सबसे सेहतमंद मेवा कौन सा? बादाम से अखरोट तक, जानिए किसमें क्या खास
Despite fears of high calories (~180 per ounce), nuts are nutritional superfoods essential to healthy diets. They deliver a powerful triad of plant-based protein, heart-healthy unsaturated fats, and dietary fiber. Peanuts lead in total protein, while pistachios provide rare complete plant protein. Nutritionally, natural nut butters equal whole nuts, whereas strained nut milks lose essential fiber and protein. Dry roasting preserves their dietary integrity, though added salt requires moderation. Ultimately, no single nut reigns supreme. Nutritionists recommend a diverse mix: walnuts for brain-boosting Omega-3s, almonds for Vitamin E, and pistachios for antioxidants, ensuring a comprehensive spectrum of health benefits.

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बादाम, अखरोट, पिस्ता, काजू या मूंगफली—इनमें सबसे सेहतमंद कौन है? इस सवाल का सीधा जवाब शायद किसी एक मेवे का नाम नहीं, बल्कि इनका सही मात्रा और विविधता के साथ सेवन है। मेवे कैलोरी और वसा से भरपूर जरूर होते हैं, लेकिन इसी आधार पर उन्हें वजन बढ़ाने वाला भोजन मान लेना सही नहीं है। इनमें प्रोटीन, आहार रेशा, असंतृप्त वसा, विटामिन, खनिज और अनेक जैव सक्रिय तत्व पाए जाते हैं। यही कारण है कि भूमध्यसागरीय, डैश और माइंड जैसे स्वास्थ्यवर्धक आहारों में मेवों को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है।
छोटे आकार में पोषण का बड़ा खजाना
मेवों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें तीन महत्वपूर्ण पोषक तत्व एक साथ मिलते हैं—पौधों से मिलने वाला प्रोटीन, असंतृप्त वसा और आहार रेशा। इनके अलावा अलग-अलग मेवों में विटामिन ई, मैग्नीशियम, तांबा, मैंगनीज, सेलेनियम और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व भी मिलते हैं।
प्रोटीन, वसा और रेशे का यह मेल पेट भरा महसूस कराने में मदद कर सकता है। यही वजह है कि अधिक कैलोरी होने के बावजूद उचित मात्रा में खाए गए मेवों को स्वस्थ आहार का हिस्सा माना जाता है।
मेवों और बीजों पर किए गए एक बड़े वैज्ञानिक विश्लेषण में करीब 18.9 लाख लोगों से जुड़े अध्ययनों को शामिल किया गया। इसमें अधिक मेवे और बीज खाने वालों में हृदय संबंधी रोगों का जोखिम कम पाए जाने का संबंध सामने आया। लगभग 30 ग्राम प्रतिदिन सेवन पर भी ऐसा संबंध दिखाई दिया। हालांकि ऐसे अध्ययनों से यह सिद्ध नहीं होता कि लाभ का कारण अकेले मेवे ही थे। नियंत्रित परीक्षणों के विश्लेषण में भी मेवों के सेवन से एलडीएल यानी हानिकारक कोलेस्ट्रॉल सहित रक्त में वसा के कुछ संकेतकों में सुधार पाया गया है।

क्या हर ‘नट’ वास्तव में नट है?
रसोई की भाषा और वनस्पति विज्ञान की भाषा यहां अलग-अलग हैं। हेजलनट और चेस्टनट जैसे कुछ मेवे वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से वास्तविक नट हैं, जबकि बादाम, अखरोट, काजू और पिस्ता वास्तव में फलों के बीज हैं। मूंगफली तो नट है ही नहीं; वह मटर, चना और दाल की तरह फलियों के परिवार की सदस्य है।
पोषण की दृष्टि से यह वर्गीकरण बहुत मायने नहीं रखता। मूंगफली सस्ती होने के बावजूद प्रोटीन और असंतृप्त वसा का अच्छा स्रोत है और स्वस्थ आहार में महंगे मेवों का उपयोगी विकल्प बन सकती है।
किस मेवे में सबसे ज्यादा प्रोटीन?
लगभग 28 ग्राम की मात्रा की तुलना करें तो मूंगफली करीब 7 ग्राम प्रोटीन के साथ प्रमुख विकल्पों में है। बादाम में करीब 6 ग्राम और पिस्ते में भी लगभग इतनी ही मात्रा में प्रोटीन मिलता है।पिस्ते को लेकर अक्सर दावा किया जाता है कि वह ‘संपूर्ण प्रोटीन’ है। इसे थोड़ा सावधानी से समझना चाहिए। शोध में कच्चे और भुने पिस्ते को अच्छी गुणवत्ता वाला पौध-आधारित प्रोटीन पाया गया है, लेकिन उसके अमीनो अम्लों की गुणवत्ता पशु-आधारित उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन के समान नहीं है और लाइसिन उसका सीमित अमीनो अम्ल पाया गया। इसलिए शाकाहारी भोजन में केवल पिस्ते पर निर्भर रहने के बजाय दालें, अनाज, सोया, दूध-दही और दूसरे प्रोटीन स्रोतों में विविधता बेहतर है।

वसा से डरें नहीं, उसका प्रकार समझें
मेवों में कैलोरी अधिक होने की एक वजह उनमें वसा की अच्छी मात्रा है। लेकिन अधिकांश मेवों में वसा का बड़ा हिस्सा असंतृप्त होता है। अखरोट खास है क्योंकि उसमें अल्फा-लिनोलेनिक अम्ल यानी एएलए नामक पौध-आधारित ओमेगा-3 वसा मिलती है। बादाम, पिस्ता और काजू में मोनोअनसेचुरेटेड वसा की अच्छी मात्रा होती है।
इसी कारण सवाल केवल यह नहीं होना चाहिए कि भोजन में कितनी वसा है, बल्कि यह भी कि वसा किस प्रकार की है और वह किस भोजन की जगह ली जा रही है। चिप्स, नमकीन, बिस्कुट या अत्यधिक प्रसंस्कृत नाश्ते की जगह सीमित मात्रा में बिना नमक के मेवे चुनना अधिक उपयोगी हो सकता है।

कैलोरी अधिक, फिर भी वजन का दुश्मन जरूरी नहीं
एक छोटी मुट्ठी यानी करीब 28 से 30 ग्राम मेवों में सामान्यतः 160 से 200 कैलोरी हो सकती हैं। इसलिए इन्हें असीमित मात्रा में खाना ठीक नहीं है। लेकिन यह धारणा भी सही नहीं कि मेवे खाते ही वजन बढ़ेगा।
इनमें मौजूद प्रोटीन और रेशा तृप्ति बढ़ाते हैं। साबुत मेवों की कोशिकीय संरचना के कारण उनमें मौजूद सारी वसा पाचन के दौरान शरीर द्वारा अवशोषित भी नहीं हो पाती। महत्वपूर्ण बात यह है कि मेवों को मौजूदा भोजन के ऊपर अतिरिक्त कैलोरी की तरह जोड़ने के बजाय कम पौष्टिक नाश्ते की जगह लिया जाए।

साबुत मेवा, नट बटर या बादाम का दूध?
इन तीनों को समान समझना ठीक नहीं है। साबुत मेवे सामान्यतः सबसे सरल विकल्प हैं क्योंकि उनमें प्राकृतिक रेशा, वसा और प्रोटीन साथ रहते हैं।
ऐसा पीनट या बादाम बटर जिसमें अतिरिक्त चीनी, अधिक नमक या अनावश्यक तेल न मिलाया गया हो, भी अच्छा विकल्प हो सकता है। खरीदते समय सामग्री सूची देखना उपयोगी है।
बादाम या दूसरे मेवों से बने पेय अलग मामला हैं। इनमें पानी की मात्रा काफी अधिक होती है और उनका प्रोटीन साबुत मेवे से बहुत कम हो सकता है। हालांकि कैल्शियम और विटामिन से फोर्टिफाइड उत्पाद कुछ पोषक तत्व उपलब्ध करा सकते हैं। इसलिए किसी ‘नट मिल्क’ को केवल नाम के आधार पर गाय के दूध या साबुत मेवे के पोषण के बराबर नहीं मानना चाहिए।
कच्चे अच्छे या भुने हुए?
कच्चे और सूखे भुने, दोनों तरह के मेवे स्वस्थ आहार का हिस्सा हो सकते हैं। सामान्य भुनाई से उनका मूल पोषण समाप्त नहीं हो जाता। असली सावधानी नमक, चीनी और अतिरिक्त तेल को लेकर होनी चाहिए। शहद, चीनी, चॉकलेट या बहुत अधिक नमक की परत वाले मेवों को सामान्य साबुत मेवों जैसा नहीं माना जा सकता।
उच्च रक्तचाप वाले लोगों के लिए बिना नमक या कम नमक वाले मेवे बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
फिर किस मेवे में क्या खास है?
अखरोट: इसकी सबसे बड़ी खासियत पौध-आधारित ओमेगा-3 वसा एएलए है। हृदय के अनुकूल आहार में यह उपयोगी विकल्प है।
बादाम: विटामिन ई, मैग्नीशियम, रेशा और प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। कैल्शियम भी कई दूसरे मेवों की तुलना में अधिक मिलता है।
पिस्ता: प्रोटीन और रेशे के साथ ल्यूटिन और ज़ेक्सैन्थिन जैसे कैरोटिनॉयड भी देता है। ये पदार्थ आंखों के ऊतकों में पाए जाते हैं।
मूंगफली: कम कीमत में अच्छा प्रोटीन और असंतृप्त वसा उपलब्ध कराने के कारण भारतीय परिस्थितियों में बेहद व्यावहारिक विकल्प है। स्वास्थ्य लाभ के लिए महंगे आयातित मेवे ही जरूरी नहीं हैं।
काजू: तांबा, मैग्नीशियम और कुछ मात्रा में जिंक तथा आयरन उपलब्ध कराता है। लेकिन इसे किसी बीमारी की रोकथाम या प्रतिरक्षा बढ़ाने वाली औषधि मानना उचित नहीं है।
ब्राजील नट: सेलेनियम का असाधारण रूप से समृद्ध स्रोत है। लेकिन इसकी यही खूबी सावधानी भी मांगती है। अमेरिकी राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के अनुसार एक ब्राजील नट में लगभग 68 से 91 माइक्रोग्राम सेलेनियम हो सकता है। अधिक मात्रा नियमित रूप से खाने पर सुरक्षित ऊपरी सीमा पार हो सकती है। इसलिए इसे मुट्ठी भर खाने वाला मेवा नहीं समझना चाहिए; एक-दो ही पर्याप्त हो सकते हैं। अत्यधिक सेलेनियम बाल और नाखून झड़ने, मतली और तंत्रिका संबंधी समस्याओं तक का कारण बन सकता है।

तो सबसे सेहतमंद मेवा कौन सा?
इस सवाल का वैज्ञानिक रूप से बेहतर जवाब है—वह मेवा जो आपकी जरूरत के अनुरूप हो और उचित मात्रा में खाया जाए।
ओमेगा-3 के लिए अखरोट उपयोगी है, विटामिन ई के लिए बादाम, पौध-आधारित प्रोटीन के लिए मूंगफली और पिस्ता अच्छे विकल्प हैं, जबकि सेलेनियम के लिए ब्राजील नट असाधारण स्रोत है। इसलिए किसी एक को ‘सुपरफूड’ घोषित करने के बजाय विविधता अधिक समझदारी है।

आम तौर पर करीब 28 से 30 ग्राम यानी एक छोटी मुट्ठी मिश्रित, बिना नमक और बिना चीनी वाले मेवे सुविधाजनक दैनिक मात्रा हो सकती है। वैज्ञानिक अध्ययनों में भी लगभग 30 ग्राम प्रतिदिन सेवन का संबंध बेहतर हृदय स्वास्थ्य से देखा गया है। इसे कोई जादुई मात्रा या इलाज नहीं समझना चाहिए—पूरा आहार, शारीरिक गतिविधि, नींद और जीवनशैली भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
और हां, मेवों से एलर्जी वाले लोगों के लिए यही पौष्टिक खाद्य गंभीर प्रतिक्रिया का कारण बन सकता है। ऐसे लोगों को संबंधित मेवे से पूरी तरह बचना और चिकित्सकीय सलाह का पालन करना चाहिए।
अंततः सेहत की दृष्टि से बादाम बनाम अखरोट या पिस्ता बनाम मूंगफली की प्रतियोगिता बनाने की जरूरत नहीं है। बेहतर तरीका है कि अलग-अलग मेवों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन का हिस्सा बनाया जाए। चिप्स, बिस्कुट या अत्यधिक प्रसंस्कृत नमकीन की जगह एक छोटी मुट्ठी मेवे चुनना मामूली बदलाव दिख सकता है, लेकिन लंबे समय में यही छोटे बदलाव स्वस्थ भोजन की आदत बनाते हैं।
