मुरादाबाद रेल मंडल के 712 किलोमीटर रेलमार्ग पर लगेगा ‘कवच 4.0’, उत्तराखंड के प्रमुख रेलमार्गों की सुरक्षा भी होगी मजबूत
170 करोड़ रुपये की परियोजना को रेलवे की मंजूरी, देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, रुड़की, लक्सर और कोटद्वार जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन मुरादाबाद मंडल के दायरे में
By- Usha Rawat
नई दिल्ली/देहरादून, 1 सितंबर। उत्तराखंड सहित उत्तर प्रदेश के बड़े रेल नेटवर्क को संभालने वाले उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल में रेल सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। भारतीय रेलवे ने मंडल के शेष 712 रूट किलोमीटर रेलखंड पर स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच 4.0’ लगाने के लिए 170 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी है। इस प्रणाली के लागू होने से सिग्नल की अनदेखी, निर्धारित सीमा से अधिक गति और आमने-सामने की टक्कर जैसे जोखिम कम करने में मदद मिलेगी।
इस परियोजना का उत्तराखंड के लिहाज से भी विशेष महत्व है। उत्तर रेलवे के आधिकारिक मंडलीय मानचित्र के अनुसार देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, योगनगरी ऋषिकेश, रायवाला, रुड़की, लक्सर और कोटद्वार सहित उत्तराखंड के कई महत्वपूर्ण स्टेशन और रेलखंड मुरादाबाद मंडल के नेटवर्क का हिस्सा हैं। मंडल उत्तराखंड को उत्तर प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाले प्रमुख रेलमार्गों का संचालन करता है।
मुरादाबाद मंडल का नेटवर्क काफी विस्तृत है। उत्तर रेलवे के 2024 के मंडलीय सिस्टम मानचित्र में इसकी कुल रूट लंबाई करीब 1,407.72 किलोमीटर दर्ज है। इस लिहाज से शेष 712 रूट किलोमीटर पर कवच लगाने की स्वीकृति मंडल के रेल सुरक्षा ढांचे के विस्तार की एक महत्वपूर्ण परियोजना है।
हरिद्वार-देहरादून जैसे व्यस्त स्टेशन भी इसी मंडल में
मुरादाबाद रेल मंडल का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि इसके अंतर्गत उत्तराखंड और पश्चिमी तथा मध्य उत्तर प्रदेश के कई बड़े रेलवे स्टेशन आते हैं। इनमें मुरादाबाद जंक्शन, बरेली जंक्शन, शाहजहांपुर, हरदोई, रामपुर, अमरोहा, हापुड़, चंदौसी, नजीबाबाद, बिजनौर, गजरौला, धामपुर और नगीना के साथ उत्तराखंड के हरिद्वार, देहरादून, रुड़की और कोटद्वार जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल हैं। रेलवे की आधिकारिक स्टेशन सूची भी हरिद्वार, बरेली, देहरादून, हरदोई, मुरादाबाद, रुड़की, शाहजहांपुर, अमरोहा, चंदौसी, हापुड़ और नजीबाबाद को मुरादाबाद मंडल के अंतर्गत दर्ज करती है।
हरिद्वार और देहरादून इस मंडल के यात्री यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्टेशन हैं। उत्तर रेलवे के दस्तावेजों में हरिद्वार को एनएसजी-2 तथा देहरादून, मुरादाबाद और बरेली को एनएसजी-3 श्रेणी के प्रमुख स्टेशनों के रूप में दर्ज किया गया है। हरिद्वार और देहरादून के साथ मुरादाबाद और बरेली के पुनर्विकास की योजनाएं भी रेलवे के महत्वपूर्ण स्टेशन विकास कार्यक्रमों में शामिल रही हैं।
इसके अलावा अमृत भारत स्टेशन योजना में मुरादाबाद मंडल के अमरोहा, आंवला, बालामऊ, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौसी, धामपुर, गजरौला, गढ़मुक्तेश्वर, हापुड़, हरदोई, हर्रावाला, कोटद्वार, नगीना, नजीबाबाद, रामपुर, रुड़की, स्योहारा और शाहजहांपुर सहित 19 स्टेशन शामिल हैं।
क्या है ‘कवच’, कैसे बचाता है ट्रेन को हादसे से
‘कवच’ भारतीय रेलवे की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। इसका मुख्य उद्देश्य मानवीय भूल अथवा अन्य परिचालन परिस्थितियों के कारण पैदा होने वाले दुर्घटना जोखिम को कम करना है। यदि लोको पायलट खतरे का संकेत देने वाले सिग्नल के बावजूद ट्रेन आगे बढ़ाता है या निर्धारित सुरक्षित गति का पालन नहीं कर पाता, तो कवच प्रणाली चेतावनी देने के साथ जरूरत पड़ने पर स्वतः ब्रेक लगाने में सक्षम है।
इसी तरह ट्रेन की गति निर्धारित सीमा से अधिक होने की स्थिति में यह उसे नियंत्रित करने में सहायता करती है। ऐसी परिस्थितियों में, जहां दो ट्रेनों के बीच असुरक्षित स्थिति बनने का खतरा हो, कवच अतिरिक्त सुरक्षा परत के रूप में काम करता है। हालांकि कवच को दुर्घटनाओं के हर कारण का समाधान नहीं माना जा सकता, लेकिन सिग्नलिंग और ट्रेन संचालन से जुड़े कई महत्वपूर्ण जोखिम कम करने में इसकी बड़ी भूमिका है।
उत्तराखंड के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है परियोजना
उत्तराखंड में रेल नेटवर्क अपेक्षाकृत सीमित है और इसका बड़ा हिस्सा मुरादाबाद मंडल के माध्यम से देश के मुख्य रेल नेटवर्क से जुड़ता है। हरिद्वार राज्य का प्रमुख धार्मिक और रेलवे प्रवेश द्वार है, जबकि देहरादून राजधानी का प्रमुख टर्मिनल स्टेशन है। योगनगरी ऋषिकेश और ऋषिकेश चारधाम यात्रा के प्रवेश क्षेत्र से जुड़े हैं। इसी तरह कोटद्वार गढ़वाल के बड़े हिस्से के लिए महत्वपूर्ण रेल स्टेशन और रुड़की तथा लक्सर राज्य को मैदानी रेल नेटवर्क से जोड़ने वाले प्रमुख केंद्र हैं। उत्तर रेलवे के आधिकारिक मानचित्र में इन रेलमार्गों को मुरादाबाद मंडल के नेटवर्क के हिस्से के रूप में दिखाया गया है।
हालांकि रेलवे की विज्ञप्ति में स्वीकृत 712 रूट किलोमीटर के भीतर आने वाले प्रत्येक रेलखंड और स्टेशन की अलग-अलग सूची नहीं दी गई है, इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि मंडल के उपर्युक्त सभी स्टेशन इस नई 170 करोड़ रुपये की स्वीकृति के तहत ही कवच से कवर होंगे। परियोजना का वास्तविक स्टेशन और खंडवार दायरा रेलवे द्वारा विस्तृत कार्ययोजना के अनुसार निर्धारित होगा।
भारतीय रेलवे का कहना है कि मुरादाबाद मंडल के शेष 712 रूट किलोमीटर में कवच 4.0 की तैनाती से मंडल के सुरक्षा ढांचे को मजबूती मिलेगी। यह परियोजना देशभर में कवच का दायरा बढ़ाने तथा सिग्नलिंग और ट्रेन सुरक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने की रेलवे की व्यापक योजना का हिस्सा है।
