कतेड़ा नदी के पुराने पुल की रेलिंग क्षतिग्रस्त, सुरक्षा पाइप चोरी होने से बढ़ा खतरा

रिखणीखाल, 29 अगस्त (प्रभुपाल रावत)। लैंसडौन विधानसभा क्षेत्र के कंडलसेरा-द्वारी-भौन मोटर मार्ग पर कतेड़ा नदी पर बने करीब तीन दशक पुराने लोहे के पुल की सुरक्षा रेलिंग और पाइप कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कुछ लोहे के पाइप चोरी होने की बात भी सामने आई है। इससे पुल पर पैदल चलने वालों और वाहनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने पुल का निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त हिस्सों की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है।
कतेड़ा नदी पर इस लोहे के पुल का निर्माण वर्ष 1991 में शुरू हुआ था और 1994 में इसे यातायात के लिए खोल दिया गया। कंडलसेरा-द्वारी-भौन मार्ग पर स्थित होने के कारण यह पुल रिखणीखाल के सीमांत गांवों के साथ ही नैनीडांडा क्षेत्र के अनेक गांवों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क कड़ी है। यह मार्ग आगे कुमाऊं क्षेत्र से भी संपर्क स्थापित करता है, इसलिए स्थानीय लोग इसे क्षेत्र की जीवनरेखा मानते हैं।
हाल में पुल की स्थिति को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार इसकी सुरक्षा रेलिंग और लोहे के पाइप कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हैं। कुछ स्थानों पर पाइप वेल्डिंग से अलग हो गए हैं, जबकि दो-तीन पाइप चोरी होने की बात कही जा रही है। पुल की ऊंचाई अधिक होने के कारण रेलिंग का क्षतिग्रस्त होना विशेष रूप से स्कूली बच्चों, महिलाओं और पैदल यात्रियों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। रात के समय खतरा और बढ़ जाता है। रेलिंग के कई हिस्सों पर जंग भी दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल के निर्माण के बाद इस क्षेत्र में आवागमन की स्थिति में बड़ा बदलाव आया था। नब्बे के दशक से पहले बरसात के दौरान कतेड़ा नदी पार करना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती होती थी। कई बार बच्चों को कंधे पर बैठाकर नदी पार करानी पड़ती थी। पुल बनने के बाद वाहनों की आवाजाही सुगम हुई और रिखणीखाल तथा नैनीडांडा के दूरस्थ गांवों की संपर्क व्यवस्था मजबूत हुई।
करीब 32 वर्ष पुराने इस पुल पर अब यातायात का दबाव भी बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुराने पुल की भार क्षमता और वर्तमान यातायात आवश्यकताओं को देखते हुए इसके स्थान पर अधिक भार क्षमता वाले आधुनिक दो लेन कंक्रीट पुल के निर्माण पर भी विचार किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से पुल का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराने, चोरी हुए सुरक्षा पाइपों के स्थान पर नए पाइप लगाने, टूटी रेलिंग की वेल्डिंग और मरम्मत कराने तथा जंग लगे हिस्सों को दुरुस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी दुर्घटना की प्रतीक्षा करने के बजाय समय रहते सुरक्षा संबंधी कार्य किए जाने जरूरी हैं।
