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वाल्मीकि भी क्या कभी पत्रकार रहे होंगे? 

 

G.P. Bahuguna

बाल्मीकि के अनुसार रावण* के घर और सचिवालय का नाम भी* रालणालय” था ।उसी तर्ज में आज कोई पत्रकार किसी अलोकप्रिय शासक के कार्यालय का भी नामकरण कर दे तो क्या आश्चर्य ?
समाज में आज कई लोकरावण हैं, जो लोगों को तंग करते हैं I वाल्मीकि ने रावण नाम से कई विशेषण रचे Iजिनमें “लोकरावण” भी एक था I
अयोध्या में जब राम का राज्याभिषेक हो गया तो राज्य में निवास कर रहे तमाम ऋषि- महर्षि, शिक्षा संस्थानों,गुरुकुलों के कुलपति,प्रबुद्ध नागरिकों और शिक्षाविदो ने राहत की सांस ली और श्रीराम को बधाई देने अयोध्या पहुंचे I राजा राम ने उन सबका स्वागत सत्कार किया और पूछा आप लोगों का आगमन कैसे हुआ ? तब एक ऋषि बोले –
कुशलं नो महाबाहो सर्वत्र रघुननदन
त्वां दिष्ट्या कुशलिनं पश्यामो हतशात्रवम्
दृष्टया त्वया हतो राजन रावणो लोकरावण:II
हमारे लिए तो अब सर्वत्र कुशल ही कुशल है I खुशी की बात यह है कि आप सकुशल अपने घर पहुंच चुके और आपके सारे शत्रु मारे जा चुके हैं I आपने “जनता को रुलाने वाले रावण (लोक रावण)
का वध कर दिया हैI
वाल्मीमें रामायण का यह प्रसंग देखने लायक है I राम-रावण युद्ध महाभारत शैली में केवल दिन में लडे़े जाने वाले युद्ध की तरह नहीं था बल्कि यह युद्ध अनवरत दिन- रात चला –
नैव रात्रि न दिवसं न मुहूर्तम् न च क्षणम् I
रामरावणयोर्युद्धं विराममुपगच्छति-
राम और रावण का युद्ध न रात में भी बंद नहीं हुआ न दिन में, दो घड़ी क्या, एक क्षण के लिये भी युद्ध विराम नहीं हुआ I समकालीन लोगों ने जिन्होंने यह युद्ध देखा उन्होंने कहा कि – “रामरावणयोर्युद्धं रामरावणयोरिव” ।
वाल्मीकि ने रावण के घर और सचिवालय का नाम भी ‘रावणालय” रख दिया था ….

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