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इसरो में इस्तीफों की बाढ़- कैसे लगेगी अंतरिक्ष में ऊंची छलांग?

इसरो में इस्तीफों की बढ़ती संख्या के बीच निकास नियम सख्त, एक वर्ष में करीब 120 वैज्ञानिकों ने छोड़ी नौकरी

बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में पिछले एक वर्ष के दौरान लगभग 120 वैज्ञानिकों और तकनीकी अधिकारियों के इस्तीफा देने के बाद अंतरिक्ष विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस-डीओएस) ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) और इस्तीफों से जुड़े नियमों को सख्त कर दिया है। इनमें से कई वैज्ञानिक गगनयान, एलवीएम-3, स्पैडेक्स और चंद्रयान-3 जैसी देश की महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परियोजनाओं से जुड़े हुए थे।
14 जुलाई को जारी एक आंतरिक ज्ञापन के अनुसार गगनयान और अन्य प्रमुख मिशनों से जुड़े ग्रुप-ए के वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या वीआरएस के अनुरोध अब नियमित प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किए जाएंगे। पहले इन मामलों को संबंधित इसरो केंद्रों के निदेशक स्तर पर मंजूरी मिल जाती थी, लेकिन अब सभी प्रस्ताव अंतरिक्ष विभाग मुख्यालय को उनकी संस्तुति के साथ अंतिम निर्णय के लिए भेजे जाएंगे।
ज्ञापन में कहा गया है कि हाल के समय में वैज्ञानिकों के बढ़ते इस्तीफों ने राष्ट्रीय महत्व की कई परियोजनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इसलिए केंद्र निदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि महत्वपूर्ण मिशनों के पूरा होने तक ऐसे मामलों में सीधे मंजूरी न दें और प्रत्येक आवेदन अंतिम निर्णय के लिए डीओएस को भेजें। इससे नवंबर 2020 में लागू वह व्यवस्था भी प्रभावी रूप से वापस ले ली गई है, जिसके तहत केंद्र निदेशकों को ग्रुप-ए वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था।
हालांकि अंतरिक्ष विभाग ने आधिकारिक तौर पर इस्तीफा देने वाले वैज्ञानिकों की संख्या जारी नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न स्रोतों ने पिछले एक वर्ष में यह संख्या 100 से 120 के बीच बताई है। इस्तीफा देने वालों में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के एलवीएम-3 परियोजना निदेशक विक्टर जोसेफ, यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (यूआरएससी) के स्पैडेक्स परियोजना निदेशक तथा चंद्रयान-3 मिशन से जुड़े कुछ युवा वैज्ञानिक भी शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट में चंद्रयान-3 के सिमुलेशन प्रोजेक्ट मैनेजर आदित्य रल्लापल्ली का भी उल्लेख है, जिनकी टीम ने चंद्रमा पर सफल लैंडिंग की प्रक्रिया को प्रमाणित करने के लिए एक लाख से अधिक परीक्षणों से लगभग सात टेराबाइट डेटा तैयार किया था।
इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने वैज्ञानिकों के संगठन छोड़ने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि किसी भी बड़े संगठन में कर्मचारियों का आना-जाना सामान्य प्रक्रिया है। उनका कहना है कि इसरो का उद्देश्य केवल लोगों को रोकना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएं प्रभावित न हों। यदि कोई वैज्ञानिक संगठन छोड़ता है तो उसकी जिम्मेदारी किसी अन्य सक्षम अधिकारी को सौंप दी जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार इसरो में वर्तमान में 14,600 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें यूआरएससी, जहां 1,339 कर्मचारी हैं, से लगभग 80 लोगों के जाने की बात कही गई है, जबकि इसरो के सबसे बड़े केंद्र वीएसएससी, जिसमें पिछले वित्त वर्ष के अंत तक 4,577 कर्मचारी थे, से कम से कम 20 वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दिया है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वैज्ञानिकों का पलायन इसरो के लिए पूरी तरह नया नहीं है। वर्ष 2004 से 2007 के बीच भर्ती हुए लगभग आधे नए वैज्ञानिकों ने भी नौकरी छोड़ दी थी, जबकि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 से 2024 के बीच करीब 700 कर्मचारी इसरो से इस्तीफा दे चुके हैं। दूसरी ओर, इसरो के वर्ष 2025-26 के वार्षिक प्रतिवेदन में बताया गया है कि 1,050 वैज्ञानिक, तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया उन्नत चरण में है। साथ ही हाल में किए गए कैडर पुनर्गठन के तहत 466 परियोजना पद नियमित किए गए हैं और लगभग 460 उच्च श्रेणी के नए पद सृजित किए गए हैं, ताकि संगठन की वैज्ञानिक क्षमता और मानव संसाधन को और मजबूत किया जा सके।

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