पीपलकोटी टनल हादसा: मलबे और पानी के सैलाब में फंसे 28 मजदूर, नौ की मौत
मायापुर (पीपलकोटी)/गोपेश्वर, 13 अगस्त। चमोली जिले में पीपलकोटी के मायापुर क्षेत्र में गुरुवार शाम निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टनल में अचानक भारी मलबा और पानी घुसने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे के समय टनल के भीतर काम कर रहे 28 मजदूर मलबे और पानी के बीच फंस गए। देर रात तक चले बचाव अभियान में 22 मजदूरों को बाहर निकाल लिया गया। इनमें नौ मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 13 घायल मजदूरों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया। छह मजदूरों की तलाश देर रात तक जारी थी।
हादसा इतना अचानक हुआ कि टनल के भीतर काम कर रहे श्रमिकों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। बाहर निकाले गए घायल मजदूरों ने बताया कि पहले अचानक मलबा और पानी तेजी से टनल के भीतर आया। कुछ ही देर में रास्ता बंद हो गया और टनल के अंदर पानी तथा मलबे का दबाव बढ़ता चला गया। हादसे के बाद टनल के भीतर ऑक्सीजन का स्तर कम होने से वहां फंसे श्रमिकों को सांस लेने में भी परेशानी होने लगी। बचाव दलों को पानी, मलबे और अंधेरे के बीच लगातार काम करना पड़ा।
सरिया वेल्डिंग के दौरान आया मलबा-पानी
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार टनल के भीतर निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान अचानक तेज आवाज के साथ पहाड़ी हिस्से में भू-धंसाव हुआ और बड़ी मात्रा में मलबा तथा पानी टनल में आ गया। समाचार रिपोर्टों में बताया गया है कि उस समय श्रमिक निर्माण कार्य में लगे थे। पानी और मलबे का प्रवाह इतना तेज था कि टनल का एक हिस्सा देखते ही देखते इसकी चपेट में आ गया।
हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें मौके पर पहुंचीं। इसके बाद एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना और आईटीबीपी के जवानों को भी राहत एवं बचाव अभियान में लगाया गया। टनल के भीतर भारी पानी और मलबा होने के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। कई स्थानों पर बचाव दलों को आगे बढ़ने के लिए मलबा हटाना पड़ा और पानी की निकासी का प्रयास करना पड़ा।
22 मजदूर निकाले, 13 अस्पताल पहुंचे
राहत एवं बचाव अभियान के दौरान एक-एक कर मजदूरों को टनल से बाहर निकाला गया। रात तक 22 मजदूर बाहर निकाले जा चुके थे। इनमें नौ को मृत घोषित किया गया, जबकि 13 घायल मजदूरों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई गई। जिला अस्पताल गोपेश्वर और पीपलकोटी के अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था सक्रिय की गई।
बाहर निकाले गए मजदूरों के अनुसार हादसे के बाद टनल के भीतर चारों तरफ पानी और मलबा फैल गया था। अचानक हुए घटनाक्रम में कई श्रमिकों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। ऑक्सीजन कम होने के कारण सांस लेने में परेशानी बढ़ने लगी। बचाव दलों ने अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए लगातार अभियान चलाया।
देर रात तक छह मजदूरों का पता नहीं चल सका था। उनके लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा। प्रशासन ने टनल के भीतर बचाव दलों की आवाजाही और उपलब्ध ऑक्सीजन समेत अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया।
सीएम धामी ने संभाला मोर्चा
हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देर रात आपदा परिचालन केंद्र पहुंचकर बचाव एवं राहत अभियान की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से टनल में फंसे श्रमिकों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकालने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन और बचाव एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा तथा प्रभावित श्रमिकों के परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने अस्पतालों में भर्ती घायल श्रमिकों के उपचार की भी जानकारी ली और अधिकारियों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को कहा। प्रशासन की ओर से राहत कार्य में लगे सभी विभागों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर अभियान तेज किया गया।
आठ महीने में दूसरा बड़ा हादसा, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
पीपलकोटी परियोजना में करीब आठ महीने के भीतर यह दूसरा गंभीर हादसा है। इससे निर्माणाधीन परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
इससे पहले 30 दिसंबर 2025 को इसी विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टनल के भीतर दो लोको ट्रेनें आपस में टकरा गई थीं। उस समय श्रमिकों और अधिकारियों को ले जा रही ट्रेन तथा निर्माण सामग्री ले जा रही ट्रेन की टक्कर में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। अधिकारियों के अनुसार उस हादसे में 109 लोग ट्रेन में सवार थे और करीब 60 लोग घायल हुए थे।
पिछले हादसे के बाद भी परियोजना में सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा हुई थी। अब दोबारा टनल में हुए हादसे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पहाड़ी और भूगर्भीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में सुरंग निर्माण के दौरान प्राकृतिक जोखिमों की निगरानी, जल निकासी, भूगर्भीय स्थिरता और श्रमिकों की आपातकालीन सुरक्षा के इंतजाम कितने प्रभावी हैं।
444 मेगावाट की परियोजना
विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना अलकनंदा नदी पर विकसित की जा रही 444 मेगावाट की रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है। परियोजना में चार इकाइयां हैं और प्रत्येक इकाई की क्षमता 111 मेगावाट है। इसके प्रमुख भूमिगत हिस्सों में 13.4 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल और करीब 3.07 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल शामिल है। परियोजना का निर्माण टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड कर रहा है।
टीएचडीसी के परियोजना संबंधी दस्तावेजों के अनुसार टेल रेस टनल की लंबाई करीब 3.07 किलोमीटर और व्यास 8.8 मीटर है। परियोजना के भूमिगत हिस्सों में व्यापक सुरंग निर्माण कार्य किया जा रहा है। ऐसे में भूगर्भीय कमजोरी, पानी का रिसाव, अचानक मलबा आने और पहाड़ी ढलानों की स्थिरता जैसी चुनौतियां निर्माण कार्य के दौरान महत्वपूर्ण सुरक्षा जोखिम बनती हैं।
रेस्क्यू पर टिकी निगाहें
हादसे के बाद पूरी रात पीपलकोटी क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल रहा। टनल के बाहर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना और आईटीबीपी के जवानों की मौजूदगी में बचाव अभियान चलता रहा। स्थानीय लोग और श्रमिकों के परिजन भी घटनास्थल के आसपास जुटे रहे।
सबसे बड़ी चुनौती टनल के भीतर मौजूद पानी और मलबे को हटाकर लापता श्रमिकों तक पहुंचना रही। बचाव दलों ने उपलब्ध मशीनरी और उपकरणों की मदद से रास्ता बनाने का प्रयास किया। प्रशासन की प्राथमिकता टनल में फंसे प्रत्येक श्रमिक तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना रही।
नोट : यह खबर 14 अगस्त के तड़के उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर तैयार की गई है। रेस्क्यू अभियान जारी रहने के कारण मृतकों, सुरक्षित निकाले गए और लापता श्रमिकों की संख्या में बाद के अपडेट में बदलाव संभव है। विभिन्न एजेंसियों से रात में अलग-अलग समय पर मिले आंकड़ों में भी अंतर सामने आया है।
