आपदा प्रबंधन राज्यों की जिम्मेदारी, उत्तराखंड-हिमाचल के लिए केंद्र की कई विशेष योजनाएं

नई दिल्ली, 5 अगस्त। केंद्र सरकार ने कहा है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होती है। राहत वितरण और तत्काल सहायता का कार्य राज्य सरकारें अपने राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) तथा अन्य उपलब्ध संसाधनों से करती हैं, जबकि केंद्र सरकार आवश्यक वित्तीय और लॉजिस्टिक सहायता देकर राज्यों के प्रयासों का पूरक समर्थन करती है। गंभीर प्राकृतिक आपदा की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के तहत राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने बताया कि गृह मंत्रालय देशभर में आपदाओं से हुई जनहानि और संपत्ति के नुकसान का अलग से केंद्रीय रिकॉर्ड नहीं रखता। यह जानकारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर संकलित की जाती है।
सरकार के अनुसार, पिछले तीन वर्षों (2023-24 से 2025-26) के दौरान जल-मौसम संबंधी आपदाओं में हिमाचल प्रदेश में 1,159 लोगों तथा उत्तराखंड में 371 लोगों की मौत दर्ज की गई। इसी अवधि में हिमाचल प्रदेश में 27,406 मकान और झोपड़ियां तथा उत्तराखंड में 13,836 मकान और झोपड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं।
केंद्र सरकार ने कहा कि हिमालयी राज्यों में आपदा जोखिम कम करने और आपदा-रोधी क्षमता बढ़ाने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं। इनमें भूस्खलन, बादल फटना, हिमनदीय झील विस्फोट बाढ़ (जीएलओएफ), वनाग्नि और भूकंप जैसी आपदाओं से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के दिशा-निर्देश शामिल हैं।
सरकार ने राष्ट्रीय भूस्खलन जोखिम न्यूनीकरण परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए 125 करोड़ रुपये के केंद्रीय अंश को मंजूरी दी है। वहीं राष्ट्रीय जीएलओएफ जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में हिमनदीय झीलों से उत्पन्न जोखिम कम करने के लिए संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक उपाय किए जा रहे हैं।
इसके अलावा वनाग्नि जोखिम प्रबंधन, पंचायत स्तर पर समुदाय आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा ‘सचेत’ नामक एकीकृत चेतावनी प्रणाली के माध्यम से मौसम, बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के लिए समय पर चेतावनी जारी करने की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। सरकार ने कहा कि आपदा मित्र और युवा आपदा मित्र जैसी योजनाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
वित्तीय सहायता के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में उत्तराखंड को एसडीआरएफ के तहत 1,012 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, जबकि एनडीआरएफ से 291.15 करोड़ रुपये जारी किए गए। इसी अवधि में हिमाचल प्रदेश को एसडीआरएफ के तहत 441.60 करोड़ रुपये का आवंटन तथा एनडीआरएफ से 1,890.09 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई।
Note- All photos are old and used from file.
