतिभागियों का उत्साह और ऊर्जा आकर्षण का केंद्र रही।

