उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट, अगले पांच दिन सतर्क रहने की चेतावनी
देहरादून, 29 अगस्त। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर तीखे तेवर दिखा सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने 29 अगस्त से 2 सितंबर तक राज्य के विभिन्न जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश, गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने और कुछ स्थानों पर अत्यंत तीव्र बारिश के दौर की चेतावनी जारी की है। मौसम की गंभीरता को देखते हुए राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग के अनुसार शनिवार 29 अगस्त को बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। इन दोनों जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश के अति तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर भी आ सकते हैं। देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। शेष जिलों में भी आकाशीय बिजली और तीव्र से अति तीव्र बारिश के दौर की आशंका है।
30 अगस्त को बारिश का दायरा और व्यापक रहने की संभावना है। देहरादून, पौड़ी, टिहरी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली, नैनीताल, चम्पावत, ऊधमसिंह नगर और बागेश्वर में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। राज्य के सभी जिलों में गरज के साथ आकाशीय बिजली तथा तीव्र से अति तीव्र बारिश के दौर आने का अनुमान है।
31 अगस्त को खतरा फिर बढ़ सकता है। देहरादून, बागेश्वर, चमोली और नैनीताल में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यंत तीव्र बारिश के दौर की चेतावनी है। टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चम्पावत और ऊधमसिंह नगर में भारी बारिश हो सकती है।
एक सितंबर को देहरादून और टिहरी में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है, जबकि पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, नैनीताल और हरिद्वार में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। दो सितंबर को देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग ने चेताया है कि अत्यधिक बारिश से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान गिरने, सड़क और राजमार्ग अवरुद्ध होने तथा पुलों और सड़कों के बहने जैसी घटनाएं हो सकती हैं। लगातार बारिश से बांधों और बैराजों से पानी का निकास बढ़ने के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है। छोटे नदी-नालों में अचानक उफान और स्थानीय स्तर पर फ्लैश फ्लड का भी खतरा बताया गया है। बिजली-पानी जैसी आवश्यक सेवाओं तथा परिवहन और आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।
चारधाम यात्रियों और पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतने तथा जरूरी होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, खड़ी ढलानों, उफनते नदी-नालों और निचले इलाकों से दूर रहने को कहा गया है। मौसम विभाग ने भारी बारिश के दौरान सक्रिय भूस्खलन क्षेत्र अथवा बाढ़ग्रस्त सड़क पार करने का प्रयास नहीं करने की सलाह भी दी है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने पर्वतीय जिलों में बारिश के दौरान यात्रियों की आवाजाही पर विशेष निगरानी रखने, सड़क बंद होने पर तत्काल खुलवाने, अधिकारियों को मोबाइल फोन चालू रखने तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े उपकरणों और वायरलेस व्यवस्था को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। भारी बारिश के दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही भी प्रतिबंधित रखने को कहा गया है।
