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अंतरिक्ष में अनोखा नजारा: दो जुड़वां तारों का बार-बार फटना, दे रहा है एक महा-विस्फोट (सुपरनोवा) का संकेत

चित्र 1 : अगस्त 16.83 (बाएं स्तंभ) और 30.87 (दाएं स्तंभ), 2021 के लिए सर्वोत्तम अनुकूल किए गए त्रि-आयामी 3डी मॉर्फो- काईनेमेटिक मॉडल से प्राप्त आरएस ऑफ 2021 के उत्सर्जित द्रव्य ( इजेक्टा ) की मॉडल छवियां

By- Jyoti Rawat

हमारी पृथ्वी से लगभग 5,000 प्रकाश-वर्ष दूर ‘ऑफियुकस’ (Ophiuchus) नाम के तारामंडल में खगोलशास्त्रियों ने एक बहुत ही अनोखी खगोलीय घटना देखी है। यहाँ दो तारों की एक ऐसी जोड़ी (बाइनरी सिस्टम) मौजूद है, जिसमें समय-समय पर जोरदार धमाके होते रहते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि तारों का यह अनोखा जोड़ा भविष्य में होने वाले एक बेहद दुर्लभ और विशाल ‘टाइप 1A सुपरनोवा’ (Type 1a Supernova) विस्फोट की ओर इशारा कर रहा है।

क्या है यह तारों की जोड़ी (RS Ophiuchi)?

इस अनोखी तारा प्रणाली का नाम RS Ofiuki (आरएस ऑफियुकी) है। इसमें दो तारे एक-दूसरे का चक्कर लगाते हैं:

  1. एक सफेद बौना तारा (White Dwarf): यह एक मृत तारे का बेहद सघन और गर्म अवशेष है।

  2. एक लाल विशालकाय तारा (Red Giant): यह आकार में बहुत बड़ा और पुराना तारा है।

इस जोड़ी में बड़ा लाल तारा लगातार अपने छोटे लेकिन अत्यधिक शक्तिशाली ‘सफेद बौने’ साथी को हाइड्रोजन गैस रूपी ‘ईंधन’ सप्लाई करता रहता है।

धमाका कैसे होता है?

जैसे-जैसे सफेद बौने तारे की सतह पर यह ईंधन (हाइड्रोजन) जमा होता जाता है, वहां तापमान और दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है। जब दबाव बर्दाश्त से बाहर हो जाता है, तो सतह पर एक भयंकर थर्मोन्यूक्लियर विस्फोट (Thermonuclear Explosion) होता है—बिल्कुल किसी विशाल परमाणु बम की तरह!

इस धमाके को ‘नोवा’ (Nova) कहा जाता है। धमाके के बाद यह तारा अचानक से बहुत ज्यादा चमकदार हो जाता है और कुछ हफ्तों में धीरे-धीरे शांत हो जाता है।

  • इतिहास और नवीनतम विस्फोट: आरएस ऑफियुकी में 1985 के बाद से कई बार ऐसे विस्फोट देखे गए हैं। 8 अगस्त 2021 को इसमें फिर से एक बड़ा धमाका हुआ, जो इतना चमकदार था कि इसे बिना किसी दूरबीन के, नंगी आंखों से भी देखा जा सकता था।

भारत के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान ‘एस. एन. बोस राष्ट्रीय मौलिक विज्ञान केंद्र’ (Kolkata) की एक शोध टीम ने इस 2021 के विस्फोट का गहराई से अध्ययन किया।

मुख्य वैज्ञानिक डॉ. रामकृष्ण दास और उनकी टीम ने डेटा का विश्लेषण करके कई महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले:

  • वजन बढ़ रहा है: हर बार फटने के बाद भी, सफेद बौना तारा पूरी तरह नष्ट नहीं होता, बल्कि हर धमाके के साथ उत्सर्जित मलबे का कुछ हिस्सा खोने के बावजूद इसका कुल वजन (द्रव्यमान) धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है।

  • चंद्रशेखर सीमा के करीब: भौतिकी के नियम (चंद्रशेखर सीमा) के अनुसार, यदि किसी सफेद बौने तारे का द्रव्यमान हमारे सूर्य के द्रव्यमान से 1.4 गुना अधिक हो जाता है, तो वह अपने ही गुरुत्वाकर्षण के भारी दबाव को झेल नहीं पाता और पूरी तरह से नष्ट होकर एक महा-विस्फोट में बदल जाता है। आरएस ऑफियुकी का वजन फिलहाल सूर्य से 1.2 से 1.38 गुना के करीब पहुंच चुका है—यानी यह तबाही की कगार पर है!

  • रासायनिक बदलाव: वैज्ञानिकों ने पाया कि इस विस्फोट से निकलने वाले मलबे (इजेक्टा) में हीलियम, नाइट्रोजन और लोहे (आयरन) जैसे भारी तत्वों की मात्रा में भारी बढ़ोतरी हुई है, जो बहुत तेज परमाणु संलयन (फ्यूजन) प्रतिक्रिया को दर्शाती है।

यह खोज इतनी खास क्यों है?

हमारी गैलेक्सी (आकाशगंगा/मिल्की वे) में ऐसे केवल 10 आवर्ती (बार-बार फटने वाले) नोवा तारे ही ज्ञात हैं। खास बात यह है कि सन 1988 के बाद से हमारी आकाशगंगा में कोई भी ‘सुपरनोवा’ विस्फोट नहीं देखा गया है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि आरएस ऑफियुकी तारा प्रणाली में होने वाला अगला बड़ा विस्फोट हमें ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक—’टाइप 1A सुपरनोवा’ की सटीक प्रक्रिया को समझने का एक दुर्लभ और ऐतिहासिक अवसर प्रदान करेगा।

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