एंटी-डायबिटिक आयुर्वेदिक दवा बीजीआर-34 का उपयोग
The drug BGR-34 is available to the patients in the country since 2015.The formulation was developed and required scientific studies were carried out by National Botanical Research Institute (NBRI) and Central Institute of Medicinal and Aromatic Plants (CIMAP), research units functioning under Council of Scientific and Industrial Research (CSIR). The tests include standardization, product validation on the basis of modern scientific parameters, antioxidant activity determination, optimization of herbal components for best activity, assessment of anti-diabetic activity and safety studies etc.
नयी दिल्ली, 29 अगस्त। बीजीआर-34 दवा देश में मरीजों के लिए 2015 से उपलब्ध है। यह फॉर्मूलेशन नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स (सीमैप) द्वारा विकसित किया गया था, जो काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के अंतर्गत काम करने वाली अनुसंधान इकाइयाँ हैं। आवश्यक वैज्ञानिक अध्ययन भी इन्हीं संस्थानों द्वारा किए गए। इनमें मानकीकरण, आधुनिक वैज्ञानिक मापदंडों के आधार पर उत्पाद सत्यापन, एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि निर्धारण, सर्वोत्तम गतिविधि के लिए हर्बल घटकों का अनुकूलन, एंटी-डायबिटिक गतिविधि का आकलन और सुरक्षा अध्ययन आदि शामिल हैं।
देश में सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरी में आयुर्वेदिक दवा बीजीआर-34 की उपलब्धता संबंधित राज्य सरकार/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू)/केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस)/नगरपालिकाओं/कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई)/नई दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) आदि की खरीद एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र में आती है।
चूंकि बीजीआर-34 प्रोप्राइटरी आयुर्वेदिक मेडिसिन श्रेणी के अंतर्गत लाइसेंस प्राप्त है, इसलिए इसकी उपलब्धता केवल निविदाओं के माध्यम से ही संभव है। निविदा में बीजीआर-34 दवा को शामिल करना संबंधित खरीद एजेंसी के खरीद मानदंडों के लिए उत्तरदायी बोली, मूल्य और योग्य स्वीकृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पर निर्भर करता है।
एनडीएमसी और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) दिल्ली के किसी भी निवासी के लिए दवा उपलब्ध कराते हैं। ईएसआई में दवा की उपलब्धता व्यक्ति और उसके परिवार के पास वैध ईएसआई स्वास्थ्य कार्ड होने पर निर्भर करती है। सीजीएचएस में दवा सीजीएचएस लाभार्थियों को स्थानीय रसायनज्ञ के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है, क्योंकि यह निविदा के माध्यम से नहीं आती।
भारत सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और जिला अस्पतालों (डीएच) में आयुष सुविधाओं के सह-स्थान की रणनीति अपनाई है, जिससे मरीजों को एक ही खिड़की के तहत विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों का विकल्प मिलता है। आयुष डॉक्टरों/पैरामेडिक्स की नियुक्ति और उनका प्रशिक्षण स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा समर्थित है, जबकि आयुष अवसंरचना, उपकरण/फर्नीचर और दवाओं के लिए सहायता राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) की केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत आयुष मंत्रालय द्वारा प्रदान की जाती है। इसी प्रकार, मंत्रालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सहयोग से एनएएम के माध्यम से आयुष डिस्पेंसरी और मौजूदा उप स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड करके आयुष स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के संचालन के लिए भी प्रयास कर रहा है।
