राम मंदिर चढ़ावा चोरी और कमीशनखोरी के आरोपों पर घिरा ट्रस्ट
एसआईटी ने एफआईआर की सिफारिश की
लखनऊ, 24 जून। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और कर्मचारियों की नियुक्तियों में कमीशनखोरी के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत करते हुए संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई है। साथ ही ट्रस्ट के वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज की व्यापक ऑडिट कराने का भी सुझाव दिया गया है।
मंगलवार को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी। बताया गया है कि जांच में चढ़ावे की गणना प्रक्रिया, कर्मचारियों की नियुक्तियों तथा निगरानी व्यवस्था में कई खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर कई लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
गणना प्रक्रिया में हेरफेर की आशंका
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार मंदिर में प्राप्त होने वाले चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में हेरफेर की आशंका के पर्याप्त संकेत मिले हैं। जांच में यह भी पाया गया कि सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूकें थीं, जिनका लाभ उठाकर चढ़ावे में अनियमितताएं की जा सकती थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि निगरानी व्यवस्था की कमजोरी चोरी की घटनाओं का प्रमुख कारण बनी।
जांच के दौरान मंदिर परिसर में कार्यरत कर्मचारियों, उनके परिजनों और करीबी सहयोगियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। रिपोर्ट में इस संबंध में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों का उल्लेख किया गया है।
25 से 30 लोगों की भूमिका की जांच
सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में करीब 25 से 30 लोगों की संभावित भूमिका का उल्लेख किया है। इनमें कुछ कर्मचारी, उनके रिश्तेदार और अन्य सहयोगी शामिल बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि चढ़ावे की चोरी किसी एक व्यक्ति का काम नहीं बल्कि एक संगठित गतिविधि हो सकती है।
रिपोर्ट में कुछ कर्मचारियों के करीबी रिश्तेदारों के नाम भी सामने आए हैं, जिनके विरुद्ध जल्द अलग से कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। जांच दल ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर विस्तृत विवेचना कराने की सिफारिश की है।
तीन अधिकारी सवालों के घेरे में
प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट से जुड़े तीन अधिकारियों—चंपत राय, अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव—की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में इनकी जिम्मेदारी और निगरानी की भूमिका थी। ऐसे में निगरानी में कथित विफलता को गंभीर माना गया है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ प्रत्यक्ष आपराधिक संलिप्तता के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन प्रशासनिक जवाबदेही के आधार पर उनकी भूमिका की जांच आवश्यक है। वहीं निर्माण कार्यों और वेतन भुगतान से जुड़े कुछ मामलों में गोपाल राव की भूमिका की भी जांच की गई है।
भर्ती प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
एसआईटी ने कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि नियुक्तियों में पारदर्शिता का अभाव रहा और कथित तौर पर कमीशनखोरी की शिकायतें सामने आईं। कुछ मामलों में 40 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है, जिसकी गहन जांच की सिफारिश की गई है।
विस्तृत ऑडिट की सिफारिश
एसआईटी ने ट्रस्ट के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों की व्यापक एवं स्वतंत्र ऑडिट कराने की अनुशंसा की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए चढ़ावे की गणना और लेखा-जोखा पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
जांच दल ने 45 दिनों के बजाय कम से कम 180 दिनों तक सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने, चढ़ावे की प्राप्ति और गणना का दैनिक ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार करने तथा किसी वरिष्ठ अधिकारी को मुख्य सतर्कता अधिकारी नियुक्त करने का भी सुझाव दिया
अब विस्तृत जांच की तैयारी
प्रारंभिक रिपोर्ट की एक प्रति केंद्र सरकार को भी भेजे जाने की संभावना है। बताया जा रहा है कि एसआईटी अगले कुछ सप्ताह में विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसमें सभी आरोपों, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और संभावित आपराधिक जिम्मेदारियों का विस्तार से उल्लेख होगा।
इस बीच रिपोर्ट सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। यदि रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर एफआईआर दर्ज होती है, तो यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक तथा कानूनी महत्व प्राप्त कर सकता है।
