बड़ी जात और नंदा राजजात को लेकर दो घाटियों में मतभेद, परंपरा और आयोजन पर छिड़ी बहस
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वाण ग्राम सभा ने बड़ी जात के आयोजन पर उठाए सवाल, डीएम को सौंपा ज्ञापन
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सिद्धपीठ कुरुड़ की बड़ी जात की तैयारियां जारी, नंदा राजजात अगले वर्ष होगी आयोजित

–महिपाल गुसाईं-
गोपेश्वर, 2 अगस्त। भगवती नंदा देवी की बड़ी जात और नंदा देवी राजजात के आयोजन को लेकर चमोली जिले की दशोली और बधाण घाटियों के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं। जहां बधाण क्षेत्र की नंदा राजजात समिति ने अधिक मास के कारण वर्ष 2026 में प्रस्तावित राजजात को स्थगित कर वर्ष 2027 में आयोजित करने का निर्णय लिया है, वहीं दशोली घाटी स्थित सिद्धपीठ कुरुड़ की बड़ी जात आयोजन समिति ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 5 से 30 सितंबर 2026 तक यात्रा आयोजित करने की तैयारियां तेज कर दी हैं।
दोनों पक्ष यात्रा मार्ग पर मूलभूत सुविधाओं की मांग शासन और प्रशासन के समक्ष रख चुके हैं। इसी बीच शासन स्तर पर भी बड़ी जात की तैयारियों को लेकर पहल शुरू हो गई है। पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने गढ़वाल आयुक्त को पत्र भेजकर बड़ी जात के सफल एवं सुरक्षित आयोजन के लिए मार्ग, पेयजल, स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह तथा पदाधिकारियों ने भी काफी पहले प्रशासन से यात्रा मार्ग को व्यवस्थित करने का अनुरोध किया था।
दूसरी ओर, ग्राम पंचायत वाण ने मंगलवार को जिलाधिकारी गौरव कुमार को ज्ञापन सौंपकर वर्ष 2027 में प्रस्तावित नंदा देवी राजजात की तैयारियां समय रहते शुरू करने की मांग की। ज्ञापन में मोटर मार्ग, पार्किंग, पेयजल, शौचालय, पैदल मार्ग, पुलिया, आवास, विश्राम स्थल और टेंट कॉलोनी जैसी सुविधाएं विकसित करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि वाण गांव नंदा देवी राजजात का प्रमुख पड़ाव और जंक्शन है, जहां गढ़वाल और कुमाऊं की 500 से अधिक देव डोलियां एकत्रित होती हैं। इसलिए सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी की जानी चाहिए। साथ ही ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि बड़ी जात के नाम पर कुछ लोग धार्मिक आयोजन को प्रतिष्ठा का विषय बनाकर भ्रम और अशांति का वातावरण पैदा कर रहे हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि इस आयोजन में 14 सयाणों, 12 थोकी ब्राह्मणों, हक-हकूकधारियों तथा परंपरागत पुजारियों की भागीदारी नहीं है, इसलिए इसकी वैधता पर प्रश्न उठते हैं। उन्होंने प्रशासन से इस मामले का संज्ञान लेने की भी मांग की है।
उल्लेखनीय है कि नौटी से निकलने वाली विश्वप्रसिद्ध नंदा देवी राजजात सामान्यतः अगस्त माह में आयोजित होती रही है। इस वर्ष अधिक मास और सितंबर में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्रतिकूल मौसम की आशंका को देखते हुए राजजात को अगले वर्ष के लिए स्थगित किया गया है। वहीं सिद्धपीठ कुरुड़ की बड़ी जात समिति का कहना है कि यात्रा की तिथियां धार्मिक मुहूर्त के अनुसार तय की गई हैं और कार्यक्रम पूर्व निर्धारित रहेगा।
फिलहाल दोनों आयोजन समितियां अपने-अपने निर्णय पर कायम हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने परंपराओं का सम्मान बनाए रखते हुए दोनों पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करने और व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की चुनौती खड़ी हो गई है। धार्मिक आस्था से जुड़े इस विषय पर आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
