ग्वालदम मिलन समारोह में गुरु-शिष्यों का भावनात्मक पुनर्मिलन, पूर्व छात्रों ने साझा किए अनुभव

–हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली, 14 जून। कुमाऊं और गढ़वाल की मध्यस्थली स्थित पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज, ग्वालदम में आयोजित पुरातन शिक्षक एवं छात्र पुनर्मिलन समारोह भावनात्मक स्मृतियों और प्रेरक अनुभवों का साक्षी बना। इस अवसर पर पूर्व शिक्षकों और पूर्व छात्र-छात्राओं ने वर्षों बाद एक-दूसरे से मिलकर पुराने दिनों को याद किया तथा अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की।
विद्यालय के सभागार में आयोजित समारोह की अध्यक्षता सेवानिवृत्त मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी एवं पूर्व प्रधानाचार्य जीवन सिंह हियांकी ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ‘मैती’ रहे।
अपने संबोधन में पद्मश्री रावत ने कहा कि शिक्षक केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि विद्यार्थियों में देशभक्ति, संस्कृति संरक्षण और समाजसेवा के संस्कार भी विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि ग्वालदम वही विद्यालय है जहां से मैती आंदोलन की शुरुआत हुई, जो आज देश ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों तक पहुंच चुका है। उन्होंने अपने पद्मश्री सम्मान का उल्लेख करते हुए कहा कि निस्वार्थ भाव से किया गया कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता और उसका फल अवश्य मिलता है।
उन्होंने पुनर्मिलन समारोह की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन गुरु-शिष्य परंपरा को मजबूत करते हैं तथा अन्य क्षेत्रों के पूर्व विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं। उन्होंने विद्यालय से जुड़े अपने अनेक संस्मरण भी साझा किए।
कार्यक्रम में पूर्व प्रवक्ता बाला दत्त शर्मा ने कहा कि वर्ष 1999 से 2002 तक ग्वालदम में सेवाएं देते हुए उन्होंने जिन विद्यार्थियों को पढ़ाया, वे आज देश और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवाएं दे रहे हैं। पूर्व शिक्षक पनोरी ने भी आयोजन की सराहना की।
पूर्व प्रवक्ता मेहर सिंह सोन ने कहा कि शिक्षण कार्य के दौरान कई बार अनुशासन के लिए कठोरता दिखानी पड़ती है, लेकिन उसका उद्देश्य विद्यार्थियों का बेहतर भविष्य सुनिश्चित करना होता है। वहीं पूर्व प्रधानाचार्य राजीव लाल रोधियाल ने वर्ष 1991 से 1997 तक के अपने कार्यकाल को याद करते हुए ग्वालदम में बिताए समय को अत्यंत सुखद बताया।
उत्तर प्रदेश निवासी एवं पूर्व प्रवक्ता अत्रि भारद्वाज ने कहा कि वर्ष 1996 से 2006 तक ग्वालदम में कार्यरत रहने के दौरान उन्हें जो सम्मान और स्नेह मिला, वह आज भी उनकी अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि जब उनके पूर्व विद्यार्थी उनसे मिलते हैं और सम्मान देते हैं तो उन्हें अत्यंत प्रसन्नता होती है।
पूर्व प्रवक्ता एस.पी. रतूड़ी ने अपनी कविताओं के माध्यम से पुराने शिक्षकों और विद्यार्थियों की स्मृतियों को जीवंत किया। उन्होंने कहा कि उनके पढ़ाए हुए छात्र आज विभिन्न उच्च पदों पर कार्यरत हैं, जो किसी भी शिक्षक के लिए गर्व का विषय है।
अध्यक्षीय संबोधन में जीवन सिंह हियांकी ने दिवंगत शिक्षकों और प्रवक्ताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा कहा कि गुरु और शिष्य का संबंध सदैव अटूट रहता है। उन्होंने कहा कि इस पुनर्मिलन समारोह में जिस आत्मीयता के साथ पूर्व शिक्षक और विद्यार्थी एकत्र हुए हैं, वह अपने आप में ऐतिहासिक है। उन्होंने इस परंपरा को भविष्य में भी निरंतर जारी रखने का आह्वान किया।
इस अवसर पर ग्वालदम के पूर्व छात्र एवं पूर्व प्रधान हरी सिंह बोरा ने सभी पूर्व शिक्षकों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
पूर्व विद्यार्थियों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में विद्यालय के पूर्व छात्र एवं वर्तमान जिला आबकारी निरीक्षक लक्ष्मण सिंह बिष्ट, मुख्य आयोजक कैलाश जोशी, भुवन जोशी, नवीन पोखरिया, रमेश बिष्ट, महावीर गड़िया, पूरन बिष्ट, पलविंदर भाकुनी, हरेंद्र परिहार, शोभित जोशी, आशु शर्मा, शांति बिष्ट सहित अनेक पूर्व विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों की कार्यशैली और शिक्षा से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन नियमित रूप से आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।
छात्राओं का भी किया गया सम्मान
पुनर्मिलन समारोह में शिक्षकों ने पूर्व छात्र-छात्राओं का फूल-मालाओं से स्वागत किया। वहीं आयोजन समिति द्वारा राजकीय इंटर कॉलेज ग्वालदम की छात्राओं को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
कविता संग्रह ‘एकलकट्टू’ का हुआ विमोचन
समारोह के दौरान ग्वालदम के पूर्व छात्र एवं वर्तमान में खटीमा (ऊधम सिंह नगर) में शिक्षक के पद पर कार्यरत नवीन पोखरिया के कविता संग्रह ‘एकलकट्टू’ का भी शिक्षकों द्वारा लोकार्पण किया गया। पुस्तक विमोचन समारोह आकर्षण का केंद्र रहा और उपस्थित लोगों ने लेखक को शुभकामनाएं दीं।
