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उत्तराखंड में भूमि प्रबंधन सुधारों के लिए व्यापक कार्ययोजना बनेगी: मुख्य सचिव

 

देहरादून, 23 जून। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय सभागार में सचिव समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में भूमि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, भूमि संबंधी प्रक्रियाओं के सरलीकरण, डिजिटलीकरण, विवाद निस्तारण तथा निवेश-अनुकूल व्यवस्था विकसित करने के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा की गई।
बैठक में भूमि मामलों के प्रभावी निस्तारण, निवेशकों के लिए भूमि उपलब्धता को सुगम बनाने, नवीन तकनीकों के समावेशन, विवाद समाधान प्रणाली को मजबूत करने, राजस्व वादों में कमी लाने तथा भूमि अभिलेखों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग एवं अद्यतन व्यवस्था विकसित करने पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही जटिल राजस्व शब्दावली एवं प्रपत्रों के सरलीकरण तथा भूमि क्रय-विक्रय सहित सभी प्रक्रियाओं को पेपरलेस, कैशलेस और फेसलेस बनाने के उपायों पर भी चर्चा हुई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि प्रबंधन एवं सुधारों से जुड़े विभाग अपने-अपने क्षेत्रों में तात्कालिक एवं दीर्घकालिक सुधारों का विस्तृत अध्ययन कर ठोस कार्ययोजना तैयार करें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे सीमित भूमि संसाधनों वाले राज्य में भूमि का वैज्ञानिक, पारदर्शी और प्रभावी प्रबंधन समय की आवश्यकता है।
उन्होंने दीर्घकालिक सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (पीआईयू) गठित करने तथा इसके कार्यों की शासन स्तर पर नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में भूमि संबंधी मामलों की निगरानी एवं सुधारात्मक ढांचा तैयार करने के लिए सचिव दिलीप जावलकर, बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम तथा एस.एन. पाण्डेय की एक टीम गठित करने का निर्णय लिया गया। यह टीम भूमि संबंधी चुनौतियों, प्रकरणों और उनके समाधान पर आधारित समग्र फ्रेमवर्क तैयार कर सुझाव प्रस्तुत करेगी।
इसके अतिरिक्त भूमि अभिलेखों के अध्ययन, अद्यतनकरण, डिजिटलीकरण और तकनीकी एकीकरण के लिए तीन सदस्यीय अधिकारियों की एक अलग समिति गठित करने के निर्देश भी दिए गए। यह समिति पुराने राजस्व रिकॉर्ड, नक्शों तथा अन्य दस्तावेजों का विस्तृत अध्ययन करेगी।
बैठक में भूमि सर्वेक्षण, बंदोबस्त, मैपिंग, पुराने अभिलेखों के डिजिटलीकरण, भूमि रिकॉर्ड के अद्यतनकरण तथा पंजीकरण, दाखिल-खारिज, नोटिस और अन्य राजस्व मामलों के समयबद्ध निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने सर्वेक्षण एवं मैपिंग कार्यों के लिए नियुक्त एजेंसियों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि भूमि प्रबंधन सुधारों का मुख्य उद्देश्य राज्य के सीमित भूमि संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना, भूमि बैंक प्रणाली को मजबूत करना, निवेशकों के लिए भूमि उपलब्धता को सरल बनाना तथा भूमि विवादों को न्यूनतम करना है। साथ ही न्यायिक एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और डिजिटल बनाकर नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
बैठक में सचिव एस.एन. पाण्डेय ने भूमि प्रबंधन सुधारों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। विभिन्न विभागों के सचिवों ने भी अपने सुझाव एवं अनुभव साझा किए। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल.एल. फैनई एवं आर. मीनाक्षी सुंदरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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