उत्तराखंड में सीएसआर निवेश बढ़ाने की अपील, विभिन्न कंपनियों के साथ हुए एमओयू

देहरादून, 10 जुलाई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उद्योग जगत और कॉरपोरेट संस्थानों से उत्तराखंड के समग्र विकास में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से अधिक योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में कार्यरत उद्योग अपने सीएसआर फंड का अधिकतम उपयोग राज्य के विकास कार्यों में करें, ताकि अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘उत्तराखंड सीएसआर डायलॉग’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कॉरपोरेट प्रतिनिधियों, केंद्रीय उपक्रमों के अधिकारियों, सीएसआर पार्टनर्स तथा सामाजिक संस्थाओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तीर्थस्थलों पर किया गया दान विशेष महत्व रखता है। ऐसे में देवभूमि उत्तराखंड में सीएसआर के माध्यम से किया गया योगदान सामाजिक दृष्टि से और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का साझा प्रयास है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दौरान कौशल विकास, सड़क सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, ग्राम विकास और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कई प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही विभिन्न कॉरपोरेट समूहों ने राज्य में नए विकास परियोजनाओं की भी घोषणा की।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय और सीमांत राज्य होने के कारण उत्तराखंड की विकास संबंधी चुनौतियां अन्य राज्यों से अलग हैं। यहां विकास कार्यों में अधिक संसाधन और लागत की आवश्यकता होती है। इसलिए राज्य सरकार रोजगार सृजन, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए विकास को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने में कॉरपोरेट जगत का अनुभव, आधुनिक प्रबंधन और सामाजिक प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में राज्य को 3.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनमें से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतर चुके हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने के साथ औद्योगिक, लॉजिस्टिक, स्टार्टअप और एमएसएमई सहित 30 से अधिक नीतियां लागू कर उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है। स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं तथा 200 करोड़ रुपये का वेंचर फंड भी बनाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पारदर्शी शासन व्यवस्था के बिना औद्योगिक विकास संभव नहीं है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है और पिछले वर्षों में 200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इससे निवेशकों और उद्यमियों का विश्वास बढ़ा है तथा उद्योगों को स्वीकृतियों और अन्य प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का लाभ मिल रहा है।
उन्होंने विश्वास जताया कि कॉरपोरेट क्षेत्र की कार्यकुशलता और राज्य सरकार की पारदर्शी नीतियों के समन्वय से उत्तराखंड में एक सशक्त और सतत अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा, जो देश के लिए उदाहरण बनेगी।
इन कंपनियों के साथ हुए एमओयू
कार्यक्रम के दौरान किया, हुंडई, इंफोसिस फाउंडेशन, ओएनजीसी, आईटीसी, महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी लिमिटेड, आदित्य बिरला कैपिटल, फिनोलेक्स तथा पैनासोनिक सहित विभिन्न कंपनियों के साथ कौशल विकास, शिक्षा, सड़क सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और ग्राम विकास से जुड़े क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, खजान दास, विधायक उमेश शर्मा काऊ, अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव विनय शंकर पांडेय, सिडकुल के प्रबंध निदेशक डॉ. सौरभ गहरवार तथा अपर सचिव मनमोहन मैनाली सहित अनेक अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
