Front Pageस्वास्थ्य

30 दवाएं होंगी सस्ती : मधुमेह, हृदय रोग और उच्च रक्तचाप के मरीजों को मिलेगी राहत

 सरकार ने 30 आवश्यक दवाओं पर  तय की अधिकतम कीमत

नई दिल्ली, 1 जून। केंद्र सरकार ने दीर्घकालिक (क्रॉनिक) बीमारियों के उपचार में उपयोग होने वाली 30 दवा फॉर्मूलेशनों की कीमतों पर नियंत्रण लगाते हुए उनके लिए अधिकतम खुदरा मूल्य (सीलिंग प्राइस) निर्धारित कर दिया है। इस निर्णय से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, संक्रमण, महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं तथा अंग प्रत्यारोपण के बाद उपयोग की जाने वाली दवाओं पर निर्भर लाखों मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इन दवाओं को निर्धारित अधिकतम मूल्य से अधिक कीमत पर नहीं बेचा जा सकेगा। यह मूल्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से अलग होगा। सरकार का मानना है कि इससे लंबे समय तक दवाएं लेने वाले मरीजों के उपचार खर्च में उल्लेखनीय कमी आएगी।
मधुमेह और हृदय रोग की दवाएं शामिल
नई सूची में मधुमेह के उपचार में व्यापक रूप से प्रयुक्त कई संयोजन दवाएं शामिल हैं। इनमें एम्पाग्लिफ्लोजिन, सिटाग्लिप्टिन, मेटफॉर्मिन, टेनेलिग्लिप्टिन और डापाग्लिफ्लोजिन युक्त दवाएं प्रमुख हैं। इसके अलावा एटोरवास्टेटिन, टेल्मिसार्टन, सिलनिडिपिन और मेटोप्रोलोल युक्त हृदय एवं रक्तचाप नियंत्रक दवाओं को भी मूल्य नियंत्रण के दायरे में लाया गया है।
सूची में संक्रमण के इलाज के लिए प्रयुक्त एंटीबायोटिक दवाएं, दर्द निवारक दवाएं, विटामिन सप्लीमेंट तथा महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी दवाएं भी शामिल हैं।
प्रमुख दवाओं की निर्धारित कीमतें

एनपीपीए द्वारा निर्धारित कुछ प्रमुख दवाओं की अधिकतम कीमतें इस प्रकार हैं—
एम्पाग्लिफ्लोजिन-सिटाग्लिप्टिन-मेटफॉर्मिन टैबलेट : 14.88 रुपये प्रति टैबलेट
सिटाग्लिप्टिन-ग्लिमेपिराइड-मेटफॉर्मिन टैबलेट : 11.91 रुपये प्रति टैबलेट
टेनेलिग्लिप्टिन-डापाग्लिफ्लोजिन टैबलेट : 10.17 रुपये प्रति टैबलेट
एटोरवास्टेटिन-फेनोफाइब्रेट टैबलेट : 18.46 रुपये प्रति टैबलेट
अंग प्रत्यारोपण के बाद दी जाने वाली टैक्रोलिमस कैप्सूल : 127 रुपये प्रति कैप्सूल
इसके अतिरिक्त बच्चों के लिए सेफपोडॉक्सिम-क्लैवुलानेट एंटीबायोटिक सस्पेंशन, विटामिन डी-3 ओरल सॉल्यूशन, कैल्शियम और विटामिन सप्लीमेंट तथा महिलाओं के स्वास्थ्य में प्रयुक्त नोरेथिस्टेरोन एसीटेट टैबलेट भी सूची में शामिल हैं।
मरीजों पर क्या होगा प्रभाव?
स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि मधुमेह, रक्तचाप और हृदय रोग जैसी बीमारियां जीवनभर दवा लेने की मांग करती हैं। ऐसे में कीमतों पर नियंत्रण से मरीजों का मासिक चिकित्सा व्यय कम होगा। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के परिवारों को इसका लाभ मिलने की संभावना है।
हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि विभिन्न ब्रांडों और दवाओं की शक्ति (स्ट्रेंथ) के आधार पर बाजार में कीमतों में अंतर देखने को मिल सकता है। जिन ब्रांडों की कीमतें पहले से ही निर्धारित सीमा से कम हैं, उन पर तत्काल प्रभाव सीमित हो सकता है।
60 से 90 दिनों में दिख सकता है असर
दवा व्यापारियों के संगठन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) के महासचिव राजीव सिंघल ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि संशोधित कीमतों का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में लगभग 60 से 90 दिन लग सकते हैं। उनके अनुसार बाजार में उपलब्ध स्टॉक के प्रतिस्थापन के बाद नई कीमतों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
पृष्ठभूमि
भारत में दवा मूल्य नियंत्रण व्यवस्था राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) के माध्यम से संचालित होती है, जो आवश्यक दवाओं की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम) के तहत आने वाली दवाओं की अधिकतम कीमत तय करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जीवनरक्षक और आवश्यक दवाएं आम लोगों की पहुंच में बनी रहें तथा मरीजों पर उपचार का आर्थिक बोझ कम हो।
सरकार के इस ताजा कदम को स्वास्थ्य क्षेत्र में किफायती उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे देशभर के करोड़ों मरीजों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!