खेल/मनोरंजन

दून पुस्तकालय में फिल्म प्रदर्शन और कहानी वाचन की संध्या का आयोजन

देहरादून, 10 जुलाई। देहरादून स्थित रचनात्मक संस्था वर्ड्स. रिद्म्स. इमेजेज. ( डब्लू आर आई), जो कहानी कहने, फिल्म निर्माण और सहभागितापरक मीडिया के क्षेत्र में कार्यरत है, ने अपनी स्थापना के 18 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र, देहरादून में “एन ईवनिंग ऑफ स्टोरीज़” नामक एक विशेष संवाद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया।

कार्यक्रम का आरम्भ शिक्षाविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता इरा चौहान तथा लेखिका मनीषा सोभराजानी के बीच संवाद से हुआ। यह चर्चा मनीषा सोभराजानी की नवीनतम पुस्तक शैडोज ऑफ आजादी पुस्तक पर केन्द्रित रही।

इस संकलन में जम्मू, कश्मीर और लद्दाख की महिलाओं द्वारा लिखे गए आलेख शामिल हैं, जिनमें यह प्रश्न उठाया गया है कि जब बुनियादी अधिकार ही विवाद का विषय बने रहें, तब स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ क्या होता है।

मनीषा सोभराजानी ने कहा कि एक लेखक की यात्रा कई बार एकाकी होती है और ऐसे आयोजन लेखक को अपने एकांत से बाहर निकलकर नए अनुभवों, लोगों और परिवेशों से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं, जो उसकी रचनात्मक यात्रा को समृद्ध बनाते हैं।

इरा चौहान ने पुस्तक को एक अत्यंत संवेदनशील और विचारोत्तेजक संकलन बताते हुए कहा कि मनीषा ने इसे अत्यंत प्रेम और सावधानी के साथ तैयार किया है। उनके अनुसार, इसमें शामिल कथाएँ ईमानदार, मार्मिक और कठिन परिस्थितियों के बावजूद आशा से भरी हुई हैं तथा वे पाठकों के दृष्टिकोण को बदलने की क्षमता रखती हैं।

संवाद के उपरान्त निर्देशक राज बिपिन मालदे की पुरस्कार विजेता वृत्तचित्र फिल्म ‘वॉय’ का प्रदर्शन किया गया। यह फिल्म दृष्टिबाधित महिलाओं की फुटबॉल टीम की कहानी पर आधारित है और यह दर्शाती है कि किस प्रकार खेल साहस, आत्मविश्वास, अपनत्व और सामाजिक बाधाओं को तोड़ने का माध्यम बन सकता है।

साहित्य, फिल्म और संवाद को एक मंच पर लाने वाला यह आयोजन विकसित उस रचनात्मक दृष्टि का प्रतिबिम्ब रहा, जिसके केन्द्र में ऐसी कहानियाँ रही हैं जो समाज की जटिलताओं को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती हैं और उन आवाज़ों को स्थान देती हैं जो प्रायः मुख्यधारा की कथाओं से बाहर रह जाती हैं।

डब्लूआरआई की सह-संस्थापक रेम्या ससिन्द्रन ने कहा कि कहानियों का सृजन और उनका साझा किया जाना संस्था के कार्य का मूल आधार रहा है। उन्होंने कहा कि अपनी 18वीं वर्षगांठ के अवसर पर संस्था ने ऐसी कहानियों को सामने लाने का प्रयास किया, जो लोगों के बीच की दूरियों को कम करने और एक-दूसरे के अनुभवों को समझने में मदद कर सकें। उनके अनुसार, “शैडोज ऑफ आजादी” और “वॉय” दोनों ही इस दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती हैं।
लगभग दो दशकों से डब्लू आर आई कहानी कहने, फिल्म, रणनीतिक संचार और सहभागितापरक मीडिया के माध्यम से विभिन्न संगठनों और समुदायों के साथ जटिल सामाजिक मुद्दों पर कार्य करती रही है। यह वर्षगांठ आयोजन संस्था की उस निरंतर प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है, जिसके तहत वह ऐसे मंच तैयार करती रही है जहाँ कहानियाँ संवाद को जन्म देती हैं, समझ को गहरा करती हैं और अधिक समावेशी एवं जागरूक सार्वजनिक विमर्श को प्रोत्साहित करती हैं।

दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र द्वारा समय-समय पर आयोजित किए जाने वाले साहित्य, समाज, संस्कृति और समसामयिक विषयों पर आधारित विमर्शात्मक कार्यक्रमों की श्रृंखला में यह आयोजन भी एक महत्वपूर्ण कड़ी सिद्ध हुआ, जिसने प्रतिभागियों को विचार-विमर्श और संवाद का सार्थक अवसर प्रदान किया।

उल्लेखनीय है कि वर्ड्स. रिद्म्स. इमेजेज. ( डब्लू आरआई) एक पुरस्कार विजेता रचनात्मक संस्था है, जिसकी स्थापना अजय गोविन्द और रेम्या ससिन्द्रन ने की थी। संस्था कहानी कहने, रणनीतिक संचार और सहभागितापरक मीडिया के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन के लिए कार्य करती रही है तथा जटिल सामाजिक मुद्दों को सरल, मानवीय और प्रभावी ढंग से समाज के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास करती रही है।

आयोजन के अवसर पर साहित्य, संवाद और फिल्म के माध्यम से स्वतंत्रता, साहस और समाज की जटिल वास्तविकताओं पर संवेदनशील और ईमानदार चर्चा की गई। कार्यक्रम में लेखक, बुद्धिजीवी, फिल्म प्रेमी, युवा तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े अनेक नागरिक उपस्थित रहे।

 

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