साइबर ठगी पर पुलिस-बैंकों का समन्वय होगा मजबूत, ‘म्यूल खातों’ के खिलाफ चलेगा अभियान

देहरादून,1 सितम्बर । प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे साइबर और वित्तीय अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस और बैंकों के बीच समन्वय मजबूत किया जाएगा। साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले ‘म्यूल खातों’ की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाने के साथ ही ठगी के बाद होल्ड की गई रकम पीड़ितों को वापस दिलाने की प्रक्रिया भी तेज की जाएगी।
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में पुलिस विभाग और विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों की बैठक में साइबर एवं वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम और लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण पर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने पिछले तीन-चार वर्षों में साइबर और वित्तीय अपराधों में हुई वृद्धि को गंभीर बताते हुए कहा कि बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी बैठकों में साइबर ठगी को स्थायी एजेंडा बनाया जाए और इसकी नियमित समीक्षा हो।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका समय की होती है। इसलिए पुलिस और बैंकों के बीच सूचना के त्वरित आदान-प्रदान की ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे ठगी की सूचना मिलते ही संबंधित खाते और रकम पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को साइबर अपराधों के बदलते तौर-तरीकों की जानकारी देने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए।
पीड़ित को खुद दी जाए होल्ड रकम की जानकारी
मुख्य सचिव ने साइबर ठगी के बाद विभिन्न खातों में होल्ड की गई धनराशि को पीड़ित तक वापस पहुंचाने की प्रक्रिया को सरल और तेज करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिस पीड़ित की रकम होल्ड हो चुकी है, उसे इसकी जानकारी सक्रिय रूप से दी जाए, ताकि वह आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर रकम की बहाली के लिए आवेदन कर सके।
बैंकों के शिकायत निवारण तंत्र को प्रभावी बनाने और शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश भी दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि बैंक केवल शिकायत मिलने की प्रतीक्षा न करें, बल्कि आवश्यक मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर पीड़ित के हित में कार्रवाई करें।
‘म्यूल खातों’ की पहचान पर विशेष जोर
बैठक में साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ‘म्यूल अकाउंट’ यानी ऐसे बैंक खातों पर विशेष चर्चा हुई, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने या उसे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता है। मुख्य सचिव ने पुलिस और बैंकों को आपसी समन्वय से ऐसे संदिग्ध खातों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उन्होंने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठकों में भी साइबर एवं वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों को नियमित एजेंडा बनाने और लंबित मामलों की लगातार समीक्षा कर शीघ्र निस्तारण करने को कहा।
मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस, बैंक और संबंधित विभागों के बीच निरंतर सूचना-साझाकरण और जवाबदेही जरूरी है। समन्वित प्रयासों से ही साइबर ठगी पर नियंत्रण और पीड़ितों की रकम जल्द वापस दिलाना संभव होगा।
बैठक में सचिव शैलेश बगौली, आईजी डॉ. नीलेश आनन्द भरणे, अपर सचिव गृह तृप्ति भट्ट सहित प्रदेश में कार्यरत विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
