बागवानी, सुगंधित पौधों और कौशल विकास से रोजगार बढ़ाने पर उत्तराखंड का जोर
नीति आयोग के सदस्यों के साथ बैठक में विकास की संभावनाओं और चुनौतियों पर मंथन

देहरादून, 1 सितम्बर। । उत्तराखंड में बागवानी, फूलों की खेती, मत्स्य पालन, शहद उत्पादन और सुगंधित पौधों से जुड़े क्षेत्रों को रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने का प्रमुख माध्यम बनाया जाएगा। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बाजार से सीधा जुड़ाव और उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर जोर दिया जाएगा। राज्य में सघन सेब बागवानी के साथ कीवी और ड्रैगन फ्रूट जैसी अधिक आय देने वाली फसलों का दायरा भी बढ़ाया जाएगा।
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में नीति आयोग के वरिष्ठ सदस्यों प्रो. एम. श्रीनिवास और प्रो. के.वी. राजू के साथ हुई बैठक में राज्य के विकास की संभावनाओं, रोजगार सृजन, नवाचार और प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा हुई। विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने वर्तमान योजनाओं और भावी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी।
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए बागवानी, पुष्प उत्पादन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन में व्यापक संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और स्थानीय उत्पादों का मूल्य संवर्धन करने की दिशा में काम किया जा रहा है। सघन सेब बागवानी, कीवी और ड्रैगन फ्रूट उत्पादन को प्रोत्साहित कर किसानों की आमदनी बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने नीति आयोग से विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए परियोजना प्रस्ताव रिपोर्ट के प्रारूप साझा करने का आग्रह किया। साथ ही इन प्रस्तावों को अधिक उपयोगी और परिणाम आधारित बनाने की आवश्यकता बताई।
स्थानीय युवाओं और श्रमिकों को कौशल से जोड़ने पर जोर
नीति आयोग के वरिष्ठ सदस्य प्रो. के.वी. राजू ने स्थानीय मानव संसाधन को रोजगार की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ऐप और डिजिटल मंच विकसित कर स्थानीय श्रमिकों को आवश्यक कौशल प्रशिक्षण दिया जा सकता है। इसके बाद उन्हें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ा जाना चाहिए। इससे प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकेंगे।
स्वास्थ्य क्षेत्र पर चर्चा के दौरान नीति आयोग के वरिष्ठ सदस्य प्रो. एम. श्रीनिवास ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता यानी ‘आभा आईडी’ का अधिक से अधिक लोगों तक विस्तार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड मजबूत होने से नागरिकों को बेहतर और निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
सुगंधित पौधों के उत्पादन को बाजार से जोड़ने की तैयारी
बैठक में उत्तराखंड के सुगंधित पौधा क्षेत्र में उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। उत्पादन को बाजार की वास्तविक मांग से जोड़ने के साथ उत्पादों की ग्रेडिंग और उनके स्रोत की पहचान सुनिश्चित करने वाली ट्रेसेबिलिटी व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई गई। अधिकारियों ने इस क्षेत्र में राज्य में चल रहे प्रयासों और भविष्य की संभावनाओं की जानकारी नीति आयोग के सदस्यों को दी।
मानव-वन्यजीव संघर्ष और वनाग्नि बड़ी चुनौती
विकास योजनाओं के साथ उत्तराखंड की पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियों पर भी बैठक में चर्चा हुई। मानव-वन्यजीव संघर्ष, बंदरों और जंगली सूअरों से फसलों को होने वाला नुकसान तथा वनाग्नि को राज्य की प्रमुख चुनौतियों में शामिल किया गया। इनके समाधान के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों के साथ स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य के सतत और समावेशी विकास के लिए उपलब्ध प्राकृतिक और मानव संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के साथ स्थानीय समस्याओं का समाधान भी जरूरी है। नीति आयोग की ओर से दिए गए सुझावों का अध्ययन कर उपयोगी सुझावों को राज्य की नीतियों और कार्ययोजनाओं में शामिल किया जाएगा।
बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु और आर. मीनाक्षी सुन्दरम, नीति आयोग की सलाहकार नीलम पटेल, सचिव डॉ. वी. षणमुगम, डॉ. सुरेन्द्र नारायण पाण्डेय, श्रीधर बाबू अद्दांकी, ज्योति यादव, धीराज सिंह गर्ब्याल, रंजना राजगुरु और अपर सचिव नरेन्द्र सिंह भण्डारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
