मानसून की विदाई शुरू, उत्तराखंड से सितंबर के अंतिम सप्ताह में लौटने के संकेत

-उषा रावत/ आदित्य रावत
नई दिल्ली/देहरादून, 20 सितम्बर। देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का दौर शुरू हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 19 सितम्बर को दक्षिण-पश्चिम मानसून पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापस हो गया। मानसून वापसी की रेखा 27 डिग्री उत्तरी अक्षांश/68 डिग्री पूर्वी देशांतर से रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी, खाजूवाला होते हुए 29.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश/71.5 डिग्री पूर्वी देशांतर तक गुजर रही है। इसके साथ ही चार महीने के बरसाती मौसम की विदाई की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।
मौसम विभाग के ताजा विश्लेषण के अनुसार राजस्थान के कुछ और हिस्सों तथा पंजाब और गुजरात के कुछ भागों से भी अगले तीन-चार दिनों के दौरान मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। इसका अर्थ है कि मानसून की वापसी की रेखा अब धीरे-धीरे उत्तर और पूर्व की ओर बढ़ेगी। हालांकि उत्तराखंड से मानसून की वापसी की तारीख अभी मौसम विभाग ने घोषित नहीं की है, लेकिन सामान्य समय-सारिणी और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए राज्य में सितम्बर के अंतिम सप्ताह में मानसून की विदाई की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना बनती है।
उत्तराखंड से कब लौट सकता है मानसून?
उत्तराखंड के लिए यह सवाल खासा महत्वपूर्ण है, क्योंकि मानसून की वापसी राजस्थान की तरह एक साथ पूरे राज्य से नहीं होती। सामान्यतः पश्चिमी और मैदानी हिस्सों से इसकी वापसी पहले और पूर्वी तथा पर्वतीय हिस्सों से बाद में होती है। मौसम विभाग की संशोधित सामान्य तिथियों के अनुसार रुड़की क्षेत्र में मानसून वापसी की सामान्य तारीख करीब 25 सितम्बर और देहरादून में करीब 27 सितम्बर है। राज्य के सभी हिस्सों से मानसून की सामान्य वापसी लगभग 30 सितम्बर तक मानी जाती है।
पिछले वर्ष 2025 का उदाहरण भी इस लिहाज से महत्वपूर्ण है। तब उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून वापसी 14 सितम्बर को शुरू हुई थी। उत्तराखंड के कुछ हिस्सों से मानसून 24 सितम्बर को वापस हुआ और 26 सितम्बर 2025 को पूरे उत्तराखंड से इसकी विदाई घोषित कर दी गई थी। यह राज्य की 30 सितम्बर की सामान्य वापसी की तारीख से करीब चार दिन पहले था।
इस वर्ष वापसी पश्चिमी राजस्थान से 19 सितम्बर को शुरू हुई है। इसलिए यदि आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत में शुष्क मौसम तेजी से फैलता है और कोई नया प्रभावी मौसमी तंत्र उत्तराखंड में वर्षा नहीं कराता है तो लगभग 25 से 30 सितम्बर के बीच उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों से मानसून की वापसी आगे बढ़ सकती है। हालांकि इसे अभी पूर्वानुमान के बजाय सामान्य तिथियों और मौजूदा परिस्थितियों पर आधारित संभावना ही माना जाना चाहिए। राज्य से मानसून की वास्तविक वापसी की घोषणा मौसम विभाग निर्धारित मौसम संबंधी मानदंड पूरे होने पर ही करेगा।
केवल बारिश रुकना मानसून की विदाई नहीं।
मानसून की वापसी घोषित करने के लिए केवल दो-चार दिन बारिश नहीं होना पर्याप्त नहीं है। मौसम विभाग इसके लिए तीन प्रमुख स्थितियों पर नजर रखता है। संबंधित क्षेत्र में लगातार पांच दिन तक वर्षा गतिविधि समाप्त होनी चाहिए, निचले क्षोभमंडल में प्रतिचक्रवाती परिसंचरण स्थापित होना चाहिए और उपग्रह चित्रों तथा दूसरे मौसम संबंधी आंकड़ों में वातावरण की नमी में उल्लेखनीय कमी दिखाई देनी चाहिए। आगे की वापसी में भी लगातार शुष्क मौसम, नमी में कमी और मानसून वापसी वाले क्षेत्रों की भौगोलिक निरंतरता देखी जाती है।
इसी कारण किसी क्षेत्र में कुछ दिनों तक धूप खिलने या बारिश बंद होने को अपने आप मानसून की वापसी नहीं माना जा सकता। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी हवाओं की परस्पर क्रिया भी वर्षा को प्रभावित कर सकती है। मौसम विभाग के अध्ययन में भी उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून वापसी को अपेक्षाकृत जटिल माना गया है।
बंगाल की खाड़ी का नया तंत्र रोक सकता है वापसी की रफ्तार
मानसून की वापसी शुरू होने के बावजूद देश के बड़े हिस्से में बारिश का दौर अभी समाप्त नहीं होने जा रहा है। 19 सितम्बर के मौसम विश्लेषण में उत्तर-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना बताई गई है। इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए 21 सितम्बर के आसपास पश्चिम-मध्य तथा उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में अवदाब और 22 सितम्बर तक गहरे अवदाब में बदलने की संभावना जताई गई है। इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा-उत्तरी आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ने के संकेत हैं।
इस मौसमी तंत्र की गतिविधि महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि बंगाल की खाड़ी में बनने वाले सितंबर के निम्न दबाव और अवदाब मध्य तथा उत्तरी भारत में नमी पहुंचाकर मानसून वापसी की गति को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए राजस्थान से वापसी शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि उत्तराखंड सहित पूरे उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून अगले कुछ दिनों में ही विदा हो जाएगा।
मौसम विभाग ने मानसून की सामान्य वापसी की तिथियों को पुराने आंकड़ों के स्थान पर 1971 से 2019 के आंकड़ों के आधार पर संशोधित किया है। इस अध्ययन में पाया गया कि उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में मानसून पुराने सामान्य समय की तुलना में लगभग सात से 14 दिन अधिक ठहरने लगा है। नई सामान्य तिथियों का इस्तेमाल 2020 से किया जा रहा है।
उत्तराखंड के लिहाज से फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण अवधि 25 से 30 सितम्बर की दिखाई देती है। यदि अगले कुछ दिनों में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ती हैं, वातावरण की नमी घटती है और प्रतिचक्रवाती परिसंचरण उत्तर-पश्चिम भारत से आगे बढ़ता है तो सितंबर के अंतिम सप्ताह में पहले उत्तराखंड के पश्चिमी हिस्सों और उसके बाद शेष राज्य से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई हो सकती है। लेकिन बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहा नया मौसमी तंत्र इस प्रक्रिया की रफ्तार तय करने वाले प्रमुख कारकों में रहेगा।
